Anil Agarwal AI Post: वेदांता के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने चीन के AI वैज्ञानिक यांग झिलिन का उदाहरण देते हुए कहा है कि अमेरिका में काम कर रहे भारतीय टेक प्रोफेशनल भी भविष्य में भारत लौटकर AI क्रांति को आगे बढ़ा सकते हैं। उन्होंने कहा कि भारत के पास आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में दुनिया का नेतृत्व करने का बड़ा अवसर है।
क्या भारत बन सकता है अगली AI महाशक्ति?
दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर अमेरिका और चीन के बीच प्रतिस्पर्धा तेज हो चुकी है। इसी बीच वेदांता चेयरमैन Anil Agarwal ने एक ऐसी कहानी साझा की है, जिसने भारत में AI के भविष्य को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है।
अनिल अग्रवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक रिपोर्ट शेयर करते हुए कहा कि जिस तरह चीन के एक युवा AI वैज्ञानिक ने अमेरिका में शानदार करियर के अवसर छोड़कर अपने देश लौटने का फैसला किया और आज वह दुनिया के चर्चित AI मॉडल तैयार कर रहा है, उसी तरह आने वाले समय में भारतीय टेक विशेषज्ञ भी भारत वापस आकर बड़ा बदलाव ला सकते हैं।
उन्होंने लिखा कि अमेरिका में काम कर रहे भारतीय इंजीनियर और AI विशेषज्ञ अगर भारत लौटकर अत्याधुनिक तकनीक विकसित करते हैं, तो देश को तकनीकी रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।
अनिल अग्रवाल ने किस AI स्टार का दिया उदाहरण?
अनिल अग्रवाल ने चीन की AI कंपनी Moonshot AI के फाउंडर Yang Zhilin का उदाहरण दिया।
यांग झिलिन ने अमेरिका में कई बड़े अवसर मिलने के बावजूद चीन लौटने का फैसला किया। उन्होंने अपना AI स्टार्टअप शुरू किया, जो आज दुनिया की प्रमुख AI कंपनियों में शामिल हो चुका है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, यांग झिलिन की कंपनी Moonshot AI की वैल्यूएशन करीब 30 बिलियन डॉलर यानी लगभग ₹2.87 लाख करोड़ तक पहुंच चुकी है।
अमेरिका में मिल सकते थे बड़े मौके, फिर भी चीन लौटे यांग
यांग झिलिन की कहानी इसलिए खास है क्योंकि उनके पास अमेरिका में शानदार करियर बनाने के कई विकल्प मौजूद थे।
उन्होंने Carnegie Mellon University से साल 2019 में केवल चार साल में पीएचडी पूरी की थी। यह सामान्य अवधि से करीब दो साल कम थी।
इसके बाद उन्हें कई बड़ी टेक कंपनियों में काम करने के अवसर मिले। वह Apple Inc. में काम कर चुके थे और Google तथा Meta Platforms में इंटर्नशिप भी कर चुके थे।
इसके अलावा उनके सामने Stanford University और Massachusetts Institute of Technology में रिसर्च के रास्ते भी खुले थे।
लेकिन यांग ने अमेरिका में रुकने के बजाय चीन लौटकर अपनी कंपनी बनाने का फैसला किया।
उनके पूर्व सुपरवाइजर रुस सलाखुत्दीनोव के अनुसार, यांग का मानना था कि अगर उन्होंने अपनी कंपनी शुरू करने की कोशिश नहीं की तो उन्हें जीवनभर इसका पछतावा रहेगा। उनका जोखिम भरा फैसला अब सफल साबित होता दिख रहा है।
Moonshot AI का Kimi K3 दे रहा OpenAI और Anthropic को चुनौती
Moonshot AI ने हाल में अपना बड़ा लैंग्वेज मॉडल Kimi K3 लॉन्च किया है। इसे दुनिया के प्रमुख AI मॉडल्स में शामिल किया जा रहा है और इसकी तुलना अमेरिका की बड़ी AI कंपनियों जैसे OpenAI और Anthropic के मॉडल्स से की जा रही है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, Elon Musk ने भी Kimi K3 के प्रदर्शन को प्रभावशाली बताया है।
भारतीय AI विशेषज्ञों के लिए बड़ा अवसर
यांग झिलिन की कहानी साझा करते हुए अनिल अग्रवाल ने कहा कि अमेरिका के टेक सेक्टर में बड़ी संख्या में भारतीय पेशेवर काम कर रहे हैं।
उनका मानना है कि आने वाले वर्षों में इनमें से कई विशेषज्ञ भारत लौटकर AI स्टार्टअप और रिसर्च को आगे बढ़ा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि भारत के पास युवा प्रतिभा, बड़ा बाजार और तेजी से बढ़ता डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर मौजूद है। अगर भारतीय विशेषज्ञ देश में विश्वस्तरीय AI तकनीक विकसित करते हैं, तो भारत वैश्विक AI दौड़ में मजबूत स्थिति बना सकता है।
AI क्षेत्र में भारत के लिए क्यों बड़ा मौका?
भारत पहले से ही सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग और आईटी सेवाओं के क्षेत्र में दुनिया की बड़ी ताकत रहा है। अब AI, मशीन लर्निंग और डीप टेक्नोलॉजी में भी भारतीय प्रतिभाओं के लिए नए अवसर खुल रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाला दशक AI आधारित अर्थव्यवस्था का होगा। ऐसे में भारत के लिए जरूरी है कि वह रिसर्च, स्टार्टअप और AI इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश बढ़ाए।
अनिल अग्रवाल का संदेश साफ है कि अगर दुनिया भर में काम कर रहे भारतीय AI विशेषज्ञ अपनी प्रतिभा और अनुभव को भारत में इस्तेमाल करते हैं, तो देश अगली तकनीकी क्रांति का बड़ा केंद्र बन सकता है।


