Nuclear Related Stocks: भारत सरकार छोटे मॉड्यूलर न्यूक्लियर रिएक्टर (Small Modular Reactor – SMR) तकनीक पर तेजी से आगे बढ़ रही है। सरकार का लक्ष्य 2033 तक कम से कम 5 स्वदेशी SMR शुरू करना है, जबकि 2047 तक देश की कुल परमाणु ऊर्जा क्षमता को मौजूदा 8.8 गीगावाट से बढ़ाकर 100 गीगावाट तक ले जाने की योजना है। इस महत्वाकांक्षी रोडमैप का लाभ उन कंपनियों को मिल सकता है जो न्यूक्लियर सेक्टर के लिए उपकरण, इंजीनियरिंग सेवाएं और विशेष कंपोनेंट्स उपलब्ध कराती हैं। ऐसे में BHEL, L&T, MTAR Technologies, HCC और Kirloskar Brothers जैसे शेयर निवेशकों की वॉचलिस्ट में आ गए हैं।
भारत का SMR मिशन क्यों है खास?
भारत पारंपरिक बड़े परमाणु संयंत्रों के साथ-साथ अब Small Modular Reactors (SMR) पर भी फोकस बढ़ा रहा है। SMR आकार में छोटे, लागत में अपेक्षाकृत कम और तेजी से स्थापित किए जा सकने वाले न्यूक्लियर रिएक्टर होते हैं। इनका उपयोग बिजली उत्पादन के अलावा औद्योगिक ऊर्जा जरूरतों और भविष्य में ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन के लिए भी किया जा सकता है।
सरकार की योजना के तहत भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) तीन स्वदेशी रिएक्टर डिजाइन विकसित कर रहा है—
- 220 मेगावाट BSMR-200
- 55 मेगावाट SMR
- हाई-टेम्परेचर गैस-कूल्ड रिएक्टर, जिसका उपयोग हाइड्रोजन उत्पादन में किया जाएगा।
महाराष्ट्र के तारापुर में पहले दो स्वदेशी SMR लगाने को मंजूरी भी मिल चुकी है। यदि ये परियोजनाएं तय समय पर आगे बढ़ती हैं, तो पूरे न्यूक्लियर सप्लाई चेन को बड़ा कारोबार मिल सकता है।
1. BHEL: न्यूक्लियर उपकरणों की मजबूत खिलाड़ी
सरकारी इंजीनियरिंग कंपनी भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL) कई वर्षों से परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं के लिए अहम उपकरण तैयार कर रही है।
कंपनी बनाती है—
- स्टीम जनरेटर
- रिएक्टर हेडर
- टरबाइन-जनरेटर सिस्टम
- हीट एक्सचेंजर
SMR परियोजनाओं में इन उपकरणों की मांग बढ़ने की संभावना है। वित्तीय प्रदर्शन की बात करें तो Q1 FY27 में BHEL ने ₹376.71 करोड़ का शुद्ध लाभ दर्ज किया, जबकि पिछले वर्ष की समान तिमाही में कंपनी घाटे में थी। बेहतर ऑर्डर फ्लो और सरकारी कैपेक्स से कंपनी को आगे भी फायदा मिल सकता है।
2. L&T: EPC और भारी इंजीनियरिंग में मजबूत पकड़
Larsen & Toubro (L&T) भारत की सबसे बड़ी इंजीनियरिंग और EPC कंपनियों में शामिल है। कंपनी न्यूक्लियर सेक्टर के लिए कई महत्वपूर्ण उपकरण तैयार करती है, जिनमें शामिल हैं—
- रिएक्टर प्रेशर वेसल
- स्टीम जनरेटर
- हैवी इंजीनियरिंग इक्विपमेंट
इसके अलावा कंपनी न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट्स के निर्माण और इंस्टॉलेशन में भी अहम भूमिका निभाती है। FY26 के अंत तक L&T की ऑर्डर बुक रिकॉर्ड ₹7.40 लाख करोड़ पर पहुंच चुकी थी, जो भविष्य के मजबूत बिजनेस विजिबिलिटी का संकेत देती है।
