नई दिल्ली: भारत की सरकारी तेल एवं गैस कंपनी ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन (ONGC) ने अपनी सहायक कंपनी मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड (MRPL) के लिए बड़ा वित्तीय फैसला लिया है। कंपनी के बोर्ड ने 500 मिलियन अमेरिकी डॉलर (करीब ₹4,792 करोड़) की पैरेंट कंपनी गारंटी (Parent Company Guarantee – PCG) को मंजूरी दे दी है। यह गारंटी दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनियों में शामिल सऊदी अरामको (Saudi Aramco) से कच्चा तेल आयात करने के लिए दी जाएगी।
यह कदम MRPL को अंतरराष्ट्रीय बाजार से कच्चे तेल की खरीद में वित्तीय मजबूती देगा और भारत की ऊर्जा सुरक्षा को और मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगा।
ONGC ने क्यों दी ₹4,792 करोड़ की गारंटी?
ONGC द्वारा स्टॉक एक्सचेंज को दी गई जानकारी के अनुसार, कंपनी की सहायक MRPL नियमित रूप से सऊदी अरामको से कच्चा तेल खरीदती है। इस आयात प्रक्रिया को सुचारु बनाए रखने और भुगतान संबंधी भरोसा मजबूत करने के लिए ONGC ने 500 मिलियन डॉलर की पैरेंट कंपनी गारंटी देने का फैसला किया है।
इस गारंटी के जरिए Saudi Aramco को यह आश्वासन मिलेगा कि यदि किसी कारणवश MRPL भुगतान करने में असमर्थ रहती है, तो ONGC उसकी जिम्मेदारी निभाएगी।
सऊदी अरामको क्यों है खास?
Saudi Aramco दुनिया की सबसे बड़ी तेल उत्पादक और सबसे मूल्यवान ऊर्जा कंपनियों में से एक है। यह सऊदी अरब सरकार के नियंत्रण वाली कंपनी है, जिसमें सरकार की लगभग 82% हिस्सेदारी है।
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयातित कच्चे तेल से पूरा करता है और सऊदी अरब भारत के प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ताओं में शामिल है। ऐसे में ONGC और Saudi Aramco के बीच यह व्यवस्था भारत के लिए रणनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
दो साल तक प्रभावी रहेगी गारंटी
ONGC के बोर्ड ने यह प्रस्ताव 28 जुलाई 2026 को आयोजित बैठक में मंजूर किया। कंपनी के अनुसार यह गारंटी:
- प्रभावी अवधि: 1 सितंबर 2026 से 31 अगस्त 2028 तक
- कुल राशि: 500 मिलियन अमेरिकी डॉलर
- भारतीय मुद्रा में अनुमानित मूल्य: लगभग ₹4,792 करोड़
बोर्ड बैठक में क्या हुआ?
ONGC ने बताया कि बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की बैठक दोपहर 1:45 बजे शुरू हुई और 3:35 बजे समाप्त हुई। बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी देने के बाद कंपनी ने इसकी जानकारी NSE और BSE को भी उपलब्ध करा दी।
MRPL को क्या होगा फायदा?
इस गारंटी से MRPL को कई महत्वपूर्ण लाभ मिलेंगे।
- कच्चे तेल की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित होगी।
- अंतरराष्ट्रीय सप्लायर्स का भरोसा बढ़ेगा।
- वित्तीय जोखिम कम होगा।
- बेहतर शर्तों पर क्रूड ऑयल खरीदने में आसानी होगी।
- रिफाइनरी के संचालन में बाधाएं कम होंगी।
भारत की ऊर्जा सुरक्षा होगी मजबूत
भारत अपनी जरूरत का 85% से अधिक कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में प्रमुख वैश्विक सप्लायर्स के साथ मजबूत वित्तीय व्यवस्था देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ONGC की यह गारंटी MRPL को वैश्विक बाजार में अधिक भरोसेमंद खरीदार बनाएगी। इससे रिफाइनरी को समय पर कच्चा तेल मिलेगा और देश में ईंधन आपूर्ति भी अधिक स्थिर बनी रहेगी।
ONGC के इस फैसले का महत्व
ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों के अनुसार यह सिर्फ एक वित्तीय गारंटी नहीं, बल्कि भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा रणनीति का हिस्सा है। वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों और तेल बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच विश्वसनीय आपूर्ति श्रृंखला बनाए रखना भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। ONGC का यह कदम इसी दिशा में एक मजबूत पहल माना जा रहा है।


