SEBI अगस्त से F&O शेयरों के लिए नया Closing Auction Session (CAS) लागू कर रहा है। जानिए नया ट्रेडिंग टाइम, क्लोजिंग प्राइस कैसे तय होगी और रिटेल निवेशकों पर इसका क्या असर पड़ेगा।
Stock Market New Timing: शेयर बाजार में सोमवार से लागू होगा नया CAS सिस्टम

भारतीय शेयर बाजार में अगस्त से एक बड़ा बदलाव लागू होने जा रहा है। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) के निर्देशों के तहत अब F&O (फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस) में शामिल शेयरों के लिए Closing Auction Session (CAS) लागू किया जाएगा। इस नए सिस्टम का उद्देश्य शेयरों की क्लोजिंग प्राइस को अधिक पारदर्शी बनाना और आखिरी मिनट में होने वाली कीमतों की हेराफेरी पर रोक लगाना है।
सोमवार से एक्सचेंज उन सभी शेयरों में, जिनमें F&O ट्रेडिंग की अनुमति है, क्लोजिंग प्राइस तय करने के लिए अब तक इस्तेमाल होने वाले VWAP (Volume Weighted Average Price) की जगह Closing Auction Session (CAS) का इस्तेमाल करेंगे।
Highlights
- सोमवार से F&O शेयरों के लिए नया Closing Auction Session (CAS) लागू।
- क्लोजिंग ऑक्शन दोपहर 3:15 बजे से 3:30 बजे तक चलेगा।
- क्लोजिंग प्राइस अब ऑक्शन के जरिए तय होगी।
- क्लोजिंग प्राइस में हेरफेर रोकने और पारदर्शिता बढ़ाने की पहल।
- इक्विटी डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग अब 3:40 बजे तक जारी रहेगी।
क्या है नया Closing Auction Session (CAS)?
CAS एक 15 मिनट का विशेष ऑक्शन सेशन होगा, जो हर ट्रेडिंग दिवस दोपहर 3:15 बजे से 3:30 बजे तक चलेगा। इस दौरान खरीद और बिक्री के सभी ऑर्डर एकत्र किए जाएंगे और फिर उन्हें एक संतुलन कीमत (Equilibrium Price) पर मैच किया जाएगा। यही कीमत संबंधित शेयर की आधिकारिक क्लोजिंग प्राइस होगी।
अब तक क्लोजिंग प्राइस का निर्धारण मुख्य रूप से दोपहर 3:00 बजे से 3:30 बजे के बीच हुए ट्रेड्स के Volume Weighted Average Price (VWAP) के आधार पर किया जाता था।
पहले और अब क्या बदला?
| पहले का सिस्टम | नया सिस्टम |
|---|---|
| VWAP के आधार पर क्लोजिंग प्राइस | Closing Auction Session के जरिए क्लोजिंग प्राइस |
| अंतिम 30 मिनट के ट्रेड्स का औसत | ऑर्डर मैचिंग के बाद Equilibrium Price |
| कीमतों पर अंतिम मिनट के बड़े ऑर्डर का असर संभव | हेरफेर की संभावना काफी कम |
किन शेयरों पर लागू होगा नया नियम?
शुरुआती चरण में यह व्यवस्था केवल F&O सेगमेंट में शामिल शेयरों पर लागू होगी।
जिन शेयरों में F&O ट्रेडिंग नहीं होती, उनमें सामान्य ट्रेडिंग दोपहर 3:30 बजे तक पहले की तरह जारी रहेगी।
हालांकि ऐसे शेयरों के लिए पोस्ट-क्लोजिंग सेशन का समय बदलकर अब 3:50 बजे से 4:00 बजे कर दिया गया है।
डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग का समय भी बढ़ा
SEBI के इस बदलाव के साथ इक्विटी डेरिवेटिव्स सेगमेंट में ट्रेडिंग समय भी बढ़ा दिया गया है।
अब फ्यूचर्स और ऑप्शंस में ट्रेडिंग 3:30 बजे की बजाय 3:40 बजे तक जारी रहेगी, जिससे CAS प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी आवश्यक ट्रेडिंग संभव हो सके।
रिटेल निवेशकों पर क्या पड़ेगा असर?
129 Wealth के फंड मैनेजर और Paul Asset के रिसर्च एनालिस्ट प्रसेनजीत पॉल के अनुसार, यह बदलाव अधिकांश रिटेल निवेशकों के लिए सीधे तौर पर दिखाई नहीं देगा, लेकिन इसके फायदे जरूर मिलेंगे।
इसके प्रमुख लाभ होंगे—
- क्लोजिंग प्राइस अधिक सटीक होगी।
- म्यूचुअल फंड की NAV ज्यादा सही तरीके से तय होगी।
- पोर्टफोलियो वैल्यूएशन अधिक वास्तविक होगा।
- इंडेक्स आधारित निवेशकों को बेहतर ट्रैकिंग मिलेगी।
SEBI यह बदलाव क्यों कर रहा है?
SEBI का उद्देश्य शेयरों की क्लोजिंग प्राइस में होने वाली संभावित हेराफेरी को रोकना है।
ज़ेरोधा के संस्थापक नितिन कामथ ने भी बताया कि पैसिव इंडेक्स फंड्स को दिन के अंत में बड़ी मात्रा में ऑर्डर निष्पादित करने पड़ते हैं। ऐसे बड़े ऑर्डर कई बार क्लोजिंग प्राइस को प्रभावित कर देते हैं, जिससे इंडेक्स और फंड की ट्रैकिंग में अंतर आ सकता है।
CAS सिस्टम में सभी ऑर्डर एक साथ मैच होने के कारण किसी एक बड़े ऑर्डर से कीमत प्रभावित करना काफी मुश्किल हो जाएगा।
एक्सपर्ट्स की राय
HDFC Securities के टेक्निकल रिसर्च एनालिस्ट नंदिश शाह का कहना है कि CAS सिस्टम वैश्विक बाजारों के अनुरूप है और इससे क्लोजिंग प्राइस अधिक विश्वसनीय होगी।
वहीं SBI Securities के टेक्निकल एवं डेरिवेटिव्स रिसर्च प्रमुख सुदीप शाह के अनुसार, इससे अंतिम मिनट में होने वाले बड़े संस्थागत सौदों का प्रभाव कम होगा, प्राइस डिस्कवरी बेहतर होगी और बाजार की पारदर्शिता बढ़ेगी।
निष्कर्ष
SEBI द्वारा लागू किया जा रहा Closing Auction Session (CAS) भारतीय शेयर बाजार के लिए एक महत्वपूर्ण सुधार माना जा रहा है। इससे क्लोजिंग प्राइस अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से तय होगी, जिससे निवेशकों, म्यूचुअल फंड्स और पूरे बाजार को दीर्घकाल में फायदा मिलने की उम्मीद है। हालांकि शुरुआती चरण में यह व्यवस्था केवल F&O शेयरों पर लागू होगी, लेकिन भविष्य में इसका दायरा बढ़ाया जा सकता है।


