नई दिल्ली: बोर्ड परीक्षा में कम अंक आने के बाद कई छात्र यह मान लेते हैं कि उनका करियर खत्म हो गया है। लेकिन एक छात्र की कहानी इस सोच को पूरी तरह बदल देती है। 10वीं बोर्ड परीक्षा में सिर्फ 54% अंक हासिल करने वाले जैनेंद्रजीत ने हार मानने के बजाय अपनी कमियों पर काम किया। लगातार मेहनत, सही रणनीति और अनुशासन की बदौलत उन्होंने JEE Main 2023 में 99.98 पर्सेंटाइल और JEE Advanced में AIR 349 हासिल कर IIT बॉम्बे के कंप्यूटर साइंस प्रोग्राम में प्रवेश पाया। उनकी यह यात्रा आज हजारों छात्रों के लिए प्रेरणा बन गई है।
10वीं बोर्ड के नतीजे ने तोड़ दिया था आत्मविश्वास
जैनेंद्रजीत को 10वीं बोर्ड परीक्षा में अच्छे अंकों की उम्मीद थी, लेकिन परिणाम उम्मीद के बिल्कुल विपरीत आया। उन्हें कुल 54% अंक मिले। गणित में 41 अंक और विज्ञान में 48 अंक आने से वह काफी निराश हो गए। रिजल्ट देखने के बाद उन्हें कुछ समय तक विश्वास ही नहीं हुआ कि ये उनके ही अंक हैं।
हालांकि उन्होंने इस असफलता को अपनी मंजिल का अंत नहीं माना। उन्होंने इसे एक सीख की तरह स्वीकार किया और खुद को बेहतर बनाने का फैसला किया।
लंबी बीमारी ने बढ़ाई मुश्किलें
बोर्ड परीक्षा से पहले जैनेंद्रजीत लगभग 40 से 50 दिनों तक बीमार रहे और उन्हें बेड रेस्ट करना पड़ा। इसी वजह से उनकी पढ़ाई काफी प्रभावित हुई। दूसरी ओर, उनके कई दोस्तों ने 90 प्रतिशत से ज्यादा अंक हासिल किए। इससे उन्हें अपनी कमियों का एहसास हुआ, लेकिन उन्होंने खुद को दूसरों से तुलना करने के बजाय अपनी कमजोरियों पर काम करने का निर्णय लिया।
खुद से किया वादा, अब सिर्फ मेहनत होगी पहचान
कम अंकों से निराश होने के बावजूद उन्होंने खुद से कहा कि यह उनकी असली क्षमता नहीं है। उन्होंने तय किया कि अब बहाने नहीं, बल्कि मेहनत ही उनकी पहचान बनेगी।
यही सोच उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट साबित हुई। उन्होंने लक्ष्य तय किया और पूरे अनुशासन के साथ उसकी तैयारी शुरू कर दी।
11वीं से पूरी तरह बदल दी पढ़ाई की रणनीति
11वीं कक्षा में पहुंचने के बाद जैनेंद्रजीत ने अपनी पढ़ाई का तरीका पूरी तरह बदल दिया।
उन्होंने:
- रोजाना तय समय पर पढ़ाई शुरू की।
- सोशल मीडिया से दूरी बना ली।
- लगभग 10 घंटे नियमित अध्ययन किया।
- सिर्फ लंबे समय तक पढ़ने के बजाय कॉन्सेप्ट समझने पर फोकस किया।
उनका मानना था कि स्मार्ट तरीके से पढ़ाई करना, घंटों किताब के सामने बैठने से ज्यादा प्रभावी होता है।
क्लास से पहले ही पढ़ लेते थे पूरा टॉपिक
उन्होंने एक नई आदत विकसित की। जिस विषय की क्लास अगले दिन होने वाली होती, उसे पहले ही YouTube के जरिए समझ लेते थे।
इसका फायदा यह हुआ कि क्लास के दौरान पढ़ाया गया विषय आसानी से समझ में आने लगा और किसी भी कॉन्सेप्ट को दोबारा याद करने में कम समय लगता था।
छोटे-छोटे लक्ष्य और PYQs बने सफलता की कुंजी
जैनेंद्रजीत बिना योजना के पढ़ाई करने में विश्वास नहीं रखते थे। वह हर दिन छोटे-छोटे लक्ष्य तय करते थे और उन्हें समय पर पूरा करते थे।
इसके अलावा हर अध्याय पूरा करने के बाद Previous Year Questions (PYQs) हल करते थे। इससे परीक्षा के पैटर्न को समझने और प्रश्नों को हल करने की गति एवं सटीकता दोनों में सुधार हुआ।
मेहनत का मिला शानदार परिणाम
लगातार अभ्यास और अनुशासन का असर जल्द ही दिखाई देने लगा।
उन्होंने:
- JEE Main 2023 में 99.98 पर्सेंटाइल हासिल की।
- JEE Advanced में AIR 349 प्राप्त की।
- इसके बाद IIT बॉम्बे के प्रतिष्ठित कंप्यूटर साइंस प्रोग्राम में प्रवेश हासिल किया।
जो छात्र कभी 10वीं बोर्ड के कम अंकों से निराश था, वही देश के सबसे प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थानों में पहुंच गया।
“मेहनत हर चीज पर भारी पड़ती है”
अपनी सफलता के बारे में जैनेंद्रजीत का कहना है,
“अगर जिंदगी में कुछ बड़ा हासिल करना है तो बहाने नहीं, मेहनत करनी होगी। मेहनत हर चीज पर भारी पड़ती है।”
उनका यह संदेश उन छात्रों के लिए बेहद प्रेरणादायक है, जो किसी एक परीक्षा में कम अंक आने के बाद खुद को कमजोर समझने लगते हैं।
सोशल मीडिया पर लोगों ने की जमकर सराहना
जैनेंद्रजीत ने अपनी सफलता की कहानी YouTube पर साझा की, जिसके बाद हजारों लोगों ने उनकी मेहनत और संघर्ष की तारीफ की।
कई यूजर्स ने लिखा, “Hard Work Pays Off”, जबकि कई छात्रों ने कहा कि उनकी कहानी ने उन्हें मुश्किल परिस्थितियों में भी अपने लक्ष्य के लिए लगातार मेहनत करने की प्रेरणा दी।
छात्रों के लिए सबसे बड़ा संदेश
बोर्ड परीक्षा के अंक महत्वपूर्ण जरूर होते हैं, लेकिन वे किसी छात्र की पूरी क्षमता तय नहीं करते। सही रणनीति, निरंतर अभ्यास, आत्मविश्वास और अनुशासन के साथ कोई भी छात्र अपनी मंजिल तक पहुंच सकता है। जैनेंद्रजीत की कहानी इस बात का जीवंत उदाहरण है कि असफलता अंत नहीं होती, बल्कि नई शुरुआत का अवसर भी बन सकती है।
डिस्क्लेमर: यह लेख सोशल मीडिया और सार्वजनिक रूप से साझा की गई जानकारी पर आधारित है। संबंधित दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है।


