नई दिल्ली: दुनिया में खाद्य सुरक्षा (Food Security) आज सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बन चुकी है। जलवायु परिवर्तन, बढ़ती आबादी और वैश्विक सप्लाई चेन में आने वाली रुकावटों के कारण अधिकांश देश खाने-पीने की आवश्यक वस्तुओं के लिए आयात पर निर्भर हैं। लेकिन इन सबके बीच दक्षिण अमेरिका का एक छोटा-सा देश गुयाना (Guyana) पूरी दुनिया के लिए मिसाल बनकर उभरा है। हाल ही में 186 देशों पर आधारित एक अध्ययन में सामने आया कि गुयाना दुनिया का इकलौता देश है, जो अपनी आबादी की खाद्य जरूरतों को पूरी तरह घरेलू उत्पादन से पूरा करने में सक्षम है।
दिलचस्प बात यह है कि यह वही देश है, जिसे एक दशक पहले तक दुनिया के गरीब देशों में गिना जाता था। आज कृषि में आत्मनिर्भरता के साथ-साथ तेल उत्पादन की बदौलत इसकी अर्थव्यवस्था दुनिया में सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो चुकी है।
खाने-पीने की सभी प्रमुख श्रेणियों में पूरी तरह आत्मनिर्भर
अध्ययन के अनुसार गुयाना सातों प्रमुख खाद्य श्रेणियों में आत्मनिर्भर है। इनमें शामिल हैं—
- फल
- सब्जियां
- मांस
- मछली
- डेयरी उत्पाद
- दालें
- स्टार्च वाले मुख्य खाद्य पदार्थ
इसका मतलब यह है कि देश अपनी पूरी आबादी की पोषण संबंधी जरूरतों को विदेशी खाद्य आयात पर निर्भर हुए बिना पूरा कर सकता है। हालांकि गुयाना अंतरराष्ट्रीय व्यापार करता है और कुछ विशेष खाद्य उत्पाद आयात भी करता है, लेकिन सामान्य खाद्य सुरक्षा के लिए उसे बाहरी देशों पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं पड़ती।
सरकार की नीतियों ने बदल दी तस्वीर
गुयाना की इस उपलब्धि के पीछे सरकार की दीर्घकालिक कृषि नीति को सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है। वर्ष 2020 के बाद सरकार ने कृषि क्षेत्र में निवेश में लगभग 468% की बढ़ोतरी की। इस अतिरिक्त निवेश का उपयोग आधुनिक सिंचाई, बेहतर बीज, कृषि तकनीक और ग्रामीण बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में किया गया।
सरकार का उद्देश्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं था, बल्कि खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना भी था। इसी रणनीति का परिणाम है कि आज गुयाना अपनी जरूरत का अधिकांश भोजन स्वयं पैदा करता है।
उपजाऊ जमीन और अनुकूल जलवायु का मिला फायदा
गुयाना का प्राकृतिक भूगोल भी उसकी सफलता में अहम भूमिका निभाता है। देश के उपजाऊ तटीय मैदान और नदी घाटियां धान, गन्ना और पशुपालन के लिए बेहद अनुकूल मानी जाती हैं।
देश के अंदरूनी हिस्सों में विभिन्न प्रकार की फसलें उगाई जाती हैं, जिससे कृषि उत्पादन में विविधता बनी रहती है। यही कारण है कि खाद्यान्न उत्पादन पूरे साल स्थिर बना रहता है।
छोटी आबादी, बड़ा उत्पादन
गुयाना का कुल क्षेत्रफल लगभग 214,969 वर्ग किलोमीटर है, जबकि इसकी आबादी करीब 8.4 लाख (840,890) है। कम आबादी और पर्याप्त कृषि भूमि के कारण प्रति व्यक्ति खाद्य उपलब्धता काफी अधिक है। इससे देश को खाद्य आत्मनिर्भरता हासिल करने में बड़ी मदद मिली।
तेल की खोज ने बदल दी देश की अर्थव्यवस्था
आज गुयाना की पहचान केवल कृषि तक सीमित नहीं है। वर्ष 2015 में अमेरिकी ऊर्जा कंपनी ExxonMobil ने गुयाना के समुद्री क्षेत्र में विशाल तेल भंडार की खोज की। इसके बाद देश की आर्थिक तस्वीर पूरी तरह बदल गई।
तेल उत्पादन शुरू होने के बाद विदेशी निवेश तेजी से बढ़ा और सरकारी राजस्व में जबरदस्त वृद्धि हुई। विशेषज्ञों का अनुमान है कि तेल से आने वाले वर्षों में गुयाना को हर साल लगभग 10 अरब डॉलर की आय हो सकती है।
दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल
तेल उत्पादन और निवेश के कारण गुयाना की आर्थिक विकास दर लगातार रिकॉर्ड स्तर पर बनी हुई है।
हाल के वर्षों की अनुमानित और दर्ज GDP वृद्धि दर इस प्रकार रही है—
| वर्ष | GDP ग्रोथ रेट |
|---|---|
| 2023 | 33.8% |
| 2024 | 43.8% |
| 2026 (अनुमान) | 16.2% |
इतनी तेज आर्थिक वृद्धि के कारण गुयाना दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में गिना जा रहा है।
2040 तक अरबों डॉलर की कमाई की उम्मीद
विशेषज्ञों का अनुमान है कि वर्ष 2040 तक गुयाना के तेल क्षेत्र से देश के सरकारी खजाने में करीब 157 अरब डॉलर का राजस्व आ सकता है। माना जा रहा है कि यदि उत्पादन इसी गति से बढ़ता रहा तो आने वाले वर्षों में प्रति व्यक्ति कच्चे तेल के उत्पादन के मामले में गुयाना कुवैत जैसे बड़े तेल उत्पादक देशों को भी पीछे छोड़ सकता है।
भारत के लिए क्या सीख?
गुयाना का उदाहरण बताता है कि यदि कृषि क्षेत्र में समय पर निवेश, आधुनिक तकनीक और दीर्घकालिक नीति अपनाई जाए तो खाद्य आत्मनिर्भरता हासिल की जा सकती है। भारत पहले से ही दुनिया के सबसे बड़े कृषि उत्पादक देशों में शामिल है, लेकिन भंडारण, आपूर्ति श्रृंखला, प्रसंस्करण और आधुनिक कृषि तकनीकों में सुधार करके खाद्य सुरक्षा को और मजबूत किया जा सकता है।
निष्कर्ष
गुयाना ने बेहद कम समय में दो बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं। एक ओर वह दुनिया का इकलौता ऐसा देश बन गया है जो अपनी खाद्य जरूरतों को पूरी तरह घरेलू उत्पादन से पूरा कर सकता है, वहीं दूसरी ओर तेल के विशाल भंडार ने उसकी अर्थव्यवस्था को अभूतपूर्व गति दी है। कभी गरीब देशों की सूची में शामिल रहने वाला यह छोटा-सा राष्ट्र आज कृषि और आर्थिक विकास—दोनों क्षेत्रों में दुनिया के लिए प्रेरणा बन चुका है।


