नई दिल्ली: 37 दिनों तक जंतर-मंतर पर चले विरोध प्रदर्शन को समाप्त करने के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने अपने अगले कदम को लेकर तस्वीर साफ कर दी है। संगठन ने फिलहाल चुनावी राजनीति में उतरने की बजाय खुद को युवाओं के आंदोलन के रूप में आगे बढ़ाने का फैसला किया है। सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि संगठन का वर्तमान लक्ष्य चुनाव लड़ना नहीं, बल्कि देशभर में युवाओं तक पहुंच बनाना और जमीनी स्तर पर मजबूत नेटवर्क तैयार करना है।
नीट-यूजी 2026 पेपर लीक के आरोपों और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर शुरू हुआ यह आंदोलन पिछले एक महीने से अधिक समय तक राष्ट्रीय चर्चा का विषय बना रहा। आंदोलन समाप्त होने के बाद अब सभी की नजर इस बात पर थी कि क्या सीजेपी राजनीतिक पार्टी के रूप में चुनावी मैदान में उतरेगी। हालांकि संगठन ने फिलहाल इस संभावना को टालते हुए अपने फोकस को सामाजिक और युवा आंदोलन पर केंद्रित रखने की बात कही है।
देशभर में अभियान चलाएगी CJP
मीडिया से बातचीत में सौरव दास ने कहा कि संगठन अब देश के अलग-अलग राज्यों, शहरों और गांवों का दौरा करेगा। उनका कहना है कि हाल के आंदोलन के दौरान यह महसूस हुआ कि बड़ी संख्या में युवाओं के पास अपनी समस्याएं और मांगें रखने के लिए कोई प्रभावी मंच नहीं है।
उन्होंने कहा कि संगठन सीधे युवाओं से बातचीत करेगा, उनकी समस्याओं को सुनेगा और उन्हें एक साझा मंच उपलब्ध कराने का प्रयास करेगा। उनके मुताबिक, पिछले कुछ सप्ताह के अनुभव ने यह स्पष्ट किया है कि युवाओं और सरकार के बीच संवाद की बड़ी कमी है, जिसे दूर करने की जरूरत है।
चुनाव नहीं, पहले संगठन विस्तार पर जोर
सीजेपी के भविष्य को लेकर लगातार अटकलें लगाई जा रही थीं कि संगठन जल्द ही राजनीतिक दल के रूप में चुनाव लड़ सकता है। लेकिन सौरव दास ने स्पष्ट किया कि फिलहाल ऐसी कोई घोषणा नहीं की गई है।
उन्होंने कहा कि संगठन पहले देशभर में अपनी मजबूत उपस्थिति बनाना चाहता है। उनका मानना है कि किसी भी बड़े राजनीतिक फैसले से पहले जमीनी स्तर पर लोगों के बीच विश्वास और नेटवर्क तैयार करना जरूरी है। इसी वजह से आने वाले महीनों में संगठन का पूरा ध्यान विस्तार अभियान पर रहेगा।
युवाओं के मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने की तैयारी
सौरव दास के अनुसार, आंदोलन के दौरान हजारों छात्रों और युवाओं ने संगठन से संपर्क किया। इससे यह संकेत मिला कि शिक्षा, रोजगार और परीक्षा व्यवस्था जैसे मुद्दों पर व्यापक असंतोष मौजूद है।
उन्होंने कहा कि सीजेपी अब केवल विरोध प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि देशभर में जाकर युवाओं से सीधे संवाद करेगी। संगठन का उद्देश्य उनकी समस्याओं को समझना और उन्हें नीति-निर्माताओं तक पहुंचाना होगा।
37 दिन बाद खत्म हुआ आंदोलन
कॉकरोच जनता पार्टी ने शनिवार को अपना 37 दिनों से चल रहा आंदोलन समाप्त करने की घोषणा की। संगठन का कहना है कि केंद्र सरकार ने उनकी कई मांगों पर विचार करने का भरोसा दिया है।
सीजेपी की प्रमुख मांगों में शामिल थीं—
- नीट परीक्षा से जुड़े मामलों में आत्महत्या करने वाले अभ्यर्थियों के परिवारों को मुआवजा।
- प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेना।
- परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और व्यापक सुधारों पर चर्चा।
- शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही बढ़ाने के लिए ठोस कदम।
इन्हीं आश्वासनों के बाद संगठन ने फिलहाल अपना धरना समाप्त करने का निर्णय लिया।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद खत्म हुआ प्रदर्शन
दिलचस्प बात यह रही कि आंदोलन उसी दिन समाप्त हुआ, जिस दिन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दिया। इसके बाद शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी प्रह्लाद जोशी को सौंपे जाने की खबर सामने आई। इस घटनाक्रम ने आंदोलन को लेकर राजनीतिक चर्चाओं को और तेज कर दिया।
हालांकि सीजेपी ने अपने बयान में जोर दिया कि उसका प्राथमिक उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था में सुधार और युवाओं की आवाज को मजबूत करना है।
संस्थापक अभिजीत दिपके ने समर्थकों का जताया आभार
आंदोलन समाप्त होने के बाद सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर सभी समर्थकों का धन्यवाद किया। उन्होंने इस आंदोलन को “युवाओं की बड़ी जीत” बताया और कहा कि लंबे संघर्ष के बाद अब उन्हें मानसिक राहत महसूस हो रही है।
दिपके ने कहा कि पिछले कई सप्ताह उनके लिए बेहद चुनौतीपूर्ण रहे, लेकिन हजारों युवाओं और समर्थकों ने संगठन का लगातार साथ दिया। उन्होंने यह भी माना कि आलोचना करने वालों ने भी संगठन को अपनी कमियों को समझने और बेहतर बनने का अवसर दिया।
उनके अनुसार, आगे भी संगठन युवाओं के हितों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाता रहेगा और देशभर में संवाद अभियान चलाकर लोगों की आवाज बनने की कोशिश करेगा।
फिलहाल क्या है CJP की रणनीति?
सीजेपी के ताजा बयानों से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि संगठन फिलहाल चुनावी राजनीति में जल्दबाजी नहीं करना चाहता। उसकी रणनीति पहले देशभर में संगठन का विस्तार करने, युवाओं से सीधे जुड़ने और शिक्षा एवं रोजगार जैसे मुद्दों पर मजबूत जनाधार तैयार करने की है।
आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सीजेपी अपने इस सामाजिक आंदोलन को किस तरह राष्ट्रीय स्तर तक ले जाती है और भविष्य में चुनावी राजनीति में प्रवेश का फैसला करती है या नहीं।


