भारतीय शेयर बाजार के लिए बीता सप्ताह बेहद शानदार रहा। मजबूत कॉर्पोरेट नतीजों, विदेशी निवेशकों (FII) की वापसी और रुपये में मजबूती ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया। इसका असर यह रहा कि सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ने करीब चार महीनों की सबसे बड़ी साप्ताहिक बढ़त दर्ज की।
पूरे सप्ताह बाजार में खरीदारी का माहौल बना रहा और बड़ी कंपनियों के साथ-साथ मिडकैप व स्मॉलकैप शेयरों में भी अच्छी तेजी देखने को मिली। अब निवेशकों की नजर अगले सप्ताह इस बात पर रहेगी कि क्या निफ्टी 24,500 से ऊपर टिक पाता है या नहीं।
चार महीनों की सबसे बड़ी साप्ताहिक तेजी
इस सप्ताह BSE Sensex 2,034 अंक यानी 2.67% की छलांग लगाकर 78,094 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं Nifty 50 भी 616 अंक (2.59%) की मजबूती के साथ 24,383 पर बंद हुआ।
विश्लेषकों का कहना है कि यह तेजी केवल कुछ चुनिंदा शेयरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि बाजार के लगभग सभी सेक्टरों में खरीदारी देखने को मिली। बेहतर जून तिमाही के नतीजे, विदेशी निवेशकों की खरीदारी और रुपये में सुधार ने बाजार की धारणा को मजबूत किया।
आईटी और ऑटो सेक्टर रहे सबसे बड़े स्टार
सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो इस सप्ताह निफ्टी आईटी सबसे ज्यादा चमका। आईटी इंडेक्स में 6.75% की शानदार तेजी दर्ज की गई।
इसके अलावा निफ्टी ऑटो भी 5.61% उछला। निवेशकों ने आईटी और ऑटो कंपनियों के मजबूत नतीजों और बेहतर आउटलुक को देखते हुए जमकर खरीदारी की।
स्मॉलकैप शेयरों में भी दिखा दम
सिर्फ लार्जकैप ही नहीं बल्कि छोटे और मझोले शेयरों में भी अच्छी तेजी देखने को मिली।
Nifty Smallcap 100 Index करीब 2.6% चढ़ा। इस दौरान कई शेयरों ने निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया।
इन स्मॉलकैप शेयरों में रही सबसे ज्यादा तेजी
- Redington
- Kaynes Technology India
- Firstsource Solutions
- Brigade Enterprises
- Affle 3i
- IIFL Finance
- KFin Technologies
- IFCI
इन शेयरों में सप्ताह के दौरान 24% तक की तेजी दर्ज की गई।
मिडकैप शेयरों ने भी किया शानदार प्रदर्शन
Nifty Midcap Index इस सप्ताह लगभग 2% मजबूत हुआ।
इन प्रमुख मिडकैप शेयरों में 10% तक की तेजी देखने को मिली—
- Coforge
- Laurus Labs
- Swiggy
- Container Corporation of India
- Ashok Leyland
हालांकि कुछ शेयरों में मुनाफावसूली भी देखने को मिली।
इस सप्ताह दबाव में रहे शेयर
- Suzlon Energy
- Phoenix Mills
- Billionbrains Garage Ventures
- Bank of India
- LIC Housing Finance
विदेशी निवेशकों की वापसी से बढ़ा बाजार का भरोसा
लगातार दो सप्ताह तक बिकवाली करने के बाद विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने इस सप्ताह भारतीय शेयर बाजार में जोरदार वापसी की।
- FII ने 5,946 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।
- घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने भी 5,387 करोड़ रुपये की खरीदारी की।
दोनों तरफ से आई खरीदारी ने बाजार को मजबूत आधार दिया और प्रमुख सूचकांकों को नई ऊंचाई तक पहुंचाने में मदद की।
रुपये में भी लौटी मजबूती
शेयर बाजार के लिए एक और सकारात्मक संकेत भारतीय रुपये से मिला।
लगातार पांच सप्ताह की कमजोरी के बाद रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 118 पैसे मजबूत होकर 95.39 पर बंद हुआ। मजबूत रुपये से विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ा और आयात आधारित कंपनियों को भी राहत मिली।
जून तिमाही के नतीजों ने बढ़ाया उत्साह
इस सप्ताह कई बड़ी कंपनियों ने अप्रैल-जून तिमाही (Q1 FY27) के नतीजे जारी किए।
मुख्य कंपनियों के प्रदर्शन पर नजर डालें—
| कंपनी | प्रमुख नतीजा |
|---|---|
| मारुति सुजुकी | मुनाफा 11% घटा |
| आईटीसी | मुनाफा 27% गिरा |
| सन फार्मा | मुनाफा 27% बढ़ा |
| एशियन पेंट्स | मुनाफा करीब 40% बढ़ा |
| ह्युंडई | तिमाही नतीजे जारी |
| स्विगी | तिमाही प्रदर्शन पर निवेशकों की नजर |
कुल मिलाकर उम्मीद से बेहतर कॉर्पोरेट नतीजों ने बाजार की तेजी को समर्थन दिया।
अगले हफ्ते किन स्तरों पर रहेगी नजर?
सेबी रजिस्टर्ड रिसर्च एनालिस्ट अनुज गुप्ता के अनुसार अगले सप्ताह बाजार का रुख सकारात्मक रह सकता है।
निफ्टी के अहम स्तर
- सपोर्ट: 24,100 – 23,800
- रेसिस्टेंस: 24,500 – 24,700
उनका मानना है कि यदि खरीदारी का सिलसिला जारी रहा तो निफ्टी अगले सप्ताह 24,500–24,600 के स्तर का परीक्षण कर सकता है।
बैंक निफ्टी के अहम स्तर
- सपोर्ट: 56,000 – 54,500
- रेसिस्टेंस: 58,500 – 60,000
यदि बैंकिंग शेयरों में तेजी बनी रहती है तो बैंक निफ्टी भी नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ सकता है।
निवेशकों के लिए क्या है रणनीति?
विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार की मौजूदा तेजी का आधार केवल तकनीकी संकेत नहीं बल्कि मजबूत कॉर्पोरेट नतीजे, विदेशी निवेश, घरेलू संस्थागत खरीदारी और रुपये में सुधार जैसे कई सकारात्मक कारक हैं। हालांकि तेज उछाल के बाद चुनिंदा शेयरों में मुनाफावसूली देखने को मिल सकती है, इसलिए निवेशकों को गुणवत्ता वाले शेयरों पर ध्यान देते हुए चरणबद्ध निवेश की रणनीति अपनानी चाहिए। अगले सप्ताह वैश्विक बाजारों की चाल, विदेशी निवेशकों का रुख और प्रमुख आर्थिक आंकड़े भारतीय बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।


