Global Funds Investment Shift: वैश्विक निवेशकों का रुझान एशियाई शेयर बाजारों में तेजी से बदलता दिखाई दे रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी कंपनियों के प्रति घटते भरोसे के कारण कई बड़े ग्लोबल फंड्स अब दक्षिण कोरिया और ताइवान के बाजारों से पैसा निकालकर भारत और चीन जैसे बाजारों में निवेश बढ़ा रहे हैं। जुलाई में एशियाई बाजारों के बीच सबसे अधिक विदेशी निवेश भारत में देखने को मिला है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार के प्रति बढ़ते भरोसे का संकेत माना जा रहा है।
AI कंपनियों से घटा भरोसा, निवेशकों ने बदली रणनीति
पिछले एक साल में AI और सेमीकंडक्टर कंपनियों के शेयरों ने शानदार रिटर्न दिए थे, लेकिन अब निवेशकों को इन कंपनियों की भविष्य की कमाई और वैल्यूएशन को लेकर चिंता बढ़ने लगी है। यही वजह है कि बड़े वैश्विक फंड्स अब अधिक संतुलित और डिफेंसिव सेक्टर्स की ओर रुख कर रहे हैं।
फिडेलिटी इंटरनेशनल (Fidelity International) और बीएनपी पारिबा एसेट मैनेजमेंट (BNP Paribas Asset Management) जैसे बड़े एसेट मैनेजर दक्षिण कोरिया की चिप निर्माता कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी घटाकर चीन की इंटरनेट कंपनियों और अन्य आकर्षक वैल्यूएशन वाले शेयरों में निवेश बढ़ा रहे हैं।
इन ग्लोबल फंड्स ने घटाया निवेश
कई अंतरराष्ट्रीय निवेश कंपनियों ने अपनी निवेश रणनीति में बदलाव किया है।
- M&G Investments ने ताइवान के शेयर बाजार में अपना निवेश कम किया है।
- Eastspring Investments ने भारत सहित उन बाजारों में निवेश बढ़ाना शुरू किया है, जहां हाल के महीनों में प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर रहा था लेकिन भविष्य की संभावनाएं बेहतर दिखाई दे रही हैं।
- Fidelity International और BNP Paribas Asset Management ने दक्षिण कोरिया के टेक और चिप सेक्टर में निवेश घटाकर चीन की कंपनियों पर दांव लगाया है।
इस बदलाव का असर पूरे एशियाई बाजारों पर दिखाई दे रहा है।
जुलाई में भारत बना विदेशी निवेशकों की पहली पसंद
जुलाई के दौरान एशियाई बाजारों में सबसे अधिक विदेशी पूंजी भारतीय शेयर बाजार में आई है। यह संकेत देता है कि वैश्विक निवेशक अब केवल AI थीम पर निर्भर रहने के बजाय मजबूत आर्थिक विकास, बेहतर कॉरपोरेट आय और स्थिर नीतियों वाले देशों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
भारत के अलावा इंडोनेशिया का शेयर बाजार भी इस महीने प्रदर्शन के लिहाज से एशिया में सबसे आगे रहा है। वहीं चीन में भी इंटरनेट और बैंकिंग सेक्टर के शेयरों में विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी है।
AI सेक्टर से हटकर डिफेंसिव सेक्टर्स पर फोकस
विशेषज्ञों का मानना है कि AI कंपनियों की कमाई की क्षमता को लेकर बढ़ती अनिश्चितता के कारण निवेशक अब अपेक्षाकृत सुरक्षित सेक्टर्स में अवसर तलाश रहे हैं।
इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- बैंकिंग सेक्टर
- कंज्यूमर गुड्स कंपनियां
- इंटरनेट कंपनियां
- मजबूत बैलेंस शीट वाली वैल्यू स्टॉक्स
यह ट्रेंड दर्शाता है कि ग्लोबल फंड्स अब अधिक संतुलित पोर्टफोलियो बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं।
दक्षिण कोरिया और ताइवान में भारी बिकवाली
जुलाई के दौरान विदेशी निवेशकों ने दक्षिण कोरिया और ताइवान के बाजारों में बड़े पैमाने पर बिकवाली की है।
मुख्य आंकड़े इस प्रकार हैं:
- दक्षिण कोरिया में विदेशी निवेशकों ने 4.4 अरब डॉलर के शेयर बेचे।
- ताइवान में विदेशी निवेशकों ने 19 अरब डॉलर के शेयरों की बिकवाली की।
- दक्षिण कोरिया के शेयरों की कीमतें जुलाई में 21% से अधिक गिर गईं।
- ताइवान का बाजार भी 5% से ज्यादा कमजोर हुआ।
विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले एक वर्ष में इन दोनों बाजारों में AI और सेमीकंडक्टर कंपनियों में अत्यधिक निवेश हुआ था, जिसके बाद अब मुनाफावसूली और पोर्टफोलियो री-बैलेंसिंग देखने को मिल रही है।
फिडेलिटी ने क्या कहा?
