HDFC Bank Share Price: देश के सबसे बड़े निजी बैंकों में शामिल HDFC बैंक के शेयर मंगलवार को दबाव में कारोबार करते नजर आए। बैंक ने महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम (MSRDC) से जुड़े मामले की आंतरिक जांच पूरी होने के बाद बड़ा अनुशासनात्मक कदम उठाया है। बैंक के बोर्ड ने MD & CEO शशिधर जगदीशन, CFO श्रीनिवासन वैद्यनाथन और ग्रुप हेड (रिटेल एसेट्स) अरविंद वोहरा पर 1-1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। इसके साथ ही तीनों को चेतावनी पत्र भी जारी किया जाएगा। इस खबर के बाद बैंक का शेयर करीब 1% तक फिसल गया।
शेयर पर दिखा दबाव
मंगलवार के शुरुआती कारोबार में HDFC Bank का शेयर गिरावट के साथ खुला। NSE पर यह करीब 732.95 रुपये के स्तर तक पहुंच गया, जो पिछले बंद भाव के मुकाबले लगभग 0.9% की गिरावट दर्शाता है। कारोबार के दौरान निवेशकों ने बैंक के इस फैसले और उससे जुड़े घटनाक्रम पर नजर बनाए रखी।
क्या है पूरा MSRDC मामला?
HDFC बैंक ने स्टॉक एक्सचेंज को दी गई जानकारी में बताया कि 2017 और 2021 के दौरान महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम (MSRDC) के साथ डिपॉजिट जुटाने के लिए किए गए समझौतों की आंतरिक समीक्षा की गई। इस समीक्षा के बाद बोर्ड की विशेष अनुशासन समिति (Special Disciplinary Committee) ने अपनी रिपोर्ट पेश की।
बोर्ड ने पाया कि मामले में किसी भी अधिकारी द्वारा गलत मंशा, निजी लाभ लेने की कोशिश या अनैतिक उद्देश्य का कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला। हालांकि, समिति ने माना कि संबंधित अधिकारियों का व्यवहार “बिजनेस ओवररीच” यानी कारोबारी सीमाओं से आगे बढ़कर काम करने की श्रेणी में आता है।
तीन वरिष्ठ अधिकारियों पर क्या कार्रवाई हुई?
बैंक के बोर्ड ने निम्नलिखित अधिकारियों पर कार्रवाई का फैसला किया—
- MD & CEO शशिधर जगदीशन – ₹1 लाख का जुर्माना और चेतावनी पत्र।
- CFO श्रीनिवासन वैद्यनाथन – ₹1 लाख का जुर्माना और चेतावनी पत्र।
- ग्रुप हेड (रिटेल एसेट्स) अरविंद वोहरा – ₹1 लाख का जुर्माना और चेतावनी पत्र।
इसके अलावा, इस मामले से जुड़े अन्य कर्मचारियों को भी चेतावनी पत्र जारी करने का निर्णय लिया गया है।
RBI को भी दी जाएगी जानकारी
HDFC बैंक ने कहा कि बोर्ड ने निर्देश दिया है कि इस पूरे मामले की जानकारी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को भी भेजी जाएगी। बैंक ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी नियामकीय निर्देश का उल्लंघन हुआ है, तो उसे नियामक के संज्ञान में लाया जाएगा।
मई में लगे थे गंभीर आरोप
इस मामले ने पहली बार मई 2026 में सुर्खियां बटोरी थीं। उस समय मीडिया रिपोर्ट्स में आरोप लगाया गया था कि HDFC बैंक ने MSRDC से बड़े डिपॉजिट हासिल करने के लिए करीब 45 करोड़ रुपये का भुगतान किया था। रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया था कि इस भुगतान को मार्केटिंग खर्च के रूप में दिखाया गया और बैंक के शीर्ष प्रबंधन को इसकी जानकारी थी।
हालांकि, HDFC बैंक ने उस समय इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया था।
बैंक ने क्या दी सफाई?
HDFC बैंक का कहना है कि उसके पास मजबूत इंटरनल कंट्रोल, ऑडिट और मॉनिटरिंग सिस्टम मौजूद हैं। बैंक के अनुसार, सभी प्रक्रियाएं तय नियमों के तहत पूरी की गईं और किसी भी तरह की वित्तीय अनियमितता या व्यक्तिगत लाभ का कोई प्रमाण नहीं मिला।
बैंक ने दोहराया कि यह मामला किसी भ्रष्टाचार या धोखाधड़ी का नहीं, बल्कि व्यावसायिक निर्णय की सीमाओं से आगे बढ़ने (Business Overreach) का है।
पहले भी हो चुकी है स्वतंत्र जांच
गौरतलब है कि इससे पहले भी HDFC बैंक के कॉरपोरेट गवर्नेंस और नैतिक मानकों को लेकर एक स्वतंत्र कानूनी जांच कराई गई थी। उस जांच में भी पूर्व चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती द्वारा उठाए गए सवालों के समर्थन में कोई ठोस सबूत नहीं मिला था। इससे बैंक ने अपने गवर्नेंस ढांचे पर भरोसा जताया था।
निवेशकों के लिए इसका क्या मतलब?
विशेषज्ञों के अनुसार, फिलहाल बैंक ने स्वयं इस मामले में कार्रवाई करते हुए पारदर्शिता दिखाने की कोशिश की है। हालांकि, निवेशकों की नजर अब इस बात पर रहेगी कि RBI इस मामले पर क्या रुख अपनाता है और क्या इससे बैंक पर किसी अतिरिक्त नियामकीय कार्रवाई का असर पड़ता है। अल्पकाल में शेयर पर दबाव बना रह सकता है, लेकिन दीर्घकालिक निवेशकों के लिए बैंक की कारोबारी स्थिति और वित्तीय प्रदर्शन अधिक महत्वपूर्ण रहेगा।
मुख्य बातें (Highlights)
- HDFC बैंक के शेयर में करीब 1% की गिरावट।
- MD & CEO, CFO और रिटेल एसेट हेड पर ₹1-1 लाख का जुर्माना।
- बोर्ड ने तीनों अधिकारियों को चेतावनी पत्र जारी करने का फैसला किया।
- बैंक ने कहा- गलत नीयत नहीं, बल्कि Business Overreach का मामला।
- पूरे घटनाक्रम की जानकारी RBI को भेजी जाएगी।
- मई में MSRDC डिपॉजिट मामले में 45 करोड़ रुपये के भुगतान के आरोप लगे थे, जिन्हें बैंक पहले ही खारिज कर चुका है।


