China Gold Import: वैश्विक बाजार में सोने की कीमतों में आई हालिया नरमी का सबसे बड़ा फायदा चीन ने उठाया है। दुनिया के सबसे बड़े गोल्ड उपभोक्ता चीन ने जून 2026 में 173 टन से अधिक सोने का आयात किया, जो मार्च 2024 के बाद किसी एक महीने में सबसे अधिक खरीदारी है। वहीं, साल 2026 की पहली छमाही (जनवरी-जून) में चीन कुल 820 टन सोना आयात कर चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि चीन की यह आक्रामक खरीदारी आने वाले महीनों में वैश्विक सोने की कीमतों को मजबूत समर्थन दे सकती है।
जून में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा गोल्ड आयात
चीन के कस्टम्स विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, जून 2026 में देश ने 173 टन से अधिक सोना आयात किया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में आई गिरावट को चीन ने खरीदारी के सुनहरे अवसर के रूप में लिया।
विशेषज्ञों के मुताबिक, केवल आम निवेशक ही नहीं बल्कि चीन के बड़े वाणिज्यिक बैंकों ने भी विदेशों से बड़ी मात्रा में सोना खरीदकर अपने भंडार को मजबूत किया। इससे यह साफ संकेत मिलता है कि चीन लंबी अवधि के निवेश और आर्थिक सुरक्षा के लिए सोने पर लगातार भरोसा जता रहा है।
6 महीने में 820 टन सोने की खरीद
साल 2026 की पहली छमाही में चीन का कुल सोना आयात करीब 820 टन तक पहुंच गया है। यह आंकड़ा पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में लगभग दोगुना माना जा रहा है।
इतिहास पर नजर डालें तो पहली छमाही में यह दूसरा सबसे बड़ा आयात है। इससे पहले 2025 की पहली छमाही में 830 टन सोने का रिकॉर्ड आयात दर्ज किया गया था। मौजूदा रफ्तार को देखते हुए संभावना है कि वर्ष 2026 में चीन नया वार्षिक रिकॉर्ड भी बना सकता है।
Gold ETF में भी बढ़ा निवेश
चीन में केवल भौतिक सोने (Physical Gold) की मांग ही नहीं बढ़ी है, बल्कि Gold-backed Exchange Traded Funds (Gold ETFs) में भी निवेशकों की दिलचस्पी तेजी से बढ़ी है।
अब तक वर्ष 2026 में चीनी गोल्ड ETF में 28 टन का शुद्ध निवेश (Net Inflow) दर्ज किया गया है।
इसका मतलब है कि निवेशक सिर्फ सोने के आभूषण, सिक्के या बिस्किट ही नहीं खरीद रहे, बल्कि वित्तीय निवेश के रूप में भी सोने में बड़ी हिस्सेदारी बना रहे हैं।
आखिर चीन इतनी बड़ी मात्रा में सोना क्यों खरीद रहा है?
चीन की लगातार बढ़ती गोल्ड खरीदारी के पीछे कई अहम कारण हैं।
- अंतरराष्ट्रीय कीमतों में गिरावट का लाभ उठाना।
- वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच सुरक्षित निवेश (Safe Haven) की तलाश।
- विदेशी मुद्रा भंडार के साथ सोने का अनुपात बढ़ाना।
- निवेशकों की मजबूत घरेलू मांग को पूरा करना।
- डॉलर पर निर्भरता कम करने की दीर्घकालिक रणनीति।
यही वजह है कि कीमतों में गिरावट आने पर चीन की खरीदारी और तेज हो जाती है।
वैश्विक गोल्ड मार्केट पर क्या होगा असर?
चीन दुनिया का सबसे बड़ा सोना उपभोक्ता है। ऐसे में उसकी खरीदारी का असर सीधे अंतरराष्ट्रीय बुलियन बाजार पर पड़ता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि चीन की आयात गति इसी तरह बनी रहती है, तो वैश्विक बाजार में सोने की मांग मजबूत बनी रहेगी। इससे अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बड़ी गिरावट की संभावना सीमित हो सकती है और गोल्ड को मजबूत सपोर्ट मिलता रहेगा।
इसके अलावा, यदि अन्य केंद्रीय बैंक और बड़े निवेशक भी इसी तरह सोने की खरीद जारी रखते हैं, तो आने वाले महीनों में सोने की कीमतों में फिर से तेजी देखने को मिल सकती है।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
भारत सहित दुनिया भर के निवेशकों के लिए चीन की यह खरीदारी महत्वपूर्ण संकेत देती है। जब दुनिया का सबसे बड़ा गोल्ड उपभोक्ता लगातार बड़ी मात्रा में सोना खरीद रहा हो, तो यह दर्शाता है कि लंबी अवधि में सोना अभी भी सुरक्षित निवेश विकल्प माना जा रहा है।
हालांकि, निवेशकों को केवल अंतरराष्ट्रीय मांग देखकर फैसला नहीं लेना चाहिए। सोने में निवेश से पहले डॉलर इंडेक्स, ब्याज दरों, केंद्रीय बैंकों की नीतियों और भू-राजनीतिक परिस्थितियों पर भी नजर रखना जरूरी है।
निष्कर्ष
चीन ने जून 2026 में 173 टन से अधिक सोने का आयात कर यह साफ कर दिया है कि उसकी गोल्ड डिमांड अभी भी बेहद मजबूत बनी हुई है। साल के पहले छह महीनों में 820 टन सोने की खरीद और Gold ETF में बढ़ता निवेश इस बात का संकेत है कि चीन भविष्य की आर्थिक अनिश्चितताओं के लिए अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है। यदि यही रुझान जारी रहा, तो 2026 वैश्विक गोल्ड बाजार के लिए एक नया रिकॉर्ड वर्ष साबित हो सकता है।


