भारत के विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करने की दिशा में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की नई पहल बेहद सफल साबित होती दिख रही है। आरबीआई द्वारा 8 जून 2026 से शुरू की गई रियायती डॉलर स्वैप (Dollar Swap) सुविधा के तहत देश में विदेशी मुद्रा का रिकॉर्ड इनफ्लो देखने को मिला है। महज दो महीने से भी कम समय में इस योजना के जरिए 40.8 अरब डॉलर (लगभग ₹3.5 लाख करोड़) से अधिक की विदेशी मुद्रा भारत आई है।
इसमें सबसे बड़ी हिस्सेदारी Foreign Currency Non-Resident (Bank) यानी FCNR(B) डिपॉजिट की रही, जिसके जरिए अकेले 36.72 अरब डॉलर का निवेश आया। खास बात यह है कि पिछले दो हफ्तों में ही FCNR(B) डिपॉजिट में करीब 77 फीसदी की तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
Highlights
- RBI की नई डॉलर स्वैप सुविधा को मिला जबरदस्त रिस्पॉन्स
- 31 जुलाई तक कुल विदेशी मुद्रा इनफ्लो $40.8 अरब पहुंचा
- FCNR(B) डिपॉजिट के जरिए अकेले $36.72 अरब आए
- सिर्फ दो हफ्तों में FCNR(B) इनफ्लो में 77% की छलांग
- 2013 की तुलना में इस बार ज्यादा विदेशी मुद्रा जुटी
- SBI Research का अनुमान- सितंबर तक $65-70 अरब पहुंच सकता है आंकड़ा
क्या है RBI की नई FCNR(B) स्कीम?
भारतीय रिजर्व बैंक ने 8 जून 2026 को विदेशी मुद्रा आकर्षित करने के उद्देश्य से रियायती डॉलर स्वैप सुविधा (Concessional Dollar Swap Facility) शुरू की थी।
इस सुविधा के तहत बैंक विदेशों से मिलने वाले नए FCNR(B) डिपॉजिट, Overseas Foreign Currency Borrowing (OFCB) और External Commercial Borrowing (ECB) को RBI के साथ विशेष दर पर स्वैप कर सकते हैं।
इस व्यवस्था से बैंकों की विदेशी मुद्रा जुटाने की लागत कम होती है और उन्हें विदेशों से अधिक निवेश आकर्षित करने में मदद मिलती है।
दो महीने में आया रिकॉर्ड विदेशी निवेश
RBI के ताजा आंकड़ों के अनुसार 31 जुलाई 2026 तक इस विशेष सुविधा के तहत कुल 40.8 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा भारत आई।
इसमें शामिल हैं—
| माध्यम | राशि |
|---|---|
| FCNR(B) डिपॉजिट | $36.72 अरब |
| OFCB | $2.6 अरब |
| ECB | $1.5 अरब |
| कुल विदेशी मुद्रा इनफ्लो | $40.8 अरब |
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि कुल विदेशी मुद्रा प्रवाह का अधिकांश हिस्सा FCNR(B) डिपॉजिट से आया है।
सिर्फ दो हफ्तों में 77% की छलांग
17 जुलाई तक RBI के पास FCNR(B) डिपॉजिट के जरिए 20.72 अरब डॉलर आए थे।
इसके बाद केवल दो सप्ताह के भीतर यह आंकड़ा बढ़कर 36.72 अरब डॉलर पहुंच गया, यानी करीब 77 फीसदी की वृद्धि दर्ज हुई।
यह तेजी बताती है कि विदेशों में रहने वाले भारतीयों (NRI) और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों ने RBI की इस सुविधा पर भरोसा जताया है।
2013 का रिकॉर्ड भी टूटा
इस तरह की सुविधा RBI ने पहली बार नहीं दी है।
साल 2013 में रुपये पर दबाव के दौरान भी FCNR(B) स्कीम लाई गई थी, जिसके तहत करीब 26 अरब डॉलर जुटाए गए थे।
इस बार महज दो महीने के भीतर ही 36.72 अरब डॉलर जुटाकर उस रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया गया है।
बैंकों को क्या फायदा मिल रहा है?
रियायती डॉलर स्वैप सुविधा के कारण बैंक:
- कम लागत पर विदेशी मुद्रा जुटा पा रहे हैं।
- डॉलर की हेजिंग लागत लगभग शून्य (Zero Cost Hedging) के साथ कर पा रहे हैं।
- विदेशी मुद्रा जोखिम को आसानी से मैनेज कर रहे हैं।
- NRI डिपॉजिट आकर्षित करने में अधिक प्रतिस्पर्धी बन रहे हैं।
यही वजह है कि कई बैंकों ने विदेशों में FCNR(B) डिपॉजिट पर आकर्षक ब्याज दरें भी पेश की हैं।
कब तक उपलब्ध रहेगी यह सुविधा?
RBI के अनुसार—
- FCNR(B) डिपॉजिट के लिए यह सुविधा 30 सितंबर 2026 तक उपलब्ध रहेगी।
- OFCB और ECB के लिए यह सुविधा 31 दिसंबर 2026 तक जारी रहेगी।
इस अवधि के दौरान बैंक RBI के साथ विशेष दर पर डॉलर स्वैप कर सकेंगे।
सितंबर तक $70 अरब पहुंच सकता है आंकड़ा
SBI Research का अनुमान है कि यदि मौजूदा रफ्तार जारी रही तो 30 सितंबर 2026 तक FCNR(B) डिपॉजिट के जरिए विदेशी मुद्रा प्रवाह 65 से 70 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।
यदि ऐसा होता है तो यह भारत के विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि होगी।
भारत की अर्थव्यवस्था के लिए क्यों है अहम?
विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ने से देश को कई फायदे मिलते हैं—
- रुपये को मजबूती मिलती है।
- आयात भुगतान आसान होता है।
- वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता से सुरक्षा मिलती है।
- निवेशकों का भरोसा बढ़ता है।
- वित्तीय स्थिरता मजबूत होती है।
इसी वजह से RBI की यह पहल भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
निष्कर्ष
RBI की नई FCNR(B) और डॉलर स्वैप सुविधा ने बेहद कम समय में शानदार परिणाम दिए हैं। केवल दो महीने के भीतर 40.8 अरब डॉलर से अधिक का विदेशी मुद्रा प्रवाह इस बात का संकेत है कि अंतरराष्ट्रीय निवेशकों और एनआरआई समुदाय का भारत की अर्थव्यवस्था पर भरोसा मजबूत हुआ है। यदि यही रफ्तार बनी रही तो सितंबर तक विदेशी मुद्रा प्रवाह 70 अरब डॉलर के करीब पहुंच सकता है, जिससे भारत का विदेशी मुद्रा भंडार और वित्तीय मजबूती दोनों को बड़ा सहारा मिलेगा।


