RBI Repo Rate: बार्कलेज की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) अगस्त की मॉनेटरी पॉलिसी बैठक में रेपो रेट में बदलाव नहीं कर सकता है। महंगाई और कच्चे तेल की कीमतों को लेकर जोखिम बने रहने के बावजूद केंद्रीय बैंक न्यूट्रल रुख अपना सकता है।
Highlights
- RBI अगस्त की MPC बैठक में ब्याज दरों को स्थिर रख सकता है।
- विदेशी पूंजी प्रवाह बढ़ने से रुपये पर दबाव कम हुआ है।
- महंगाई बढ़ने के बावजूद तत्काल रेपो रेट बढ़ने की संभावना कम है।
- होम लोन लेने वालों की EMI पर फिलहाल कोई बड़ा बदलाव नहीं दिख सकता है।
नई दिल्ली। देश के लाखों होम लोन ग्राहकों की नजर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की अगली मॉनेटरी पॉलिसी बैठक पर टिकी हुई है। अगर रेपो रेट में बदलाव होता है तो इसका सीधा असर बैंक लोन की ब्याज दरों और होम लोन EMI पर पड़ सकता है। हालांकि, ब्रोकरेज फर्म बार्कलेज की रिपोर्ट के अनुसार, RBI अगस्त में होने वाली मौद्रिक नीति समीक्षा में मुख्य ब्याज दरों को फिलहाल स्थिर रख सकता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि महंगाई में बढ़ोतरी के बावजूद केंद्रीय बैंक तुरंत ब्याज दर बढ़ाने का फैसला नहीं लेगा। विदेशी पूंजी के बेहतर प्रवाह ने रुपये पर दबाव को कम किया है, जिससे RBI को अपनी मौजूदा न्यूट्रल पॉलिसी जारी रखने की गुंजाइश मिली है।
विदेशी निवेश से रुपये को मिला सहारा
बार्कलेज की रिपोर्ट के मुताबिक, विदेशी मुद्रा प्रवाह को बढ़ावा देने के लिए RBI द्वारा हाल में उठाए गए कदमों का असर दिखाई दे रहा है। इन उपायों के बाद बैंकों ने करीब 32 अरब डॉलर जुटाए हैं। इसमें बड़ी हिस्सेदारी फॉरेन करेंसी नॉन-रेसिडेंट (बैंक) यानी FCNR(B) डिपॉजिट के जरिए आई है।
इसके अलावा सरकारी प्रतिभूतियों (Government Securities) में भी 7 अरब डॉलर से अधिक का विदेशी निवेश दर्ज किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, विदेशी पूंजी में सुधार से रुपये को लेकर पैदा होने वाली चिंताएं काफी हद तक कम हुई हैं।
बार्कलेज का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में RBI को ब्याज दरों में जल्दबाजी में बदलाव करने की जरूरत नहीं है।
होम लोन EMI पर क्या होगा असर?
अगर RBI अगस्त बैठक में रेपो रेट को स्थिर रखता है तो होम लोन ग्राहकों की EMI में तत्काल कोई बड़ा बदलाव देखने को नहीं मिलेगा। आमतौर पर बैंक रेपो रेट में बदलाव के आधार पर अपनी लोन ब्याज दरों को संशोधित करते हैं।
- रेपो रेट बढ़ने पर होम लोन महंगा हो सकता है और EMI बढ़ सकती है।
- रेपो रेट घटने पर ब्याज दरों में कमी आ सकती है और EMI कम हो सकती है।
- रेपो रेट स्थिर रहने पर मौजूदा ग्राहकों पर कोई सीधा असर नहीं पड़ता।
हालांकि, भविष्य में महंगाई और वैश्विक परिस्थितियों के आधार पर ब्याज दरों में बदलाव संभव है।
RBI क्यों नहीं बढ़ाएगा ब्याज दर?
बार्कलेज के अनुसार, हाल में महंगाई बढ़ने के बावजूद RBI तत्काल मौद्रिक सख्ती की ओर नहीं जाएगा। रिपोर्ट में RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा के बयानों का हवाला देते हुए कहा गया है कि महंगाई केंद्रीय बैंक की बड़ी प्राथमिकता है, लेकिन कीमतों में बढ़ोतरी अभी व्यापक स्तर पर नहीं फैली है।
रिपोर्ट के मुताबिक, अभी मौद्रिक सख्ती (Monetary Tightening) पर चर्चा करना जल्दबाजी होगी। केंद्रीय बैंक आर्थिक विकास और महंगाई के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश करेगा।
अल नीनो और कच्चे तेल की कीमतों पर RBI की नजर
आने वाले समय में RBI की मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी (MPC) कई महत्वपूर्ण कारकों पर नजर रखेगी। इनमें सबसे प्रमुख हैं:
1. महंगाई का दबाव
बार्कलेज ने आशंका जताई है कि प्रतिकूल बेस इफेक्ट के कारण आने वाले महीनों में महंगाई बढ़ सकती है। इससे RBI के सामने चुनौती बढ़ सकती है।
2. अल नीनो का असर
अगर मानसून कमजोर रहता है तो खरीफ फसलों के उत्पादन पर असर पड़ सकता है। इससे खाद्य महंगाई बढ़ने की संभावना बन सकती है।
3. कच्चे तेल की कीमतें
वैश्विक तनाव और पश्चिम एशिया की स्थिति के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी बनी रह सकती है। तेल महंगा होने से भारत में महंगाई और आयात बिल दोनों पर असर पड़ता है।
जून के उपायों का असर हुआ कमजोर
बार्कलेज की रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले सप्ताह तेल की बढ़ती कीमतों के कारण वित्तीय हालात फिर से सख्त हुए हैं। यह स्थिति जून की मॉनेटरी पॉलिसी समीक्षा के समय के स्तर तक पहुंच गई है।
इससे RBI द्वारा जून में किए गए उपायों का असर कुछ हद तक कम हुआ है। हालांकि, विदेशी पूंजी प्रवाह में सुधार ने केंद्रीय बैंक को राहत दी है।
अगस्त बैठक में क्या उम्मीद?
विशेषज्ञों के मुताबिक, RBI अगस्त की बैठक में रेपो रेट को मौजूदा स्तर पर बनाए रख सकता है। केंद्रीय बैंक फिलहाल महंगाई, मानसून, वैश्विक बाजार और रुपये की स्थिति का आकलन करेगा।
होम लोन ग्राहकों के लिए इसका मतलब है कि फिलहाल EMI में किसी बड़े बदलाव की संभावना कम है। हालांकि, अगर आने वाले महीनों में महंगाई लगातार बढ़ती है या कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आता है तो RBI अपनी नीति में बदलाव कर सकता है।
निष्कर्ष:
अगस्त में RBI का फोकस ब्याज दर बढ़ाने के बजाय महंगाई और आर्थिक परिस्थितियों पर नजर रखने पर रह सकता है। रेपो रेट स्थिर रहने से होम लोन ग्राहकों को फिलहाल राहत मिल सकती है, लेकिन भविष्य का फैसला महंगाई और वैश्विक घटनाओं पर निर्भर करेगा।


