नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश ने राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे पर टोल टैक्स वसूली के मामले में देश में पहला स्थान हासिल कर लिया है। वित्त वर्ष 2025-26 में राज्य ने ₹8,862.12 करोड़ का रिकॉर्ड टोल कलेक्शन किया, जो देश के किसी भी राज्य से सबसे अधिक है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने राज्यसभा में एक लिखित प्रश्न के उत्तर में यह जानकारी दी।
सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश ने टोल राजस्व के मामले में राजस्थान, महाराष्ट्र और गुजरात जैसे बड़े राज्यों को पीछे छोड़ दिया है। राज्य में तेजी से विकसित हुए एक्सप्रेसवे नेटवर्क, राष्ट्रीय राजमार्गों का विस्तार और वाहनों की बढ़ती आवाजाही इस रिकॉर्ड वसूली के प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं।
टोल कलेक्शन में उत्तर प्रदेश सबसे आगे
वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान राज्यों के टोल कलेक्शन की सूची में उत्तर प्रदेश शीर्ष पर रहा।
| राज्य | टोल कलेक्शन (₹ करोड़) |
|---|---|
| उत्तर प्रदेश | 8,862.12 |
| राजस्थान | 7,317.51 |
| महाराष्ट्र | तीसरा स्थान |
| गुजरात | चौथा स्थान |
| कर्नाटक | पांचवां स्थान |
उत्तर प्रदेश का यह प्रदर्शन दर्शाता है कि राज्य में सड़क अवसंरचना पर हुए बड़े निवेश का सीधा असर राजस्व पर भी दिखाई दे रहा है।
एक्सप्रेसवे नेटवर्क बना सबसे बड़ा कारण
पिछले कुछ वर्षों में उत्तर प्रदेश में सड़क और एक्सप्रेसवे परियोजनाओं पर तेजी से काम हुआ है। राज्य में कई नए एक्सप्रेसवे शुरू होने के साथ राष्ट्रीय राजमार्गों का भी विस्तार हुआ है, जिससे भारी और हल्के वाहनों की आवाजाही में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।
यही वजह है कि टोल प्लाजा से होने वाली आय लगातार बढ़ती जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे-जैसे नए औद्योगिक कॉरिडोर और लॉजिस्टिक्स हब विकसित होंगे, आने वाले वर्षों में यह राजस्व और अधिक बढ़ सकता है।
उत्तर प्रदेश में 141 टोल प्लाजा संचालित
केंद्रीय मंत्री द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में वर्तमान समय में 141 संचालित टोल प्लाजा हैं, जो देश में दूसरे सबसे अधिक हैं।
राज्यों के अनुसार टोल प्लाजा की स्थिति इस प्रकार है—
- राजस्थान – 172 टोल प्लाजा (देश में सबसे अधिक)
- उत्तर प्रदेश – 141
- महाराष्ट्र – 105
- मध्य प्रदेश – 98
- कर्नाटक – 68
हालांकि टोल प्लाजा की संख्या राजस्थान में अधिक है, लेकिन टोल वसूली के मामले में उत्तर प्रदेश ने उसे पीछे छोड़ दिया।
पूरे देश में भी रिकॉर्ड टोल कलेक्शन
देशभर में भी राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल संग्रह में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वित्त वर्ष 2024-25 में जहां कुल टोल कलेक्शन ₹61,408.15 करोड़ था, वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर ₹70,278.18 करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।
इस कुल राशि में निजी वाहनों के लिए शुरू की गई एनुअल पास स्कीम से प्राप्त ₹1,795.18 करोड़ की आय भी शामिल है।
क्यों बढ़ रहा है टोल राजस्व?
केंद्र सरकार के अनुसार टोल कलेक्शन में लगातार बढ़ोतरी के पीछे कई प्रमुख कारण हैं।
- राष्ट्रीय राजमार्गों का तेजी से विस्तार
- नए एक्सप्रेसवे का निर्माण
- मालवाहक और निजी वाहनों की संख्या में वृद्धि
- बेहतर सड़क कनेक्टिविटी से बढ़ा ट्रैफिक
- डिजिटल टोल भुगतान और फास्टैग जैसी व्यवस्थाओं का व्यापक उपयोग
इन कारणों से टोल संग्रह में हर वर्ष लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है।
आगे और बढ़ सकता है राजस्व
विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर प्रदेश में गंगा एक्सप्रेसवे, औद्योगिक कॉरिडोर और नई सड़क परियोजनाओं के पूरी तरह चालू होने के बाद ट्रैफिक और बढ़ेगा। इससे राज्य की टोल आय में भी आने वाले वर्षों में नई ऊंचाइयां देखने को मिल सकती हैं। सड़क अवसंरचना के विस्तार के साथ उत्तर प्रदेश देश के सबसे बड़े सड़क नेटवर्क वाले राज्यों में तेजी से अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है।


