नई दिल्ली: मध्य एशिया का सबसे बड़ा और प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध देश कजाकिस्तान अब भारत के साथ अपने व्यापारिक और निवेश संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाना चाहता है। इस रणनीति में पश्चिम बंगाल को बेहद अहम माना जा रहा है। कजाकिस्तान का मानना है कि पश्चिम बंगाल न केवल पूर्वोत्तर भारत, बल्कि दक्षिण-पूर्व एशिया के बाजारों तक पहुंचने का भी सबसे प्रभावी प्रवेश द्वार (Gateway) बन सकता है।
भारत में कजाकिस्तान के राजदूत येसकारायेव अजमत (Yeskarayev Azamat) ने कहा कि उनका देश भारत के साथ व्यापार और निवेश को तेजी से बढ़ाने के लिए तैयार है। विशेष रूप से फार्मास्यूटिकल्स, ऊर्जा, खनन और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में सहयोग की अपार संभावनाएं मौजूद हैं।
पश्चिम बंगाल क्यों है कजाकिस्तान की पहली पसंद?
मर्चेंट्स चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (MCCI) द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए कजाकिस्तान के राजदूत ने कहा कि पश्चिम बंगाल भौगोलिक दृष्टि से बेहद रणनीतिक राज्य है। यहां से पूर्वोत्तर भारत के राज्यों के साथ-साथ बांग्लादेश, म्यांमार और अन्य दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों तक व्यापारिक पहुंच आसान हो जाती है।
इसी वजह से कजाकिस्तान पश्चिम बंगाल को अपने लिए एक बड़े वाणिज्यिक केंद्र के रूप में देख रहा है और यहां निवेश एवं व्यापारिक साझेदारी बढ़ाने का इच्छुक है।
प्राकृतिक संसाधनों का खजाना है कजाकिस्तान
कजाकिस्तान को मध्य एशिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था माना जाता है। यह देश दुनिया के प्रमुख यूरेनियम उत्पादकों में शामिल है और यहां तेल, प्राकृतिक गैस तथा दुर्लभ खनिजों के विशाल भंडार मौजूद हैं।
ऊर्जा सुरक्षा और औद्योगिक विकास के लिहाज से भारत के लिए कजाकिस्तान एक महत्वपूर्ण साझेदार बन सकता है। दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ने से ऊर्जा, खनन और औद्योगिक क्षेत्र में नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
सितंबर में भारत आएगा उच्च स्तरीय व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल
राजदूत ने जानकारी दी कि सितंबर में कजाकिस्तान का एक उच्च स्तरीय व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल भारत का दौरा करेगा। इस दौरान भारतीय उद्योग जगत की बड़ी कंपनियों, जिनमें टाटा ग्रुप भी शामिल है, के साथ निवेश और व्यापारिक सहयोग पर विस्तृत चर्चा होगी।
यात्रा के दौरान चेन्नई में एक बड़े बिजनेस फोरम का आयोजन भी किया जाएगा, जहां दोनों देशों के उद्योगपति संभावित साझेदारियों पर विचार-विमर्श करेंगे।
भारत-कजाकिस्तान व्यापार में अभी भी बड़ी संभावनाएं
अधिकारियों का कहना है कि दोनों देशों के बीच मौजूदा व्यापारिक संबंध उनकी वास्तविक क्षमता की तुलना में अभी काफी कम हैं। यदि लॉजिस्टिक्स, निवेश और उद्योगों के स्तर पर सहयोग बढ़ाया जाए तो द्विपक्षीय व्यापार में कई गुना वृद्धि हो सकती है।
भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था और कजाकिस्तान के प्राकृतिक संसाधन दोनों देशों के लिए एक-दूसरे के पूरक साबित हो सकते हैं।
इन क्षेत्रों में बढ़ेगा सहयोग
दोनों देशों के बीच कई क्षेत्रों में निवेश और व्यापार बढ़ाने की योजना है, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—
- चाय और फूड प्रोसेसिंग
- फार्मास्यूटिकल्स एवं केमिकल उद्योग
- इंजीनियरिंग उत्पाद और चमड़ा उद्योग
- लॉजिस्टिक्स, आईटी और फिनटेक
- शिक्षा, पर्यटन और ग्रीन एनर्जी
- ऊर्जा एवं खनन क्षेत्र
- मैन्युफैक्चरिंग और औद्योगिक निवेश
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह साझेदारी?
भारत तेजी से अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने और महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति सुरक्षित करने पर काम कर रहा है। ऐसे में यूरेनियम, तेल और प्राकृतिक गैस से समृद्ध कजाकिस्तान के साथ मजबूत व्यापारिक संबंध भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती दे सकते हैं। वहीं कजाकिस्तान को दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते उपभोक्ता बाजारों में से एक भारत तक बेहतर पहुंच मिलेगी।
यदि सितंबर में प्रस्तावित व्यापारिक वार्ताएं सफल रहती हैं तो आने वाले वर्षों में दोनों देशों के बीच निवेश, व्यापार और औद्योगिक सहयोग में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।


