E20 Petrol Mileage Survey: देशभर में E20 पेट्रोल को लेकर बहस लगातार तेज होती जा रही है। सरकार इसे इथेनॉल ब्लेंडिंग बढ़ाकर कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने और पर्यावरण को बेहतर बनाने की दिशा में बड़ा कदम बता रही है। वहीं दूसरी ओर बड़ी संख्या में वाहन मालिकों का दावा है कि E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने के बाद उनकी गाड़ियों का माइलेज कम हो गया है और मरम्मत का खर्च भी बढ़ा है। अब एक नए सर्वे ने भी इन चिंताओं को सामने रखा है, जिसमें दो-तिहाई लोगों ने माइलेज में गिरावट की बात कही है।
E20 पेट्रोल को लेकर क्या कहता है सर्वे?
लोकल सर्कल्स द्वारा किए गए सर्वे में 2023 से पहले खरीदे गए पेट्रोल वाहनों के मालिकों की राय ली गई। सर्वे के अनुसार:
- 67% लोगों ने कहा कि 2025 की शुरुआत से उनकी गाड़ी का माइलेज 10% से अधिक घट गया है।
- 45% लोगों का कहना है कि वाहन में सामान्य से अधिक घिसावट हुई है या मरम्मत की जरूरत पहले के मुकाबले बढ़ गई है।
- कई वाहन मालिकों ने इंजन की परफॉर्मेंस और ड्राइविंग अनुभव में भी बदलाव महसूस होने की बात कही।
इन आंकड़ों ने E20 पेट्रोल की उपयोगिता और पुराने वाहनों पर इसके प्रभाव को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है।
आखिर क्या है E20 पेट्रोल?

E20 पेट्रोल वह ईंधन है जिसमें 20 प्रतिशत इथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल मिलाया जाता है। इथेनॉल गन्ने, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है।
सरकार का उद्देश्य:
- कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना।
- विदेशी मुद्रा की बचत करना।
- कार्बन उत्सर्जन में कमी लाना।
- किसानों की आय बढ़ाने में मदद करना।
इसी लक्ष्य के तहत अप्रैल 2025 से देश में E20 पेट्रोल की उपलब्धता और उपयोग को बढ़ावा दिया गया।
सरकार का क्या कहना है?
केंद्र सरकार का कहना है कि E20 पेट्रोल से माइलेज में हल्की कमी आ सकती है, क्योंकि इथेनॉल की ऊर्जा क्षमता सामान्य पेट्रोल की तुलना में थोड़ी कम होती है। हालांकि सरकार का दावा है कि:
- इससे इंजन को स्थायी नुकसान नहीं होता।
- E20-अनुकूल (E20 Compatible) वाहनों में किसी बड़ी तकनीकी समस्या की संभावना नहीं है।
- वाहन निर्माता कंपनियां अब नए मॉडल E20 के अनुरूप तैयार कर रही हैं।
पुराने वाहनों के लिए क्यों बढ़ रही चिंता?
विशेषज्ञों का मानना है कि 2023 से पहले बने कई पेट्रोल वाहन पूरी तरह E20 के लिए डिज़ाइन नहीं किए गए थे। ऐसे में कुछ मामलों में निम्न समस्याएं देखने को मिल सकती हैं:
- माइलेज में कमी
- फ्यूल सिस्टम के कुछ हिस्सों पर अतिरिक्त दबाव
- रबर और प्लास्टिक पार्ट्स की जल्दी घिसावट (यदि वाहन E20 के अनुरूप न हो)
- रखरखाव की लागत में वृद्धि
हालांकि यह प्रभाव सभी वाहनों में समान नहीं होता और यह वाहन के मॉडल, रखरखाव तथा निर्माता की तकनीकी क्षमता पर भी निर्भर करता है।
क्या सचमुच इंजन खराब हो जाता है?
इस सवाल पर अलग-अलग दावे सामने आए हैं। कुछ वाहन मालिक इंजन संबंधी समस्याओं की शिकायत कर रहे हैं, लेकिन सरकार और कई ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों का कहना है कि केवल E20 पेट्रोल को इंजन खराब होने का कारण मानना उचित नहीं होगा।
यदि वाहन निर्माता ने E20 के उपयोग की अनुमति दी है और समय पर सर्विसिंग कराई जाती है, तो सामान्य परिस्थितियों में गंभीर नुकसान की संभावना कम मानी जाती है।
वाहन मालिकों को क्या करना चाहिए?
यदि आपकी गाड़ी 2023 से पहले खरीदी गई है, तो इन बातों का ध्यान रखें:
- अपनी गाड़ी की ओनर मैनुअल या निर्माता की सलाह जरूर देखें।
- यह सुनिश्चित करें कि आपका वाहन E20 पेट्रोल के लिए उपयुक्त है।
- समय-समय पर सर्विसिंग और फ्यूल सिस्टम की जांच कराते रहें।
- माइलेज या इंजन की परफॉर्मेंस में असामान्य बदलाव दिखे तो अधिकृत सर्विस सेंटर से जांच कराएं।
निष्कर्ष
E20 पेट्रोल को लेकर उपभोक्ताओं और सरकार के दावे फिलहाल अलग-अलग नजर आ रहे हैं। जहां सरकार इसे ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरण के लिए महत्वपूर्ण कदम मान रही है, वहीं हालिया सर्वे में शामिल बड़ी संख्या में वाहन मालिकों ने माइलेज घटने और मरम्मत बढ़ने की शिकायत की है। आने वाले समय में अधिक विस्तृत तकनीकी अध्ययन और वास्तविक उपयोग के आंकड़े यह स्पष्ट करेंगे कि E20 पेट्रोल का विभिन्न श्रेणी के वाहनों पर वास्तविक प्रभाव कितना पड़ता है।


