नई दिल्ली: देशभर के करोड़ों वाहन मालिकों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। केंद्र सरकार प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC – Pollution Under Control Certificate) से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव करने की तैयारी कर रही है। यदि प्रस्ताव लागू हो जाता है तो BS-VI (BS-6) निजी वाहन मालिकों को हर साल PUC सर्टिफिकेट बनवाने की जरूरत नहीं होगी। सरकार ने इन वाहनों के लिए PUC प्रमाणपत्र की वैधता अवधि मौजूदा 1 साल से बढ़ाकर 3 साल करने का प्रस्ताव रखा है।
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने इस संबंध में एक ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है और आम लोगों से अगले 30 दिनों के भीतर सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं। सुझावों पर विचार करने के बाद अंतिम अधिसूचना जारी की जाएगी।
BS-6 वाहन मालिकों को क्या मिलेगा फायदा?
सरकार के प्रस्ताव के अनुसार, रजिस्ट्रेशन की तारीख से छह साल तक पुराने BS-6 निजी वाहनों के लिए PUC सर्टिफिकेट की वैधता तीन साल होगी। इसका मतलब है कि वाहन मालिकों को बार-बार PUC सेंटर जाने और हर साल सर्टिफिकेट बनवाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
इस फैसले का उद्देश्य वाहन मालिकों के लिए नियमों का पालन आसान बनाना और अनावश्यक अनुपालन (Compliance) का बोझ कम करना है। साथ ही, इससे समय और खर्च दोनों की बचत होगी।
अलग-अलग वाहनों के लिए प्रस्तावित PUC नियम
ड्राफ्ट नोटिफिकेशन में विभिन्न उत्सर्जन मानकों (Emission Standards) के आधार पर PUC नवीनीकरण की अलग-अलग समय सीमा प्रस्तावित की गई है।
1. BS-6 निजी वाहन
- रजिस्ट्रेशन से पहले 6 वर्षों तक PUC की वैधता 3 वर्ष।
- 6 से 10 वर्ष पुराने वाहन: हर 2 साल में PUC नवीनीकरण।
- 10 वर्ष से अधिक पुराने वाहन: हर 6 महीने में PUC नवीनीकरण।
2. BS-4 वाहन
- सभी BS-4 वाहनों के लिए हर 6 महीने में PUC सर्टिफिकेट का नवीनीकरण अनिवार्य रहेगा।
3. BS-1, BS-2 और BS-3 वाहन
- इन पुराने वाहनों के लिए हर 3 महीने में PUC प्रमाणपत्र का नवीनीकरण कराना होगा।
सरकार ने क्यों किया यह बदलाव?
सरकार का मानना है कि आधुनिक BS-6 इंजन तकनीक वाले वाहन पहले की तुलना में काफी कम प्रदूषण फैलाते हैं। ऐसे वाहनों में उन्नत उत्सर्जन नियंत्रण प्रणाली लगी होती है, जिसके कारण इनका उत्सर्जन निर्धारित मानकों के भीतर रहता है।
इसी वजह से सरकार ने इन वाहनों के लिए PUC की वैधता बढ़ाने का प्रस्ताव तैयार किया है। इससे वाहन मालिकों को राहत मिलेगी और सरकारी प्रक्रियाएं भी सरल होंगी।
क्या है PUC सर्टिफिकेट?
PUC (Pollution Under Control) सर्टिफिकेट एक ऐसा प्रमाणपत्र है जो यह साबित करता है कि आपके वाहन से निकलने वाला धुआं सरकार द्वारा निर्धारित प्रदूषण मानकों के भीतर है।
यह जांच अधिकृत PUC केंद्रों पर की जाती है, जहां वाहन के उत्सर्जन स्तर को मापकर प्रमाणपत्र जारी किया जाता है। यदि वाहन निर्धारित सीमा से अधिक प्रदूषण फैलाता है तो उसे ठीक कराने के बाद ही नया प्रमाणपत्र मिलता है।
क्या होते हैं BS Emission Norms?
BS यानी भारत स्टेज (Bharat Stage) उत्सर्जन मानक, जो वाहनों से निकलने वाले प्रदूषकों की अधिकतम सीमा तय करते हैं। इनके जरिए कार्बन मोनोऑक्साइड (CO), नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx), हाइड्रोकार्बन (HC) और पार्टिकुलेट मैटर (PM) जैसे प्रदूषकों को नियंत्रित किया जाता है।
भारत में:
- BS-4 मानक वर्ष 2017 से 2020 तक लागू रहे।
- 1 अप्रैल 2020 से पूरे देश में BS-6 मानक लागू कर दिए गए।
- भारत ने प्रदूषण कम करने के लिए BS-5 चरण को छोड़कर सीधे BS-6 लागू किया था।
BS-6 वाहन कम सल्फर वाले ईंधन का उपयोग करते हैं और पुराने मानकों की तुलना में काफी कम प्रदूषण फैलाते हैं।
आम लोगों से मांगे गए सुझाव
सरकार ने इस ड्राफ्ट प्रस्ताव पर नागरिकों, वाहन मालिकों और संबंधित पक्षों से 30 दिनों के भीतर सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं। सुझावों की समीक्षा के बाद अंतिम नियम अधिसूचित किए जाएंगे। यदि यह प्रस्ताव मंजूर हो जाता है तो देशभर के लाखों BS-6 वाहन मालिकों को बड़ी राहत मिलेगी और PUC से जुड़ी प्रक्रिया पहले से कहीं अधिक आसान हो जाएगी।
निष्कर्ष
केंद्र सरकार का यह प्रस्ताव वाहन मालिकों के लिए एक बड़ा राहतभरा कदम माना जा रहा है। खासकर BS-6 निजी वाहन चलाने वालों को हर साल PUC सर्टिफिकेट बनवाने की झंझट से छुटकारा मिल सकता है। हालांकि फिलहाल यह केवल ड्राफ्ट प्रस्ताव है और अंतिम नियम लागू होने से पहले आम जनता के सुझावों पर विचार किया जाएगा। यदि इसे मंजूरी मिलती है तो देश में वाहन प्रदूषण जांच प्रणाली अधिक व्यावहारिक और आधुनिक तकनीक के अनुरूप हो जाएगी।