फिडेलिटी इंटरनेशनल के पोर्टफोलियो मैनेजर इयान सैमसन के अनुसार, दक्षिण कोरिया और कुछ हद तक ताइवान के बाजारों में अत्यधिक उतार-चढ़ाव के कारण गिरावट पर खरीदारी करना पहले जितना आसान नहीं रह गया है।
उनका कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में आक्रामक निवेश के बजाय सतर्क रणनीति अपनाना अधिक उचित रहेगा, क्योंकि अधिक अस्थिरता पोर्टफोलियो निर्माण को चुनौतीपूर्ण बना रही है।
सिटीग्रुप ने भी घटाया एक्सपोजर
फिडेलिटी की तरह Citigroup ने भी हाल के दिनों में दक्षिण कोरिया के शेयर बाजार में अपनी हिस्सेदारी कम की है। इससे संकेत मिलता है कि यह केवल एक या दो फंड्स का फैसला नहीं बल्कि वैश्विक निवेशकों के व्यापक रुख में बदलाव है।
हांगकांग के बाजार में लौटी तेजी
जहां दक्षिण कोरिया और ताइवान दबाव में हैं, वहीं हांगकांग का प्रमुख सूचकांक हैंगसेंग इंडेक्स जुलाई में अच्छी बढ़त दर्ज कर रहा है। इसमें चीन की इंटरनेट कंपनियों और बैंकिंग शेयरों में आई मजबूती का बड़ा योगदान रहा है।
विल्सन एसेट मैनेजमेंट के हेज फंड मैनेजर मैथ्यू हेप्ट का कहना है कि दक्षिण कोरिया का KOSPI VIX काफी ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है, जिससे लीवरेज लेकर निवेश करने वालों का जोखिम बढ़ गया है। ऐसे माहौल में कई निवेशक फिलहाल अन्य एशियाई बाजारों को अधिक आकर्षक मान रहे हैं।
निवेशकों के लिए इसका क्या मतलब है?
वैश्विक निवेशकों की यह रणनीति बताती है कि अब केवल AI आधारित कंपनियों पर दांव लगाने का दौर धीमा पड़ रहा है। निवेशक ऐसे बाजारों और सेक्टर्स की तलाश कर रहे हैं जहां वैल्यूएशन आकर्षक हो, जोखिम कम हो और दीर्घकालिक विकास की संभावना मजबूत दिखाई दे।
भारत के लिए यह सकारात्मक संकेत है क्योंकि लगातार बढ़ता विदेशी निवेश घरेलू शेयर बाजार की मजबूती, आर्थिक विकास और कॉरपोरेट सेक्टर पर बढ़ते वैश्विक भरोसे को दर्शाता है। हालांकि, निवेशकों को बाजार की अस्थिरता को देखते हुए किसी भी निवेश से पहले अपने वित्तीय लक्ष्य और जोखिम क्षमता का आकलन जरूर करना चाहिए।


