Ethanol Blending E20 Petrol Row: केंद्र सरकार ने एथेनॉल ब्लेंडिंग (E20) कार्यक्रम का जोरदार बचाव करते हुए कहा है कि यदि पेट्रोल में एथेनॉल नहीं मिलाया गया होता, तो वैश्विक कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के दौरान दिल्ली में पेट्रोल करीब ₹125 प्रति लीटर बिकता। सरकार के अनुसार, घरेलू स्तर पर तय कीमतों पर खरीदे गए एथेनॉल ने तेल की कीमतों में उछाल का असर कम किया और उपभोक्ताओं को लगभग ₹30 प्रति लीटर तक राहत मिली।
Highlights
- सरकार का दावा- एथेनॉल ब्लेंडिंग नहीं होती तो दिल्ली में पेट्रोल ₹125/L तक पहुंच सकता था।
- संकट के समय उपभोक्ताओं को करीब ₹30 प्रति लीटर की बचत हुई।
- सरकार ने खाद्यान्न और FCI चावल के दुरुपयोग के आरोपों को खारिज किया।
- E20 पर पुराने वाहनों की माइलेज में 2-6% तक कमी आ सकती है।
- 20 करोड़ से अधिक दोपहिया और 3 करोड़ से ज्यादा पेट्रोल कारें E20 पर चल चुकी हैं।
सरकार ने क्यों किया एथेनॉल प्रोग्राम का बचाव?
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए कहा कि जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 135 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी, तब एथेनॉल मिश्रण ने भारतीय उपभोक्ताओं को बड़ी राहत दी।
मंत्रालय के मुताबिक, यदि पेट्रोल पूरी तरह आयातित पेट्रोलियम उत्पादों पर निर्भर रहता, तो दिल्ली में इसकी कीमत लगभग ₹125 प्रति लीटर तक पहुंच सकती थी। लेकिन एथेनॉल पहले से तय घरेलू कीमतों पर उपलब्ध होने के कारण खुदरा कीमतों पर वैश्विक महंगाई का पूरा असर नहीं पड़ा।
सरकार का कहना है कि उस समय उपभोक्ताओं को करीब ₹94.77 प्रति लीटर की दर से पेट्रोल उपलब्ध कराया गया, जिससे प्रति लीटर लगभग ₹30 की बचत हुई।
अभी दिल्ली में पेट्रोल कितना महंगा है?
सरकार के अनुसार, फिलहाल दिल्ली में स्टैंडर्ड E20 (91 ऑक्टेन) पेट्रोल की कीमत ₹102.12 प्रति लीटर है। वहीं 100 ऑक्टेन प्रीमियम पेट्रोल की कीमत ₹169 प्रति लीटर है।
सरकार ने यह भी बताया कि पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद करीब 75 दिनों तक पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर रखी गई थीं। इसके बाद मई में कीमतों में ₹7.5 प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई।
क्या गरीबों का अनाज एथेनॉल बनाने में इस्तेमाल हो रहा है?
सरकार ने उन आरोपों को भी सिरे से खारिज कर दिया कि गरीबों के लिए उपलब्ध कराया जाने वाला अनाज या FCI का सब्सिडी वाला चावल एथेनॉल उत्पादन में इस्तेमाल किया जा रहा है।
मंत्रालय ने कहा कि एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम को लेकर लगाए गए ऐसे दावे तथ्यात्मक रूप से गलत हैं और खाद्य सुरक्षा पर इसका कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ा है।
E20 से माइलेज पर कितना असर पड़ता है?
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने लोकसभा में ARAI, SIAM और IOC की संयुक्त स्टडी का हवाला देते हुए बताया कि जिन BS-III, BS-IV और BS-VI वाहनों को मूल रूप से E10 पेट्रोल के लिए डिजाइन किया गया था, उनमें E20 इस्तेमाल करने पर ईंधन दक्षता (Fuel Efficiency) में 2% से 6% तक कमी आ सकती है।
इससे पहले राज्यसभा में सरकार ने यह कमी 3% से 5% के बीच बताई थी। मंत्रालय का कहना है कि माइलेज में यह अंतर वाहन की उम्र, तकनीक और श्रेणी पर निर्भर करता है।
क्या E20 से इंजन खराब होता है?
सरकार ने स्पष्ट किया कि E20 लागू करने का फैसला किसी जल्दबाजी में नहीं लिया गया। इसके लिए इंजन की मजबूती, फ्यूल सिस्टम, मटेरियल कम्पैटिबिलिटी, ड्राइविंग परफॉर्मेंस और उत्सर्जन जैसे पहलुओं पर विस्तृत परीक्षण किए गए।
सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने लोकसभा में बताया कि इस प्रक्रिया में वाहन निर्माता कंपनियों, ऑयल मार्केटिंग कंपनियों, चीनी उद्योग और अनाज उद्योग सहित सभी संबंधित पक्षों से सलाह ली गई।
सरकार के अनुसार, प्रयोगशाला परीक्षणों और वास्तविक उपयोग के आंकड़ों से यह साबित हुआ है कि E20 पेट्रोल से वाहन की परफॉर्मेंस पर कोई गंभीर नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता।
23 करोड़ से ज्यादा वाहन E20 ब्लेंड पर चल चुके
सरकार ने दावा किया कि अब तक देश में 20 करोड़ से अधिक दोपहिया वाहन और 3 करोड़ से ज्यादा पेट्रोल कारें एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल का उपयोग कर चुकी हैं।
मंत्रालय का कहना है कि इतने बड़े स्तर पर उपयोग के बावजूद एथेनॉल ब्लेंडिंग के कारण इंजन खराब होने का कोई ठोस और प्रमाणित सबूत सामने नहीं आया है।
एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम क्यों महत्वपूर्ण है?
सरकार के अनुसार, एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम के कई प्रमुख उद्देश्य हैं:
- कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना।
- वैश्विक तेल कीमतों के झटकों से उपभोक्ताओं को राहत देना।
- किसानों और चीनी उद्योग को अतिरिक्त आय का स्रोत उपलब्ध कराना।
- कार्बन उत्सर्जन कम कर पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना।
- भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना।
हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि पुराने वाहनों की माइलेज और इंजन अनुकूलता जैसे मुद्दों पर लगातार निगरानी और पारदर्शी अध्ययन जारी रहना भी उतना ही आवश्यक है।


