Nifty Outlook: भारतीय शेयर बाजार के लिए पिछला सप्ताह बेहद उतार-चढ़ाव भरा रहा। निफ्टी लगातार पांच कारोबारी सत्रों तक गिरावट के साथ बंद हुआ और निवेशकों की चिंता बढ़ गई। हालांकि शुक्रवार को दिन के निचले स्तर से 200 अंकों से ज्यादा की रिकवरी देखने को मिली, जिससे संकेत मिला कि निचले स्तरों पर खरीदारी अभी भी बनी हुई है। अब सभी की नजर सोमवार, 27 जुलाई से शुरू होने वाले नए कारोबारी सप्ताह पर है। सवाल यही है कि क्या निफ्टी में फिर से तेजी लौटेगी या गिरावट का सिलसिला जारी रहेगा? आइए जानते हैं एक्सपर्ट्स की राय और महत्वपूर्ण सपोर्ट-रेजिस्टेंस लेवल।
लगातार पांचवें दिन गिरा निफ्टी
शुक्रवार को कारोबार के दौरान निफ्टी में शुरुआती दबाव देखने को मिला। हालांकि बाद में खरीदारी लौटी और इंडेक्स ने निचले स्तर से अच्छी रिकवरी की, लेकिन आखिरकार यह 102 अंक की गिरावट के साथ 23,767 पर बंद हुआ।
यह निफ्टी का 12 जून 2026 के बाद सबसे निचला क्लोजिंग स्तर रहा। पूरे सप्ताह के दौरान निफ्टी में करीब 2.3% की गिरावट दर्ज की गई और खास बात यह रही कि सप्ताह के सभी पांच कारोबारी सत्र लाल निशान में समाप्त हुए।
इन शेयरों में रही सबसे ज्यादा हलचल
शुक्रवार के कारोबार में आईटी शेयरों ने बाजार को कुछ सहारा दिया।
सबसे ज्यादा चढ़ने वाले शेयर
- HCLTech
- Cipla
- Wipro
सबसे ज्यादा गिरने वाले शेयर
- Eternal
- Mahindra & Mahindra
- Bajaj Finance
सेक्टरवार प्रदर्शन
सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन सेक्टरों का प्रदर्शन मिला-जुला रहा।
खरीदारी देखने को मिली
- आईटी
- मीडिया
- PSU बैंक
दबाव में रहे सेक्टर
- ऑटो
- मेटल
- रियल्टी
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर भी दबाव में
हालांकि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी निचले स्तरों से रिकवरी देखने को मिली, लेकिन अंत में दोनों इंडेक्स लाल निशान में बंद हुए।
- Nifty Midcap 100: 0.10% की गिरावट
- Nifty Smallcap 100: 0.32% की गिरावट
इससे साफ है कि बाजार में व्यापक स्तर पर कमजोरी बनी हुई है।
बाजार पर दबाव की बड़ी वजहें
विश्लेषकों के अनुसार फिलहाल कई वैश्विक और घरेलू कारण बाजार पर दबाव बना रहे हैं।
मुख्य वजहें हैं—
- पश्चिम एशिया में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव
- ब्रेंट क्रूड ऑयल की ऊंची कीमतें
- रुपये में कमजोरी
- विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली
- वैश्विक बाजारों में बढ़ी अनिश्चितता
इन सभी कारणों ने निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को प्रभावित किया है।
अगले सप्ताह किन बातों पर रहेगी नजर?
नए सप्ताह में निवेशकों की नजर जून तिमाही (Q1 FY27) के कॉरपोरेट नतीजों पर रहेगी।
इन कंपनियों के परिणाम बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं—
- IDFC First Bank
- Zen Technologies
- Birla Corporation
- AU Small Finance Bank
यदि इन कंपनियों के नतीजे उम्मीद से बेहतर आते हैं तो बाजार में सकारात्मक माहौल बन सकता है।
एक्सपर्ट्स की राय: 23,600 सबसे मजबूत सपोर्ट
HDFC Securities के नागराज शेट्टी
नागराज शेट्टी का कहना है कि 23,600 का स्तर निफ्टी के लिए बेहद मजबूत सपोर्ट है। यदि यह स्तर बना रहता है तो अगले सप्ताह निफ्टी 24,200 तक की रिकवरी दिखा सकता है।
Centrum Finverse के नीलेश जैन
नीलेश जैन के अनुसार यदि निफ्टी 23,600 के ऊपर टिकता है तो पहले 24,000 और उसके बाद 24,200 तक तेजी देखने को मिल सकती है।
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि 23,850 के आसपास बाजार को पहली बड़ी रुकावट का सामना करना पड़ सकता है।
सपोर्ट टूटा तो बढ़ सकती है बिकवाली
HDFC Securities के नंदीश शाह
नंदीश शाह का मानना है कि यदि निफ्टी 23,606 के नीचे फिसलता है, तो गिरावट 23,500 और उसके बाद 23,070 तक बढ़ सकती है।
वहीं ऊपर की ओर 24,000 फिलहाल सबसे बड़ा रेजिस्टेंस बना हुआ है।
LKP Securities के रुपक डे
रुपक डे के अनुसार निफ्टी अब 50-Day Exponential Moving Average (EMA) के नीचे आ चुका है, जो शॉर्ट टर्म कमजोरी का संकेत माना जाता है।
उन्होंने कहा कि—
- 23,600 के नीचे जाने पर बिकवाली तेज हो सकती है।
- तेजी की वापसी के लिए 24,000 के ऊपर क्लोजिंग बेहद जरूरी होगी।
सोमवार के लिए अहम लेवल
| स्तर | महत्व |
|---|---|
| 23,600 | सबसे मजबूत सपोर्ट |
| 23,500 | अगला सपोर्ट |
| 23,070 | बड़ा डाउनसाइड टारगेट |
| 23,850 | पहली रेजिस्टेंस |
| 24,000 | मजबूत रेजिस्टेंस |
| 24,200 | तेजी का संभावित लक्ष्य |
निष्कर्ष
लगातार पांच दिनों की गिरावट के बाद निफ्टी एक बेहद महत्वपूर्ण सपोर्ट जोन पर पहुंच चुका है। एक्सपर्ट्स की राय में 23,600 का स्तर आने वाले सप्ताह की दिशा तय करेगा। यदि यह स्तर कायम रहता है तो बाजार में शॉर्ट कवरिंग और खरीदारी के दम पर 24,000–24,200 तक तेजी देखने को मिल सकती है। वहीं इस स्तर के नीचे फिसलने पर बिकवाली और तेज होने की आशंका बनी रहेगी। ऐसे में निवेशकों को अगले सप्ताह वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल की कीमतों, FII गतिविधियों और कॉरपोरेट नतीजों पर खास नजर रखनी चाहिए।
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