नई दिल्ली: भारत में स्वच्छ ऊर्जा (Clean Energy) और न्यूक्लियर पावर सेक्टर में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। आदित्य बिड़ला ग्रुप की प्रमुख कंपनी हिंडाल्को इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) के 220 मेगावाट भारत स्मॉल रिएक्टर्स (BSRs) के लिए प्रस्ताव (RFP) जमा करने वाली इकलौती कंपनी बनकर बाजी मार ली है। दिलचस्प बात यह है कि शुरुआती दौर में इस प्रोजेक्ट में टाटा, रिलायंस, अदाणी, जिंदल और JSW जैसी बड़ी कंपनियों ने भी रुचि दिखाई थी, लेकिन अंतिम चरण में केवल हिंडाल्को ने ही प्रस्ताव दाखिल किया।
यह परियोजना भारत के औद्योगिक क्षेत्रों को कैप्टिव न्यूक्लियर पावर के जरिए स्वच्छ और भरोसेमंद बिजली उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
Highlights
- हिंडाल्को ने NPCIL के 220 MW भारत स्मॉल रिएक्टर्स (BSRs) के लिए एकमात्र प्रस्ताव जमा किया।
- टाटा, रिलायंस, अदाणी, JSW और जिंदल जैसी कंपनियों ने शुरुआती रुचि दिखाई थी।
- निजी कंपनियां परियोजना की पूंजी उपलब्ध कराएंगी, जबकि NPCIL निर्माण और संचालन संभालेगी।
- उद्योगों को अपनी कैप्टिव बिजली जरूरतों के लिए स्वच्छ न्यूक्लियर ऊर्जा मिलेगी।
- परियोजना स्टील, एल्युमीनियम और मेटल इंडस्ट्री के डीकार्बोनाइजेशन में मदद करेगी।
हिंडाल्को बनी इकलौती दावेदार
एल्युमीनियम और कॉपर उत्पादन में देश की अग्रणी कंपनी हिंडाल्को इंडस्ट्रीज ने NPCIL द्वारा आमंत्रित 220 मेगावाट क्षमता वाले भारत स्मॉल रिएक्टर्स (BSRs) के लिए प्रस्ताव जमा किया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार अंतिम तिथि तक किसी अन्य कंपनी ने औपचारिक प्रस्ताव दाखिल नहीं किया।
हालांकि, इस परियोजना में पहले टाटा पावर, रिलायंस इंडस्ट्रीज, जिंदल स्टील, JSW एनर्जी और अदाणी पावर जैसी बड़ी कंपनियों ने रुचि दिखाई थी। फरवरी 2025 में आयोजित प्री-प्रपोजल बैठक में 27 औद्योगिक कंपनियों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा भी लिया था।
कितने न्यूक्लियर रिएक्टर लगाए जाएंगे?
हिंडाल्को के साथ समझौते के तहत कितने रिएक्टर स्थापित होंगे, इसका अंतिम फैसला कंपनी द्वारा उपलब्ध कराई जाने वाली साइट्स और दोनों पक्षों के बीच होने वाले समझौते के बाद लिया जाएगा।
इस योजना का उद्देश्य उन उद्योगों को स्वच्छ बिजली उपलब्ध कराना है जिन्हें अपनी उत्पादन गतिविधियों के लिए लगातार बड़ी मात्रा में बिजली की आवश्यकता होती है। इसे कैप्टिव न्यूक्लियर पावर मॉडल के रूप में विकसित किया जा रहा है।
क्या है NPCIL का नया बिजनेस मॉडल?
NPCIL ने दिसंबर 2024 के अंत में इस परियोजना के लिए प्रस्ताव आमंत्रित किए थे। बाद में नीति संबंधी बदलावों और उद्योगों की मांग को देखते हुए प्रस्ताव जमा करने की अंतिम तिथि 31 मार्च 2026 तक बढ़ा दी गई।
इस मॉडल के तहत—
- निजी कंपनी जमीन, कूलिंग वॉटर और पूरी पूंजी उपलब्ध कराएगी।
- रिएक्टर का डिजाइन, निर्माण, गुणवत्ता नियंत्रण और संचालन NPCIL करेगी।
- निर्माण पूरा होने के बाद NPCIL ऑपरेशन की जिम्मेदारी संभालेगी।
- बिजली का उपयोग सबसे पहले संबंधित उद्योग अपनी जरूरतों के लिए करेगा।
- बची हुई बिजली पर भी परियोजना से जुड़े प्रावधान लागू होंगे।
पूरा खर्च कौन उठाएगा?
प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार परियोजना की पूंजीगत लागत (Capex) और संचालन लागत (Opex) का पूरा खर्च संबंधित औद्योगिक कंपनी वहन करेगी।
इसके अलावा—
- ईंधन की लागत
- संचालन एवं रखरखाव
- रेडियोधर्मी कचरा प्रबंधन
- डीकमीशनिंग (भविष्य में प्लांट बंद करने की प्रक्रिया)
जैसी सभी लागतें भी उपयोगकर्ता कंपनी ही उठाएगी। इसके बदले NPCIL को उसकी तकनीकी विशेषज्ञता और संचालन सेवाओं के लिए शुल्क दिया जाएगा।
उद्योगों को कैसे मिलेगा फायदा?
220 मेगावाट क्षमता वाले भारत स्मॉल रिएक्टर्स को इस तरह अपग्रेड किया जा रहा है कि इन्हें कम जमीन में स्थापित किया जा सके। इनका मुख्य उद्देश्य स्टील, एल्युमीनियम, मेटल और अन्य ऊर्जा-गहन उद्योगों को 24×7 स्वच्छ बिजली उपलब्ध कराना है।
इससे कंपनियां जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम कर सकेंगी, कार्बन उत्सर्जन घटेगा और भारत के नेट-जीरो तथा डीकार्बोनाइजेशन लक्ष्यों को भी मजबूती मिलेगी।
हिंडाल्को के शेयर पर क्या असर पड़ा?
इतनी बड़ी खबर के बावजूद मंगलवार सुबह शेयर बाजार में हिंडाल्को इंडस्ट्रीज के शेयर दबाव में कारोबार करते दिखे। सुबह करीब 9:30 बजे कंपनी का शेयर लगभग 0.74% की गिरावट के साथ ₹938 के आसपास कारोबार कर रहा था। हालांकि, बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की परियोजनाओं का वास्तविक वित्तीय प्रभाव लंबी अवधि में दिखाई देता है।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। इसमें दी गई शेयर बाजार संबंधी जानकारी निवेश की सलाह नहीं है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेश से पहले किसी प्रमाणित वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य करें।


