UK Work Culture: भारत में देर रात तक काम करना और ऑफिस आवर्स के बाद भी मैसेज का जवाब देना अक्सर मेहनती कर्मचारी की पहचान माना जाता है। लेकिन ब्रिटेन (UK) में वर्क-लाइफ बैलेंस को लेकर सोच बिल्कुल अलग है। हाल ही में एक भारतीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपना अनुभव साझा किया, जिसमें उसने बताया कि देर रात काम करने पर उसे बॉस से शाबाशी नहीं, बल्कि सख्त चेतावनी मिली। यह पोस्ट अब इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रही है और लोग विदेशी वर्क कल्चर की जमकर चर्चा कर रहे हैं।
देर रात रिप्लाई करना पड़ा भारी
I work with a senior developer from England.
Because of the time difference, whenever he reviewed my PR and left comments, I'd reply immediately.
Even if it was 9 or 10 PM in India.
One day he noticed and asked me, .."Wait.. are you working beyond your work hours?"
I said,…
— Om (@Om_Codes_) July 30, 2026 भारतीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर ओम ने बताया कि वह इंग्लैंड में काम करने वाले एक सीनियर सॉफ्टवेयर डेवलपर के साथ प्रोजेक्ट पर काम करता है। भारत और ब्रिटेन के समय में अंतर होने की वजह से जब भी यूके का सीनियर डेवलपर उसके कोड पर कमेंट करता था, तो ओम रात 9-10 बजे भी तुरंत जवाब दे देता था।
शुरुआत में उसे लगा कि इससे उसकी मेहनत और कमिटमेंट दिखाई देगी, लेकिन एक दिन उसके सीनियर ने पूछा कि क्या वह ऑफिस के निर्धारित समय के बाद भी काम करता है। जब ओम ने ‘हां’ में जवाब दिया, तो बॉस ने उसे ऐसा न करने की सलाह दी।
7 बजे के बाद रिप्लाई किया तो नहीं होगा PR Review
ओम ने बताया कि चेतावनी के बावजूद उसने ऑफिस टाइम के बाद भी कमेंट्स का जवाब देना जारी रखा। इसके बाद उसके यूके बेस्ड सीनियर ने सख्त लहजे में कहा,
“अगर तुम भारतीय समयानुसार शाम 7 बजे के बाद मेरे किसी कमेंट का जवाब दोगे, तो मैं पूरे एक हफ्ते तक तुम्हारे Pull Request (PR) का रिव्यू नहीं करूंगा।”
बॉस की यह बात सुनकर ओम हैरान रह गया। उसने बताया कि इसके बाद उसने अपने काम करने का तरीका बदल दिया और अब वह जानबूझकर अगले दिन ऑफिस टाइम में ही जवाब देता है।
बॉस को कर्मचारी की पर्सनल लाइफ की थी चिंता
ओम ने अपनी पोस्ट में लिखा कि इस घटना ने उसे यह एहसास कराया कि ब्रिटेन में कंपनियां कर्मचारियों की निजी जिंदगी और मानसिक संतुलन को काफी महत्व देती हैं।
उसने लिखा,
“अब मैं अगले दिन जवाब देने का इंतजार करता हूं। कभी-कभी जरूरत पड़ने पर काम करता हूं, लेकिन मुझे अच्छा लगा कि मेरे बॉस को मेरे वर्क-लाइफ बैलेंस की मुझसे भी ज्यादा चिंता थी।”
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
यह पोस्ट वायरल होने के बाद कई लोगों ने अपने अनुभव भी साझा किए। एक यूजर ने बताया कि उसने शुक्रवार को अपने रोमानियाई सहकर्मी को Pull Request भेजा तो उसने तुरंत कहा कि लैपटॉप बंद करो और वीकेंड एंजॉय करो।
एक अन्य यूजर ने लिखा कि उसकी शिफ्ट दोपहर 2:30 बजे से रात 11:30 बजे तक थी। जब उसने अमेरिकी सीनियर आर्किटेक्ट से कहा कि वह ज्यादा समय नहीं लेगा, तो जवाब मिला,
“तुम्हारे ऑफिस के घंटे खत्म हो चुके हैं, अब तुम्हें काम नहीं करना चाहिए।”
यूजर ने बताया कि यह सुनकर उसे एहसास हुआ कि कई विदेशी कंपनियां कर्मचारियों से ज्यादा उनके स्वास्थ्य और निजी जीवन को प्राथमिकता देती हैं।
भारत और यूरोप के वर्क कल्चर में बड़ा अंतर
भारत में कई निजी कंपनियों में लंबे समय तक काम करना, देर रात तक ऑनलाइन रहना और छुट्टियों में भी उपलब्ध रहना अक्सर समर्पण की निशानी माना जाता है। वहीं, ब्रिटेन और कई यूरोपीय देशों में तय ऑफिस समय के बाद कर्मचारियों को काम से पूरी तरह अलग रहने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर वर्क-लाइफ बैलेंस से कर्मचारियों की उत्पादकता बढ़ती है, तनाव कम होता है और लंबे समय तक बेहतर प्रदर्शन देखने को मिलता है।
निष्कर्ष
एक भारतीय टेकी का यह अनुभव दिखाता है कि दुनिया के अलग-अलग देशों में वर्क कल्चर कितना अलग हो सकता है। जहां भारत में ओवरटाइम को अक्सर मेहनत का प्रतीक माना जाता है, वहीं ब्रिटेन में इसे कर्मचारी के निजी जीवन पर असर डालने वाली आदत के रूप में देखा जाता है। यही वजह है कि वहां के कई मैनेजर अपने कर्मचारियों को समय पर काम खत्म कर निजी जिंदगी को प्राथमिकता देने की सलाह देते हैं।


