CWG 2026: भारत की स्टार वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में इतिहास रचते हुए महिलाओं के 48 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीत लिया। गोल्ड मेडल जीतने के बाद पोडियम पर खड़ी मीराबाई की आंखें नम हो गईं। भावुक होकर उन्होंने अपनी इस ऐतिहासिक सफलता को अपनी मां टॉम्बी देवी और कोच विजय सिंह को समर्पित किया। लगातार तीसरी बार कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड जीतने वाली वह पहली भारतीय महिला वेटलिफ्टर भी बन गई हैं।
गोल्ड जीतते ही छलक पड़े आंसू
ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में जैसे ही मीराबाई चानू के नाम स्वर्ण पदक की घोषणा हुई, पूरा स्टेडियम तालियों से गूंज उठा। पोडियम पर राष्ट्रगान के दौरान मीराबाई अपनी भावनाओं को रोक नहीं सकीं और उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े।
मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि इस सफलता के पीछे कई लोगों का योगदान है, लेकिन सबसे बड़ा सहारा उनकी मां रही हैं।
उन्होंने कहा,
“मुझे हर किसी का भरपूर सहयोग मिला, लेकिन सबसे बड़ा साथ मेरी मां का रहा। वह हमेशा मुझसे कहती थीं कि ‘तुम ये कर सकती हो।’ उनकी यही बातें मुझे हर मुश्किल समय में आगे बढ़ने की ताकत देती रहीं।”
कोच विजय सिंह को भी दिया जीत का श्रेय
मीराबाई ने अपनी सफलता का श्रेय अपने कोच विजय सिंह को भी दिया। उन्होंने बताया कि वेटलिफ्टिंग जैसे कठिन खेल में फिटनेस बनाए रखना और चोटों से बचना आसान नहीं होता, लेकिन उनके कोच ने हर मोड़ पर उनका साथ दिया।
उन्होंने कहा,
“मेरे कोच विजय सर ने हर कदम पर मेरा साथ दिया। बढ़ती उम्र के साथ इस खेल में खुद को फिट रखना आसान नहीं होता। उन्होंने मेरी ट्रेनिंग, खान-पान और रिकवरी का पूरा ध्यान रखा। अगर उनका साथ नहीं होता तो यह जीत इतनी आसान नहीं होती।”
बातचीत के दौरान मीराबाई कई बार भावुक हो गईं और अपने आंसू नहीं रोक सकीं।
लगातार तीसरी बार जीता कॉमनवेल्थ गेम्स का गोल्ड
इस जीत के साथ मीराबाई चानू ने नया इतिहास रच दिया। उन्होंने 2018, 2022 और अब 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स में लगातार तीसरी बार स्वर्ण पदक जीतकर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया। ऐसा करने वाली वह पहली भारतीय महिला वेटलिफ्टर बन गई हैं।
यह उपलब्धि उनके शानदार करियर में एक और बड़ी उपलब्धि जोड़ती है और भारतीय वेटलिफ्टिंग के इतिहास में भी इसे लंबे समय तक याद रखा जाएगा।
ऐसा रहा मीराबाई चानू का प्रदर्शन
मुकाबले की शुरुआत मीराबाई के लिए आसान नहीं रही। स्नैच के पहले प्रयास में वह 82 किलोग्राम वजन उठाने में सफल नहीं हो सकीं। हालांकि उन्होंने शानदार वापसी करते हुए दूसरे प्रयास में 82 किलोग्राम सफलतापूर्वक उठाया और नया कॉमनवेल्थ गेम्स रिकॉर्ड बनाया।
इसके बाद तीसरे प्रयास में उन्होंने 85 किलोग्राम वजन उठाकर अपना ही रिकॉर्ड बेहतर कर दिया और मुकाबले में मजबूत बढ़त हासिल कर ली।
क्लीन एंड जर्क में भी पहला प्रयास 105 किलोग्राम पर असफल रहा, लेकिन दूसरे प्रयास में उन्होंने यह वजन सफलतापूर्वक उठाया और एक और नया कॉमनवेल्थ गेम्स रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया।
190 किलोग्राम वजन उठाकर जीता स्वर्ण
मीराबाई चानू ने स्नैच में 85 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 105 किलोग्राम उठाकर कुल 190 किलोग्राम वजन उठाया। इस शानदार प्रदर्शन के दम पर उन्होंने नाइजीरिया की रूथ असुको न्योंग को 22 किलोग्राम के बड़े अंतर से पीछे छोड़ते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
भारत के लिए यह कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का बेहद खास पल रहा। मीराबाई की इस उपलब्धि ने न केवल देश का गौरव बढ़ाया, बल्कि एक बार फिर साबित कर दिया कि कठिन परिस्थितियों, चोटों और चुनौतियों के बावजूद दृढ़ संकल्प और मेहनत के दम पर दुनिया की सबसे बड़ी उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं।


