Pralhad Joshi: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद केंद्र सरकार ने प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया है। नई जिम्मेदारी मिलने के बाद प्रह्लाद जोशी ने पहली बार प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह इस दायित्व को कर्तव्य भावना और विनम्रता के साथ स्वीकार करते हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में वह शिक्षा क्षेत्र में अपनी पूरी क्षमता से काम करेंगे।
देशभर में नीट पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली को लेकर छात्रों के विरोध-प्रदर्शनों के बीच शिक्षा मंत्रालय में यह बदलाव हुआ है। ऐसे समय में प्रह्लाद जोशी के सामने शिक्षा व्यवस्था में विश्वास बहाल करना सबसे बड़ी चुनौती माना जा रहा है।
जिम्मेदारी मिलने पर क्या बोले प्रह्लाद जोशी?
नई नियुक्ति के बाद पत्रकारों से बातचीत में प्रह्लाद जोशी ने कहा,
“प्रधानमंत्री ने मुझे एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है। मैं इसे कर्तव्य भावना और विनम्रता के साथ स्वीकार करता हूं। अपनी पूरी क्षमता और ईमानदारी से इस दायित्व का निर्वहन करूंगा।”
उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने कई ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की हैं और शिक्षा क्षेत्र में भी बड़े बदलाव हुए हैं।
धर्मेंद्र प्रधान के काम की खुलकर की सराहना
प्रह्लाद जोशी ने अपने पूर्ववर्ती मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि बीते चार-पांच वर्षों में धर्मेंद्र प्रधान ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) को लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और शिक्षा क्षेत्र में कई सुधारात्मक कदम उठाए।
उन्होंने कहा,
“धर्मेंद्र प्रधान ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति को प्रभावी ढंग से लागू किया है। मैं उनके कार्यों को आगे बढ़ाने का प्रयास करूंगा और प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में अपना सर्वश्रेष्ठ दूंगा।”
धर्मेंद्र प्रधान ने क्यों दिया इस्तीफा?
देशभर में नीट पेपर लीक विवाद और परीक्षा प्रणाली में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज हो रहा था। कई राज्यों से छात्र दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे थे।
इसी बीच धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा देते हुए कहा कि यह उनके लिए व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय नहीं है, लेकिन हाल के दिनों में सामने आई घटनाओं ने उन्हें चिंतित किया है। इसके बाद केंद्र सरकार ने शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार प्रह्लाद जोशी को सौंप दिया।
छात्रों ने नए शिक्षा मंत्री से रखीं तीन बड़ी मांगें
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद आंदोलन कर रहे छात्रों ने इसे अपनी एक बड़ी सफलता बताया। हालांकि उनका कहना है कि केवल मंत्री बदलने से समस्या का समाधान नहीं होगा। उन्होंने नए शिक्षा मंत्री से तीन प्रमुख मांगें रखी हैं।
1. परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता
छात्रों का कहना है कि नीट, जेईई, यूपीएससी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और गड़बड़ियों पर पूरी तरह रोक लगनी चाहिए। परीक्षा प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी बनाई जाए ताकि मेहनत करने वाले छात्रों को नुकसान न उठाना पड़े।
2. सस्ती और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा
प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि बढ़ती शिक्षा लागत ने लाखों परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ा दिया है। उन्होंने मांग की कि उच्च शिक्षा को अधिक किफायती बनाया जाए और सभी छात्रों को समान अवसर मिलें।
3. सरकारी स्कूलों और प्राथमिक शिक्षा को मजबूत बनाया जाए
छात्रों ने सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की पर्याप्त नियुक्ति, बेहतर बुनियादी सुविधाएं, गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई और कौशल विकास कार्यक्रमों को मजबूत करने की मांग की। उनका मानना है कि शिक्षा सुधार की शुरुआत प्राथमिक स्तर से होनी चाहिए।
छात्रों ने क्या कहा?
गाजियाबाद से आए प्रदर्शनकारी राज यादव ने कहा कि सरकार को केवल मंत्री बदलने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि पूरी शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार करना होगा।
दिल्ली की छात्रा सृष्टि ने कहा कि महंगी शिक्षा और पेपर लीक जैसी घटनाएं छात्रों की वर्षों की मेहनत, समय और आर्थिक संसाधनों को बर्बाद कर देती हैं। उन्होंने सरकारी स्कूलों में बेहतर शिक्षकों की नियुक्ति और शिक्षा को अधिक सुलभ बनाने की मांग की।
राजस्थान के विक्रम चौधरी ने कहा कि सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता सुधारने, शिक्षा बजट बढ़ाने और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए सरकारी स्तर पर बेहतर व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए।
उत्तर प्रदेश के बागपत निवासी गौरव तोमर ने प्राथमिक शिक्षा को मजबूत करने, सरकारी स्कूलों में कौशल विकास बढ़ाने और महंगी शिक्षा पर प्रभावी नियंत्रण की मांग दोहराई।
शिक्षा मंत्री बदलना केवल शुरुआत: छात्रों की राय
आंदोलन में शामिल अधिकांश छात्रों का कहना है कि शिक्षा मंत्री का बदलना केवल एक शुरुआत है। वास्तविक बदलाव तब माना जाएगा जब परीक्षा प्रणाली पूरी तरह पारदर्शी बने, पेपर लीक जैसी घटनाओं पर स्थायी रोक लगे, सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता सुधरे और सभी छात्रों को समान एवं सस्ती शिक्षा उपलब्ध हो।
नई जिम्मेदारी संभालने वाले प्रह्लाद जोशी के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती छात्रों का भरोसा जीतने, परीक्षा प्रणाली को अधिक विश्वसनीय बनाने और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ शिक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में ठोस कदम उठाने की होगी।


