FSSAI Action on Rum Whisky Brands: देश में लोकप्रिय रम और व्हिस्की ब्रांड्स पर खाद्य सुरक्षा नियामक FSSAI की कार्रवाई का असर दिखने लगा है। ओल्ड मॉन्क (Old Monk), मैकडॉवेल्स (McDowell’s), रॉयल चैलेंज (Royal Challenge), एन्टीक्विटी ब्लू (Antiquity Blue) और बैगपाइपर (Bagpiper) जैसे कई चर्चित ब्रांड्स की सप्लाई महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के कुछ बाजारों में प्रभावित हुई है।
FSSAI ने इन कंपनियों पर आर्टिफिशियल फ्लेवर के इस्तेमाल और गलत लेबलिंग से जुड़े नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया है। नियामक का कहना है कि कुछ कंपनियां सामान्य स्पिरिट या एक्स्ट्रा न्यूट्रल अल्कोहल (ENA) में बाहरी फ्लेवर मिलाकर रम और व्हिस्की जैसा स्वाद और खुशबू तैयार कर रही थीं।
क्या है पूरा मामला?
कई शराब ब्रांड्स अपने उत्पादों को वर्षों पुराना बताकर बेचते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या वास्तव में वह शराब उतनी ही पुरानी होती है या फिर उसमें फ्लेवर मिलाकर पुराने रम और व्हिस्की जैसा स्वाद दिया जाता है।
इसी मामले में FSSAI ने जांच शुरू की। जांच में सामने आया कि कुछ निर्माताओं द्वारा ऐसे फ्लेवर का इस्तेमाल किया जा रहा था, जो पारंपरिक रम और व्हिस्की की खुशबू और स्वाद की नकल करते हैं।
FSSAI के मुताबिक, Food Safety and Standards (Alcoholic Beverages) Regulations, 2018 के तहत ब्लेंडेड स्पिरिट की उम्र का दावा उस मिश्रण में मौजूद सबसे कम उम्र वाली स्पिरिट के आधार पर किया जाता है।
Old Monk XXX Rum के दावे पर सवाल
FSSAI ने खास तौर पर Old Monk XXX Rum के “7 Year Old Blended” दावे को लेकर आपत्ति जताई है। नियामक का कहना है कि ब्लेंडेड स्पिरिट में उम्र बताने के लिए तय नियमों का पालन जरूरी है।
अगर किसी ब्लेंड में अलग-अलग उम्र की स्पिरिट मिलाई गई है तो उसकी उम्र का दावा सबसे कम उम्र वाली स्पिरिट के आधार पर किया जाना चाहिए।
किन कंपनियों के प्रोडक्ट्स पर असर पड़ा?
FSSAI की जांच और लैब रिपोर्ट के आधार पर कुछ कंपनियों के उत्पादों की बिक्री पर रोक लगाने के निर्देश जारी किए गए हैं।
इनमें शामिल हैं:
- मोहन रॉकी स्प्रिंगवॉटर की खोपोली यूनिट
- यूनाइटेड स्पिरिट्स की बारामती फैसिलिटी
- मध्य प्रदेश की INBREW बेवरेजेज
- एसोसिएटेड अल्कोहल एंड ब्रुअरीज
- यूनाइटेड स्पिरिट्स की मध्य प्रदेश स्थित एक अन्य यूनिट
इन कंपनियों के कुछ उत्पादों की सप्लाई प्रभावित हुई है।
महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में दिखा असर
FSSAI की कार्रवाई के बाद महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के कई बाजारों में कुछ रम और व्हिस्की ब्रांड्स उपलब्ध नहीं हो रहे हैं। हालांकि कंपनियों ने इस कार्रवाई के खिलाफ कानूनी रास्ता अपनाना शुरू कर दिया है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, दो कंपनियों की अपील पर FSSAI ने कुछ शर्तों के साथ राहत दी है। इसके तहत मौजूदा स्टॉक की बिक्री को कुछ नियमों के साथ अनुमति दी गई है।
कंपनियों ने उठाया कदम
शराब उद्योग से जुड़े संगठनों CIABC और ISWAI ने FSSAI के सामने इंडस्ट्री का पक्ष रखा है। वहीं कुछ कंपनियां तत्काल राहत के लिए हाई कोर्ट जाने की तैयारी में हैं।
कंपनियों का पक्ष है कि उनके उत्पाद लंबे समय से बाजार में मौजूद हैं और वे तय नियमों के अनुसार काम कर रही हैं।
आगे भी हो सकती है कार्रवाई
FSSAI का कहना है कि जांच अभी जारी है और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर अन्य निर्माताओं के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।
नियामक का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उपभोक्ताओं को शराब उत्पादों की सही जानकारी मिले और लेबल पर किए गए दावे वास्तविक हों।
उपभोक्ताओं पर क्या असर पड़ेगा?
फिलहाल इसका सबसे बड़ा असर उन ग्राहकों पर पड़ा है जो इन लोकप्रिय ब्रांड्स को खरीदते हैं। बाजार में सप्लाई कम होने से कुछ जगहों पर उपलब्धता प्रभावित हुई है।
हालांकि यह कार्रवाई शराब की बिक्री पर प्रतिबंध नहीं है, बल्कि उन उत्पादों और दावों की जांच से जुड़ी है जिनमें FSSAI को नियमों के उल्लंघन की आशंका मिली है। आने वाले दिनों में कोर्ट और FSSAI के फैसलों के बाद स्थिति साफ होगी।


