SBI Funds IPO, FPI Investment July 2026: मार्च से जून तक लगातार चार महीने भारतीय शेयर बाजार से पैसा निकालने वाले विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने जुलाई में जोरदार वापसी की है। जुलाई 2026 में डेट और इक्विटी दोनों को मिलाकर कुल विदेशी निवेश करीब ₹41,796 करोड़ ($4.4 बिलियन) तक पहुंच गया, जो इस साल का सबसे बड़ा मासिक निवेश है। खास बात यह है कि SBI फंड्स के IPO में विदेशी निवेशकों की मजबूत भागीदारी ने इस उछाल में अहम भूमिका निभाई है।
जुलाई में टूटा फरवरी का रिकॉर्ड
मार्च से जून तक लगातार बिकवाली के बाद जुलाई में विदेशी निवेशकों का रुख बदलता नजर आया। 24 जुलाई 2026 तक एफपीआई ने भारतीय इक्विटी बाजार में करीब ₹14,946 करोड़ ($1.6 बिलियन) का शुद्ध निवेश किया। यह लगातार चार महीने की भारी बिकवाली के बाद पहला महीना है जब विदेशी निवेशक नेट बायर बने हैं।
सिर्फ इक्विटी ही नहीं, बल्कि डेट मार्केट में भी मजबूत निवेश जारी रहने से जुलाई में सभी एसेट क्लास में कुल FPI निवेश ₹41,796 करोड़ ($4.4 बिलियन) तक पहुंच गया। इससे पहले फरवरी 2026 में कुल निवेश ₹37,804 करोड़ ($4.2 बिलियन) रहा था, जिसे जुलाई ने पीछे छोड़ दिया।
SBI Funds IPO बना बड़ा आकर्षण
विशेषज्ञों के अनुसार जुलाई में विदेशी निवेश बढ़ने की सबसे बड़ी वजह SBI Funds IPO रही। इस आईपीओ में विदेशी संस्थागत निवेशकों ने एंकर बुक और QIB (Qualified Institutional Buyers) दोनों कैटेगरी में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इससे प्राइमरी मार्केट में विदेशी निवेश का प्रवाह काफी मजबूत हुआ।
डेट मार्केट ने भी दिया बड़ा सहारा
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वी.के. विजयकुमार के मुताबिक जुलाई में निवेश बढ़ने के पीछे दो प्रमुख कारण रहे—
- SBI Funds IPO जैसे बड़े प्राइमरी मार्केट इश्यू
- सरकार द्वारा टैक्स नियमों में बदलाव के बाद डेट मार्केट में बढ़ती विदेशी दिलचस्पी
उनका कहना है कि डेट इंस्ट्रूमेंट्स में लगातार निवेश आने से कुल विदेशी निवेश के आंकड़े को मजबूत समर्थन मिला।
मार्च से जून तक रही भारी बिकवाली
साल 2026 की शुरुआत विदेशी निवेशकों के लिए काफी उतार-चढ़ाव भरी रही। वैश्विक अनिश्चितताओं, ईरान युद्ध से जुड़े तनाव और बाजार में जोखिम बढ़ने के कारण एफपीआई ने भारतीय बाजार से बड़े पैमाने पर पैसा निकाला।
2026 में इक्विटी में मासिक शुद्ध FPI निवेश (₹ करोड़)
| महीना | शुद्ध निवेश |
|---|---|
| जनवरी | 🔴 -35,962 |
| फरवरी | 🟢 22,615 |
| मार्च | 🔴 -1,17,775 |
| अप्रैल | 🔴 -60,847 |
| मई | 🔴 -32,963 |
| जून | 🔴 -49,340 |
| जुलाई* | 🟢 14,946 |
| कुल | 🔴 -2,59,326 |
*आंकड़े 24 जुलाई 2026 तक
स्रोत: NSDL
अब भी सालाना आधार पर घाटे में FPI
हालांकि जुलाई में निवेशकों की वापसी से बाजार को राहत मिली है, लेकिन मार्च से जून के दौरान हुई भारी बिकवाली की पूरी भरपाई अभी नहीं हो सकी है।
- मार्च से जून के बीच विदेशी निवेशकों ने $27.8 बिलियन से अधिक की बिकवाली की।
- जुलाई की खरीदारी के बावजूद 2026 में अब तक इक्विटी में करीब $27.7 बिलियन का नेट आउटफ्लो बना हुआ है।
- दूसरी ओर डेट मार्केट में 2026 के दौरान अब तक $9.5 बिलियन का शुद्ध निवेश दर्ज किया गया है।
- सभी एसेट क्लास को मिलाकर भी 2026 में कुल FPI निवेश अभी $18.4 बिलियन (करीब ₹1.7 लाख करोड़) के नेट घाटे में है।
बाजार के लिए क्या हैं संकेत?
विश्लेषकों का मानना है कि जुलाई का निवेश यह संकेत देता है कि विदेशी निवेशकों का भरोसा धीरे-धीरे भारतीय बाजार पर लौट रहा है। यदि वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव कम रहता है, कॉरपोरेट आय मजबूत बनी रहती है और भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर बेहतर रहती है, तो आने वाले महीनों में विदेशी निवेश का प्रवाह और मजबूत हो सकता है। हालांकि वैश्विक ब्याज दरों, डॉलर इंडेक्स और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर एफपीआई की रणनीति आगे भी काफी हद तक निर्भर रहेगी।


