Recession News: दुनिया की कई बड़ी अर्थव्यवस्थाएं मंदी का सामना कर चुकी हैं। अमेरिका की 1929 की महामंदी हो या जापान का ‘लॉस्ट डिकेड’, इन देशों ने समय के साथ वापसी कर ली। लेकिन एक ऐसा देश भी है जिसने आधुनिक इतिहास की सबसे गंभीर आर्थिक मंदी झेली, जहां करीब आठ वर्षों में अर्थव्यवस्था का 75 से 80 फीसदी हिस्सा खत्म हो गया। यह देश है वेनेजुएला, जिसके पास दुनिया का सबसे बड़ा प्रमाणित कच्चे तेल का भंडार मौजूद है।
Highlights
- दुनिया की सबसे भयावह आर्थिक मंदी का सामना वेनेजुएला ने किया।
- 2013 से 2021 तक देश की GDP में 75-80% तक की गिरावट दर्ज हुई।
- दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार होने के बावजूद अर्थव्यवस्था ढह गई।
- अमेरिका, जापान, रूस, अर्जेंटीना और जिम्बाब्वे भी गंभीर मंदी झेल चुके हैं।
दुनिया की सबसे बड़ी आर्थिक तबाही का शिकार बना वेनेजुएला
नई दिल्ली: हाल के वर्षों में अमेरिका में मंदी आने की आशंकाएं लगातार जताई जाती रही हैं। हालांकि अब कई वैश्विक आर्थिक संस्थानों के अनुसार अमेरिका में इस वर्ष मंदी की संभावना काफी कम हो गई है। लेकिन जब दुनिया की सबसे भयावह आर्थिक मंदी की बात होती है तो सबसे पहले नाम वेनेजुएला का आता है।
दक्षिण अमेरिका का यह देश वर्ष 2013 से 2021 तक लगातार आर्थिक संकट में फंसा रहा। इस दौरान देश की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) लगभग 75 से 80 प्रतिशत तक सिकुड़ गई, जिसे आधुनिक आर्थिक इतिहास की सबसे बड़ी गिरावटों में गिना जाता है।
तेल का खजाना होने के बावजूद क्यों बर्बाद हुई अर्थव्यवस्था?
वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा प्रमाणित कच्चे तेल का भंडार है। सामान्य परिस्थितियों में यह किसी भी देश की सबसे बड़ी आर्थिक ताकत हो सकती थी। लेकिन कई कारणों ने देश को आर्थिक संकट में धकेल दिया।
मुख्य वजहों में शामिल रहे—
- तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में भारी गिरावट
- सरकारी नीतियों की विफलता
- उत्पादन में लगातार कमी
- अत्यधिक महंगाई (Hyperinflation)
- विदेशी प्रतिबंध (Sanctions)
- राजनीतिक अस्थिरता और निवेश में गिरावट
इन कारणों से देश की आय तेजी से घटी, बेरोजगारी बढ़ी और लाखों लोगों को देश छोड़कर दूसरे देशों में पलायन करना पड़ा।
सीरिया भी झेल चुका है भीषण आर्थिक संकट
गृहयुद्ध से प्रभावित सीरिया भी दुनिया की सबसे गंभीर आर्थिक मंदियों में शामिल रहा। वर्ष 2011 से 2016 के बीच देश की अर्थव्यवस्था लगभग 63 प्रतिशत तक सिकुड़ गई।
लंबे गृहयुद्ध, बुनियादी ढांचे के विनाश और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों ने देश की आर्थिक स्थिति को बुरी तरह प्रभावित किया।
जिम्बाब्वे में महंगाई ने तोड़ी कमर
अफ्रीकी देश जिम्बाब्वे ने वर्ष 2000 से 2008 के बीच गंभीर आर्थिक संकट का सामना किया। इस दौरान देश की GDP लगभग 50 प्रतिशत तक घट गई।
यह दौर दुनिया की सबसे भयावह हाइपरइन्फ्लेशन घटनाओं में शामिल रहा, जहां कीमतें इतनी तेजी से बढ़ीं कि स्थानीय मुद्रा लगभग बेकार हो गई।
रूस और क्यूबा भी नहीं बच सके
सोवियत संघ के विघटन के बाद रूस को 1990 के दशक में बड़े आर्थिक झटके का सामना करना पड़ा। उस समय देश की अर्थव्यवस्था में 40 से 45 प्रतिशत तक गिरावट आई।
इसी अवधि में क्यूबा भी आर्थिक संकट में फंस गया और उसकी GDP में लगभग 35 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।
अर्जेंटीना आज भी पूरी तरह नहीं उबर पाया
एक समय दुनिया के सबसे समृद्ध देशों में गिने जाने वाला अर्जेंटीना वर्ष 1998 से 2002 के बीच गहरे आर्थिक संकट में फंस गया।
इन चार वर्षों के दौरान देश की GDP में करीब 28 प्रतिशत की गिरावट आई। बार-बार बढ़ती महंगाई, मुद्रा संकट और कर्ज की समस्या के कारण अर्जेंटीना आज भी पूरी तरह आर्थिक स्थिरता हासिल नहीं कर पाया है।
अमेरिका की ‘महामंदी’ ने बदल दिया था दुनिया का इतिहास
दुनिया की सबसे चर्चित आर्थिक मंदी अमेरिका की ग्रेट डिप्रेशन (Great Depression) रही, जो 1929 से 1933 तक चली।
इस दौरान—
- अमेरिकी GDP में लगभग 28 प्रतिशत की गिरावट आई।
- लाखों लोग बेरोजगार हो गए।
- हजारों बैंक बंद हो गए।
- शेयर बाजार धराशायी हो गया।
हालांकि बाद के वर्षों में अमेरिका ने मजबूत आर्थिक नीतियों और औद्योगिक विकास के दम पर शानदार वापसी की।
जापान का ‘लॉस्ट डिकेड’
1990 के दशक में जापान की एसेट बबल फूटने के बाद देश कई वर्षों तक बेहद धीमी आर्थिक वृद्धि के दौर में रहा।
इस अवधि को “लॉस्ट डिकेड” कहा जाता है। लंबे समय तक महंगाई बेहद कम रही, निवेश घटा और आर्थिक विकास लगभग ठहर गया।
इन देशों ने भी झेली गंभीर मंदी
दुनिया के कई अन्य देशों ने भी अलग-अलग समय में बड़ी आर्थिक मंदी का सामना किया है।
- ग्रीस
- जर्मनी
- स्पेन
- फिनलैंड
- लात्विया
- यूक्रेन
- इंडोनेशिया
- जापान
इनमें से अधिकांश देशों ने आर्थिक सुधार, संरचनात्मक बदलाव और निवेश बढ़ाकर धीरे-धीरे अपनी अर्थव्यवस्था को फिर से पटरी पर लाने में सफलता हासिल की।
क्या सीख देती है वेनेजुएला की कहानी?
वेनेजुएला का उदाहरण बताता है कि केवल प्राकृतिक संसाधनों से कोई देश समृद्ध नहीं बनता। मजबूत आर्थिक नीतियां, राजनीतिक स्थिरता, निवेश के अनुकूल माहौल और विविध अर्थव्यवस्था किसी भी देश की दीर्घकालिक मजबूती के लिए जरूरी हैं। यदि इन क्षेत्रों में लगातार कमजोरी बनी रहे तो दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार भी किसी अर्थव्यवस्था को संकट से नहीं बचा सकता।