3. MTAR Technologies: हाई-प्रिसिजन इंजीनियरिंग की विशेषज्ञ
MTAR Technologies हाई-प्रिसिजन इंजीनियरिंग उत्पादों के निर्माण में विशेषज्ञ मानी जाती है। कंपनी न्यूक्लियर रिएक्टरों में इस्तेमाल होने वाले महत्वपूर्ण और विशेष कंपोनेंट्स की सप्लाई करती है।
FY26 के दौरान कंपनी का प्रदर्शन मजबूत रहा—
- रेवेन्यू: ₹876.21 करोड़ (29.62% की वृद्धि)
- शुद्ध मुनाफा: ₹94.03 करोड़ (77.8% की बढ़ोतरी)
यदि भारत में SMR परियोजनाओं की संख्या बढ़ती है, तो MTAR जैसी कंपनियों को लंबे समय में नए ऑर्डर मिलने की संभावना बन सकती है।
4. HCC: न्यूक्लियर प्लांट निर्माण का अनुभव
Hindustan Construction Company (HCC) देश की प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों में शामिल है। कंपनी को न्यूक्लियर पावर प्लांट्स के निर्माण का लंबा अनुभव है।
HCC की विशेषज्ञता में शामिल हैं—
- रिएक्टर बिल्डिंग
- कंटेनमेंट स्ट्रक्चर
- सिविल इंजीनियरिंग कार्य
- बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स
FY26 के अंत तक कंपनी की ऑर्डर बुक ₹12,971 करोड़ रही। यदि आने वाले वर्षों में नए SMR प्रोजेक्ट्स शुरू होते हैं, तो HCC को निर्माण कार्यों में अवसर मिल सकते हैं।
5. Kirloskar Brothers: न्यूक्लियर ग्रेड पंप की सप्लायर
Kirloskar Brothers Limited (KBL) विशेष प्रकार के न्यूक्लियर ग्रेड पंप तैयार करती है। ये पंप किसी भी परमाणु रिएक्टर के सुरक्षित संचालन के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
कंपनी के प्रमुख वित्तीय आंकड़े—
- FY26 रेवेन्यू: ₹4,538 करोड़
- ऑर्डर बुक: ₹3,948.8 करोड़
कंपनी प्रबंधन को FY27 में डबल डिजिट रेवेन्यू ग्रोथ की उम्मीद है। यदि न्यूक्लियर प्रोजेक्ट्स की गति तेज होती है, तो विशेष पंपों की मांग भी बढ़ सकती है।
निवेशकों के लिए क्या है रणनीति?
भारत का न्यूक्लियर विस्तार कार्यक्रम लंबी अवधि की थीम है। SMR परियोजनाओं का वास्तविक असर कंपनियों के ऑर्डर, राजस्व और मुनाफे में धीरे-धीरे दिखाई देगा। इसलिए केवल इस थीम के आधार पर किसी शेयर में जल्दबाजी में निवेश करना उचित नहीं माना जाता।
निवेश से पहले इन बातों का मूल्यांकन जरूर करें—
- कंपनी की ऑर्डर बुक
- वित्तीय स्थिति और कर्ज
- वैल्यूएशन
- न्यूक्लियर प्रोजेक्ट्स में वास्तविक भागीदारी
- भविष्य के ऑर्डर मिलने की संभावना
यदि आपका निवेश नजरिया लंबी अवधि का है, तो इन कंपनियों को वॉचलिस्ट में शामिल कर उनके कारोबार और सरकारी परियोजनाओं की प्रगति पर नजर रखी जा सकती है।
Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार या प्रमाणित निवेश विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें। NewsJagran किसी भी शेयर में निवेश की सलाह नहीं देता।


