सरकार द्वारा सिगरेट और तंबाकू उत्पादों पर टैक्स बढ़ाने का असर अब देश की प्रमुख सिगरेट कंपनियों के कारोबार में साफ दिखाई देने लगा है। अप्रैल-जून 2026 तिमाही के नतीजों में ITC, Godfrey Phillips India और VST Industries तीनों ने बिक्री, कमाई और मुनाफे पर दबाव की बात कही है। इन कंपनियों की भारतीय सिगरेट बाजार में करीब 90 फीसदी हिस्सेदारी मानी जाती है, इसलिए इनके नतीजे पूरे उद्योग की मौजूदा स्थिति का संकेत भी देते हैं।
कंपनियों का कहना है कि नई टैक्स व्यवस्था लागू होने के बाद सिगरेट की कीमतें बढ़ गईं, जिससे ग्राहकों की खरीदारी प्रभावित हुई और बिक्री की मात्रा (Volume) में कमी दर्ज की गई।
सरकार ने टैक्स व्यवस्था में क्या बदलाव किया?
सरकार ने फरवरी 2026 से सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों पर टैक्स व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया था। नई व्यवस्था के तहत:
- सिगरेट पर 40% GST लागू किया गया।
- इसके अलावा अलग से अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (Excise Duty) लगाया गया।
- अतिरिक्त शुल्क सिगरेट की लंबाई के आधार पर तय किया गया।
इससे पहले सिगरेट पर 28% GST और Compensation Cess लागू था। नई व्यवस्था लागू होने के बाद टैक्स का बोझ बढ़ा और इसका सीधा असर खुदरा कीमतों पर पड़ा।
महंगी हुई सिगरेट, ग्राहकों ने घटाई खरीद
नई टैक्स व्यवस्था लागू होने के बाद कई लोकप्रिय ब्रांडों के 10 सिगरेट वाले पैकेट की कीमत 22 से 25 रुपये तक बढ़ गई। कीमतों में बढ़ोतरी का असर उपभोक्ताओं की खरीदारी पर पड़ा और कई लोगों ने सिगरेट की खपत कम कर दी।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब किसी उत्पाद की कीमत अचानक बढ़ती है तो शुरुआती महीनों में उसकी मांग पर असर पड़ना सामान्य बात है। यही स्थिति इस समय सिगरेट उद्योग में भी देखने को मिल रही है।
ITC: टैक्स बढ़ने से राजस्व बढ़ा, लेकिन वास्तविक बिक्री कमजोर
देश की सबसे बड़ी सिगरेट कंपनी ITC ने जून तिमाही में सिगरेट कारोबार से कुल राजस्व बढ़ने की जानकारी दी है। हालांकि कंपनी ने स्पष्ट किया कि यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से टैक्स और कीमतों में वृद्धि की वजह से हुई है।
यदि टैक्स के प्रभाव को अलग कर दिया जाए तो कंपनी की वास्तविक कमाई में गिरावट दर्ज की गई है। इससे संकेत मिलता है कि ऊंची कीमतों के कारण सिगरेट की बिक्री की मात्रा में कमी आई है।
ITC के पोर्टफोलियो में कई लोकप्रिय ब्रांड शामिल हैं, जिनमें:
- Gold Flake
- Classic
- Wills Navy Cut
- Scissors
- Capstan
- Players
- India Kings
जैसे ब्रांड प्रमुख हैं।
Godfrey Phillips India का मुनाफा 44% से ज्यादा घटा
Godfrey Phillips India के लिए भी अप्रैल-जून तिमाही चुनौतीपूर्ण रही।
मुख्य बातें:
- शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 44% से अधिक घट गया।
- कुल राजस्व में बढ़ोतरी दर्ज हुई।
- राजस्व बढ़ने की मुख्य वजह सरकार को चुकाया गया अधिक एक्साइज ड्यूटी रही।
- टैक्स का प्रभाव हटाने पर वास्तविक बिक्री और कमाई में गिरावट दिखाई दी।
कंपनी भारत में कई प्रमुख ब्रांडों की बिक्री करती है, जिनमें:
- Four Square
- Red & White
- Cavanders
- Stellar
- North Pole
- Tipper
- Marlboro (भारत में लाइसेंस के तहत)
शामिल हैं।
VST Industries पर भी दिखा टैक्स बढ़ोतरी का असर
VST Industries ने भी माना कि नई टैक्स व्यवस्था का उसके कारोबार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है।
कंपनी के अनुसार:
- शुद्ध मुनाफा लगभग 24% घटा।
- सिगरेट की बिक्री में करीब 14% की गिरावट दर्ज हुई।
- बढ़ती कीमतों का असर ग्राहकों की मांग पर साफ दिखाई दिया।
VST Industries के प्रमुख ब्रांडों में:
- Total
- Editions
- Charms
शामिल हैं।
पूरे सिगरेट उद्योग के लिए क्या संकेत?
ITC, Godfrey Phillips India और VST Industries मिलकर भारतीय सिगरेट बाजार का लगभग 90% हिस्सा नियंत्रित करती हैं। ऐसे में इन तीनों कंपनियों के कमजोर तिमाही नतीजे यह संकेत देते हैं कि नई टैक्स व्यवस्था का असर केवल किसी एक कंपनी तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे संगठित सिगरेट उद्योग पर पड़ा है।
आने वाली तिमाहियों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कंपनियां कीमतों में और बदलाव करती हैं या फिर मांग को बढ़ाने के लिए नई रणनीति अपनाती हैं। वहीं सरकार की ओर से टैक्स नीति में किसी संभावित बदलाव पर भी बाजार की नजर रहेगी।
निष्कर्ष
सरकार द्वारा सिगरेट पर टैक्स बढ़ाने का उद्देश्य राजस्व बढ़ाने और तंबाकू की खपत को कम करना था। हालांकि इसका सीधा असर सिगरेट कंपनियों के कारोबार पर भी दिखाई देने लगा है। अप्रैल-जून तिमाही में ITC, Godfrey Phillips India और VST Industries तीनों ने बिक्री की मात्रा और मुनाफे पर दबाव की बात स्वीकार की है। यदि कीमतें इसी स्तर पर बनी रहती हैं, तो आने वाली तिमाहियों में भी उद्योग के प्रदर्शन पर इसका असर देखने को मिल सकता है।


