Commodity Outlook: पिछले सप्ताह कमोडिटी बाजार में जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखने को मिला। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगामी बैठक को लेकर निवेशकों की चिंता बढ़ गई है। अब 28-29 जुलाई को होने वाली अमेरिकी फेड की बैठक, लाल सागर में जारी तनाव और वैश्विक सप्लाई की स्थिति अगले सप्ताह सोना, चांदी, कच्चे तेल और बेस मेटल्स की चाल तय कर सकती है। कोटक सिक्योरिटीज की कमोडिटी रिसर्च एक्सपर्ट कायनात चैनवाला ने निवेशकों के लिए अगले सप्ताह के प्रमुख ट्रिगर्स और महत्वपूर्ण स्तर बताए हैं।
अगले सप्ताह किन फैक्टर्स पर रहेगी सबसे ज्यादा नजर?
कमोडिटी बाजार के लिए अगले सप्ताह तीन बड़े फैक्टर बेहद अहम माने जा रहे हैं।
- पश्चिम एशिया और लाल सागर में बढ़ता तनाव
- अमेरिकी फेडरल रिजर्व की 28-29 जुलाई की मौद्रिक नीति बैठक
- वैश्विक सप्लाई चेन और तेल उत्पादन से जुड़े जोखिम
इन तीनों घटनाक्रमों का असर कच्चे तेल के साथ-साथ सोना, चांदी और औद्योगिक धातुओं पर भी देखने को मिल सकता है।
कच्चे तेल में क्यों आई इतनी तेज तेजी?
पिछले सप्ताह अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में लगभग 10% की तेजी दर्ज की गई। एक समय ब्रेंट क्रूड 102 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। हालांकि सप्ताह के अंतिम कारोबारी सत्र में मुनाफावसूली के कारण कीमतों में कुछ नरमी भी देखने को मिली।
कायनात चैनवाला के मुताबिक इस तेजी के पीछे सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया में बढ़ा तनाव है।
सप्लाई को लेकर बढ़ी चिंता
- लाल सागर में हूती विद्रोहियों ने दो सऊदी तेल टैंकरों पर ड्रोन और मिसाइल हमलों का दावा किया।
- सुरक्षा कारणों से कई शिपिंग कंपनियों ने अपने समुद्री मार्ग बदल दिए।
- कजाकिस्तान की एक प्रमुख पाइपलाइन पर ड्रोन हमले के बाद उसकी क्षमता लगभग 80% तक प्रभावित हुई।
- इन घटनाओं से वैश्विक तेल सप्लाई बाधित होने की आशंका बढ़ी और कीमतों में तेजी आई।
अगर आने वाले दिनों में तनाव और बढ़ता है तो तेल बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है।
सोना और चांदी में क्यों लौटी तेजी?
पिछले सप्ताह स्पॉट गोल्ड लगभग 1% बढ़कर 4,050 डॉलर प्रति औंस के ऊपर बंद हुआ। वहीं चांदी में करीब 4% की मजबूती देखने को मिली और इसकी कीमत लगभग 58 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई।
हालांकि एक्सपर्ट का कहना है कि यह तेजी नई खरीदारी की वजह से नहीं आई, बल्कि गिरावट के बाद निवेशकों द्वारा की गई डिप बायिंग (Dip Buying) और शॉर्ट कवरिंग के कारण देखने को मिली।
इसके बावजूद मजबूत अमेरिकी डॉलर और ऊंची अमेरिकी बॉन्ड यील्ड अभी भी सोना-चांदी पर दबाव बनाए हुए हैं। ऐसे में आगे की दिशा काफी हद तक फेड के रुख पर निर्भर करेगी।
MCX गोल्ड के लिए कौन-कौन से स्तर महत्वपूर्ण?
घरेलू वायदा बाजार MCX गोल्ड पिछले सप्ताह ₹1,43,106 प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ।
कायनात चैनवाला के अनुसार अगले सप्ताह निवेशकों को इन स्तरों पर नजर रखनी चाहिए।
रेजिस्टेंस
- ₹1,46,000 पहला प्रमुख रेजिस्टेंस
- ₹1,48,000 दूसरा मजबूत रेजिस्टेंस
सपोर्ट
- ₹1,41,000 पहला अहम सपोर्ट
- ₹1,39,800 के नीचे फिसलने पर गिरावट और गहरी हो सकती है।
फिलहाल बाजार सीमित दायरे में कारोबार कर रहा है और फेड की बैठक के बाद इसमें बड़ी चाल देखने को मिल सकती है।
बेस मेटल्स में भी बनी रही मजबूती
पिछले सप्ताह कॉपर, एल्युमिनियम, जिंक और लेड में भी अच्छी तेजी दर्ज की गई।
विशेष रूप से कॉपर की कीमतों को इन कारणों से समर्थन मिला—
- चीन में कॉपर स्टॉक में कमी
- रिफाइंड मेटल्स पर संभावित टैरिफ को लेकर अनिश्चितता
- औद्योगिक मांग को लेकर सकारात्मक उम्मीदें
इन वजहों से कॉपर की कीमतें लगभग एक महीने के उच्च स्तर तक पहुंच गईं।
फेडरल रिजर्व की बैठक बनेगी सबसे बड़ा ट्रिगर
28-29 जुलाई को होने वाली अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक अगले सप्ताह कमोडिटी बाजार के लिए सबसे महत्वपूर्ण घटना मानी जा रही है।
कायनात चैनवाला का मानना है कि केवल तेल की कीमतों में आई तेजी के आधार पर फेड अगले सप्ताह ब्याज दरों में बढ़ोतरी करने की संभावना कम है। हालांकि यदि महंगाई को लेकर फेड का रुख सख्त रहता है तो सितंबर की बैठक में ब्याज दर बढ़ने की संभावना पहले से अधिक मजबूत हो सकती है।
फेड की टिप्पणी डॉलर इंडेक्स, बॉन्ड यील्ड और वैश्विक कमोडिटी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।
अगले सप्ताह किन घटनाओं पर निवेशकों को रखनी चाहिए नजर?
कमोडिटी बाजार में निवेश करने वालों के लिए अगले सप्ताह ये तीन घटनाएं सबसे महत्वपूर्ण रहेंगी—
- लाल सागर और पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक घटनाक्रम
- अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक और ब्याज दरों पर उसका रुख
- ईरान या अन्य प्रमुख तेल उत्पादक देशों की ओर से आने वाले कूटनीतिक संकेत
इन घटनाओं के आधार पर कच्चे तेल, सोना, चांदी और बेस मेटल्स में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
निवेशकों के लिए क्या है रणनीति?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगले सप्ताह कमोडिटी बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है। ऐसे में निवेशकों को बिना रणनीति के बड़े दांव लगाने से बचना चाहिए। फेड की बैठक के नतीजे, पश्चिम एशिया की स्थिति और सप्लाई से जुड़े अपडेट पर लगातार नजर रखना जरूरी होगा। सोना और चांदी में निवेश करने वाले निवेशकों को प्रमुख सपोर्ट और रेजिस्टेंस स्तरों का ध्यान रखते हुए ही ट्रेडिंग या निवेश का फैसला करना चाहिए।
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