Tata Sons FY26 Results: टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस ने वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) में शानदार वित्तीय प्रदर्शन किया है। कंपनी का शुद्ध मुनाफा 21.8% बढ़कर ₹31,961.11 करोड़ पर पहुंच गया। हालांकि, दूसरी ओर ग्रुप की एविएशन कंपनी एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस का संयुक्त घाटा दोगुने से भी अधिक बढ़कर ₹22,238 करोड़ हो गया। यानी एक तरफ टाटा संस ने रिकॉर्ड मुनाफा कमाया, तो दूसरी तरफ एयर इंडिया का बढ़ता नुकसान ग्रुप के लिए बड़ी चुनौती बन गया।
Highlights
- टाटा संस का FY26 मुनाफा 21.8% बढ़कर ₹31,961 करोड़ हुआ।
- एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस का संयुक्त घाटा ₹22,238 करोड़ पहुंचा।
- एयर इंडिया का कुल राजस्व करीब 9% घटकर ₹71,870 करोड़ रहा।
- कंपनी ने प्रति शेयर ₹1.11 लाख के फाइनल डिविडेंड की सिफारिश की।
- नोएल टाटा को डिविडेंड से करीब ₹45 करोड़ मिलने की संभावना।
टाटा संस ने दर्ज की मजबूत कमाई
वित्त वर्ष 2025-26 में टाटा संस ने शानदार वित्तीय प्रदर्शन किया। कंपनी का टैक्स के बाद शुद्ध मुनाफा (PAT) बढ़कर ₹31,961.11 करोड़ हो गया, जो पिछले वित्त वर्ष में ₹26,231.74 करोड़ था। इस तरह कंपनी के मुनाफे में 21.8% की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
सिर्फ मुनाफा ही नहीं, कंपनी की कुल आय (Revenue) भी मजबूत रही। FY26 में टाटा संस का रेवेन्यू 9.1% बढ़कर ₹42,366.55 करोड़ पहुंच गया। यह दिखाता है कि समूह के विभिन्न कारोबारों से कंपनी को लगातार मजबूत आय मिल रही है।
एयर इंडिया का घाटा 104% बढ़ा
जहां टाटा संस की कमाई बढ़ी, वहीं एयर इंडिया के लिए वित्त वर्ष 2025-26 काफी चुनौतीपूर्ण साबित हुआ।
एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस का संयुक्त शुद्ध घाटा ₹22,238 करोड़ रहा, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह ₹10,859 करोड़ था। यानी एक साल में कंपनी का नुकसान 104.7% बढ़ गया, जो दोगुने से भी अधिक है।
घाटे के साथ-साथ एयरलाइन की आय में भी गिरावट दर्ज की गई।
- कुल रेवेन्यू: ₹71,870 करोड़ (करीब 9% की गिरावट)
- एयर इंडिया का रेवेन्यू: ₹51,452 करोड़
- एयर इंडिया का घाटा: ₹15,368 करोड़
- एयर इंडिया एक्सप्रेस का रेवेन्यू: ₹19,088 करोड़
- एयर इंडिया एक्सप्रेस का घाटा: ₹6,767 करोड़
आखिर क्यों बढ़ रहा है एयर इंडिया का नुकसान?
विशेषज्ञों का मानना है कि एयर इंडिया फिलहाल बड़े स्तर पर फ्लीट मॉडर्नाइजेशन, नए विमानों की खरीद, एयरक्राफ्ट अपग्रेड, नेटवर्क विस्तार और ब्रांड ट्रांसफॉर्मेशन पर भारी निवेश कर रही है। इसके अलावा संचालन लागत, विमान लीज, ईंधन खर्च और एकीकरण (Integration) से जुड़े खर्च भी कंपनी की बैलेंस शीट पर दबाव बना रहे हैं।
हालांकि, टाटा ग्रुप का मानना है कि ये निवेश भविष्य में एयर इंडिया को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी एयरलाइन बनाने की रणनीति का हिस्सा हैं।
एयर इंडिया में किसकी कितनी हिस्सेदारी?
वर्तमान में एयर इंडिया की शेयरहोल्डिंग इस प्रकार है—
- टाटा संस: 73.82%
- सिंगापुर एयरलाइंस: 25.10%
- कर्मचारियों की हिस्सेदारी (शेयर बेनिफिट स्कीम): 1.08%
गौरतलब है कि भारत सरकार से निजीकरण के बाद 2022 में टाटा समूह ने एयर इंडिया का अधिग्रहण किया था और तब से कंपनी के पुनर्गठन पर लगातार निवेश किया जा रहा है।
प्रति शेयर ₹1.11 लाख का डिविडेंड
टाटा संस के बोर्ड ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए प्रति शेयर ₹1.11 लाख का फाइनल डिविडेंड देने की सिफारिश की है।
इस फैसले से टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा को बड़ा फायदा होगा। उनके पास टाटा संस के 4,060 शेयर हैं, जिसके आधार पर उन्हें करीब ₹45 करोड़ का डिविडेंड मिलने की संभावना है।
निवेशकों के लिए क्या संकेत?
टाटा संस का मजबूत मुनाफा यह दिखाता है कि समूह के अधिकांश कारोबार अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। हालांकि, एयर इंडिया का लगातार बढ़ता घाटा यह भी बताता है कि एविएशन बिजनेस अभी बड़े निवेश और पुनर्गठन के दौर से गुजर रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि एयर इंडिया भविष्य में अपनी परिचालन दक्षता बढ़ाने और लागत नियंत्रित करने में सफल रहती है, तो लंबे समय में यह निवेश टाटा ग्रुप के लिए लाभदायक साबित हो सकता है।


