नई दिल्ली: देश की 100 साल से अधिक पुरानी FMCG कंपनी डाबर इंडिया (Dabur India) के शेयर पहली तिमाही (Q1 FY27) के नतीजे घोषित होने के बाद दबाव में आ गए। गुरुवार के कारोबार में कंपनी का शेयर 3% से अधिक टूटकर इंट्राडे में करीब ₹415 तक पहुंच गया। हालांकि कंपनी ने जून तिमाही में मुनाफे और आय दोनों में अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की है, लेकिन बाजार की उम्मीदों, मुनाफावसूली और तकनीकी स्तरों के कारण निवेशकों ने बिकवाली का रुख अपनाया।
Q1 रिजल्ट के बाद क्यों टूटा Dabur का शेयर?
डाबर इंडिया ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में मजबूत वित्तीय प्रदर्शन पेश किया। कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट 15% बढ़कर ₹591 करोड़ रहा, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह ₹514 करोड़ था।
वहीं, कंपनी की ऑपरेशंस से आय (Revenue from Operations) भी बढ़कर ₹3,764 करोड़ पहुंच गई, जो एक साल पहले की समान तिमाही में ₹3,405 करोड़ थी।
इसके बावजूद शेयर में गिरावट देखने को मिली। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के दिनों में स्टॉक में आई तेजी के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली की। इसके अलावा, कंपनी ने महंगाई, कमोडिटी कीमतों में उतार-चढ़ाव और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अनिश्चितताओं का भी जिक्र किया, जिससे निवेशकों की सतर्कता बढ़ी।
कैसा रहा कंपनी का प्रदर्शन?
डाबर इंडिया ने एक बार फिर डबल डिजिट मुनाफा वृद्धि दर्ज की है। यह लगातार तीसरी तिमाही है जब कंपनी का नेट प्रॉफिट दो अंकों की दर से बढ़ा है।
कंपनी के मुताबिक,
- नेट प्रॉफिट: ₹591 करोड़ (15% की बढ़ोतरी)
- ऑपरेशनल रेवेन्यू: ₹3,764 करोड़
- पिछले साल का नेट प्रॉफिट: ₹514 करोड़
- पिछले साल की आय: ₹3,405 करोड़
मजबूत बिक्री और बेहतर ऑपरेटिंग प्रदर्शन की वजह से कंपनी ने चुनौतीपूर्ण माहौल में भी लाभ में बढ़ोतरी दर्ज की।
CEO मोहित मल्होत्रा ने क्या कहा?
डाबर इंडिया के ग्लोबल CEO मोहित मल्होत्रा ने कहा कि यह लगातार तीसरी तिमाही है जब कंपनी ने डबल डिजिट प्रॉफिट ग्रोथ हासिल की है।
उन्होंने कहा कि यह तिमाही लगातार महंगाई, MENA क्षेत्र में बढ़ती भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और कमोडिटी बाजार में उतार-चढ़ाव जैसी चुनौतियों के बीच रही। इसके बावजूद कंपनी ने अपने मार्जिन को बेहतर बनाए रखा और भविष्य की ग्रोथ के लिए निवेश जारी रखा।
मोहित मल्होत्रा के अनुसार, ग्राहकों की जरूरतों के अनुसार लगातार इनोवेशन और मजबूत बिजनेस रणनीति कंपनी की सफलता की सबसे बड़ी वजह रही है।
100 साल से ज्यादा पुराना है Dabur का इतिहास
डाबर इंडिया देश की सबसे पुरानी FMCG कंपनियों में शामिल है। कंपनी की स्थापना 1884 में डॉ. एस. के. बर्मन ने कोलकाता में की थी। आयुर्वेदिक और हेल्थकेयर उत्पादों से शुरुआत करने वाली डाबर आज घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मजबूत पहचान बना चुकी है।
अब शेयर के लिए कौन-से लेवल अहम हैं?
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार फिलहाल डाबर इंडिया का शेयर तकनीकी रूप से महत्वपूर्ण स्तरों के आसपास कारोबार कर रहा है।
आनंद राठी इन्वेस्टमेंट सर्विसेज के सीनियर मैनेजर जिगर एस पटेल के मुताबिक—
- सपोर्ट: ₹410 – ₹400
- रेजिस्टेंस: ₹438 – ₹440
यदि शेयर ₹400 के ऊपर टिके रहने में सफल रहता है तो इसमें रिकवरी देखने को मिल सकती है। वहीं, ₹438-440 के ऊपर मजबूती आने पर नई तेजी की संभावना बन सकती है।
निवेशकों को क्या करना चाहिए?
डाबर इंडिया के तिमाही नतीजे मजबूत रहे हैं, लेकिन शेयर में आई गिरावट यह संकेत देती है कि बाजार केवल अच्छे नतीजों पर नहीं, बल्कि भविष्य की ग्रोथ और वैल्यूएशन पर भी नजर रख रहा है। ऐसे में निवेशकों को तकनीकी स्तरों और कंपनी के आगामी प्रदर्शन पर ध्यान देना चाहिए।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। इसमें दी गई जानकारी निवेश की सलाह नहीं है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य करें।


