नई दिल्ली: अमेरिका से महज 10 दिन पहले अपने परिवार के साथ समय बिताने के लिए भारत लौटे 20 वर्षीय छात्र यशवेंद्र सिंह की दिल्ली में एक दर्दनाक सड़क हादसे में मौत हो गई। बिजनेस की पढ़ाई कर रहे यशवेंद्र की कार कथित तौर पर जलभराव के बीच एक खुले नाले में जा गिरी। कार का दरवाजा और सीट बेल्ट समय पर नहीं खुल पाने के कारण वह ड्राइविंग सीट पर ही फंस गए और पानी में दम घुटने से उनकी मौत हो गई। उनके साथ मौजूद युवती को स्थानीय लोगों ने अपनी जान जोखिम में डालकर सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
यह हादसा शनिवार 25 जुलाई की सुबह हुआ, जिसने एक खुशहाल परिवार की खुशियों को पल भर में मातम में बदल दिया। परिजनों ने इस घटना के लिए प्रशासनिक लापरवाही को जिम्मेदार ठहराते हुए निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
जलभराव के बीच खुले नाले में गिरी कार
जानकारी के अनुसार, शनिवार सुबह करीब 6 बजे स्थानीय लोगों ने कार को खुले नाले में गिरा हुआ देखा। मौके पर मौजूद लोगों ने तुरंत बचाव अभियान शुरू किया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, यशवेंद्र के दोस्त लगातार मदद की गुहार लगाते रहे, लेकिन जब तक राहत दल और पुलिस मौके पर पहुंची, तब तक काफी देर हो चुकी थी।
स्थानीय आरडब्ल्यूए (RWA) अध्यक्ष प्रदीप ने बताया कि यशवेंद्र ड्राइविंग सीट पर फंसे हुए थे और उनकी सीट बेल्ट नहीं खुल पा रही थी। काफी मशक्कत के बाद उन्हें कार से बाहर निकाला गया और अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
स्थानीय लोगों ने बचाई युवती की जान
हादसे के समय कार में यशवेंद्र के साथ एक युवती भी मौजूद थी। स्थानीय लोगों ने बिना अपनी जान की परवाह किए नाले में उतरकर उसे सुरक्षित बाहर निकाल लिया। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि यदि स्थानीय लोग तुरंत मदद के लिए आगे नहीं आते, तो यह हादसा और भी भयावह हो सकता था।
कौन थे यशवेंद्र सिंह?
यशवेंद्र सिंह अमेरिका के ब्लूमिंगटन, इंडियाना स्थित एक विश्वविद्यालय में बिजनेस की पढ़ाई कर रहे थे। वर्ष 2024 में उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका जाने से पहले उन्होंने दिल्ली के चाणक्यपुरी स्थित एक प्रतिष्ठित स्कूल से अपनी पढ़ाई पूरी की थी।
पढ़ाई के साथ-साथ यशवेंद्र खेलों में भी बेहद प्रतिभाशाली थे। वह राष्ट्रीय स्तर के बास्केटबॉल खिलाड़ी रह चुके थे और स्वर्ण पदक भी जीत चुके थे। उनके दोस्त उन्हें मिलनसार, मेहनती और हमेशा सकारात्मक सोच रखने वाला युवा बताते हैं।
सैन्य परिवार से रखते थे संबंध
यशवेंद्र के पिता भारतीय सेना में ब्रिगेडियर हैं और वर्तमान में कोलकाता में तैनात हैं। उनका बड़ा भाई भी अमेरिका में कार्यरत है। उनकी मां पिछले करीब एक महीने से दिल्ली में अपने पिता की देखभाल कर रही थीं, जो कैंसर का इलाज करा रहे हैं।
परिवार पहले से ही कठिन परिस्थितियों का सामना कर रहा था और इसी बीच यह हादसा उनके लिए एक गहरे सदमे की तरह सामने आया। रिश्तेदारों के अनुसार, यशवेंद्र सिर्फ परिवार के साथ कुछ दिन बिताने के लिए भारत लौटे थे।
परिवार ने लगाया लापरवाही का आरोप
यशवेंद्र के परिजनों का कहना है कि यह सिर्फ एक सड़क हादसा नहीं, बल्कि शहर की बदहाल नागरिक सुविधाओं और प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा है। उनका आरोप है कि खुले नाले और जलभराव जैसी समस्याओं के कारण पहले भी कई लोगों की जान जा चुकी है, लेकिन जिम्मेदार एजेंसियों ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
परिवार के एक करीबी सदस्य ने कहा कि इस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यह पता लगाया जाना चाहिए कि आखिर खुले नाले को सुरक्षित क्यों नहीं किया गया था और समय पर पर्याप्त बचाव व्यवस्था क्यों उपलब्ध नहीं थी।
दोस्तों और रिश्तेदारों में शोक की लहर
यशवेंद्र के रिश्तेदारों के अनुसार, वह इस बार भारत आकर अपने परिवार और दोस्तों के साथ यादगार समय बिताना चाहते थे। लेकिन यह यात्रा उनके जीवन की आखिरी यात्रा बन गई। उनके दादा उत्तराखंड के देहरादून में रहते हैं, जबकि परिवार मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर का निवासी है।
अंतिम संस्कार की तैयारियों के बीच परिवार, दोस्त और रिश्तेदार इस बात पर दुख जता रहे हैं कि यदि समय रहते बेहतर बचाव व्यवस्था होती, तो शायद यशवेंद्र की जान बचाई जा सकती थी।
पुलिस क्या बोली?
पुलिस के अनुसार, यशवेंद्र पिछली रात अपने एक दोस्त के घर रुके थे और शनिवार सुबह उसी के घर जा रहे थे। इसी दौरान उनकी कार जलभराव वाले इलाके में खुले नाले में गिर गई। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और हादसे के सभी पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।
प्रशासन पर उठे बड़े सवाल
इस हादसे के बाद दिल्ली में जलभराव, खुले नालों और शहरी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि बरसात के दौरान ऐसे स्थानों की उचित बैरिकेडिंग, चेतावनी संकेत और नियमित निगरानी की व्यवस्था होना बेहद जरूरी है, ताकि भविष्य में इस तरह की दुखद घटनाओं को रोका जा सके।


