नई दिल्ली: वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और विदेशी मुद्रा बाजार में बढ़ी अस्थिरता के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने रुपये को स्थिर रखने के लिए बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय बैंक ने मई 2026 के दौरान विदेशी मुद्रा (Forex) बाजार में 6.104 अरब डॉलर की शुद्ध बिक्री की। इससे पहले अप्रैल में भी RBI ने 8.944 अरब डॉलर की शुद्ध बिक्री कर रुपये पर दबाव कम करने की कोशिश की थी।
आरबीआई का कहना है कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है। विदेशी निवेशकों का भरोसा लौट रहा है और देश का विदेशी मुद्रा भंडार भी पर्याप्त स्तर पर है, जिससे जरूरत पड़ने पर केंद्रीय बैंक बाजार में हस्तक्षेप कर सकता है।
रुपये पर दबाव क्यों बढ़ा?
हाल के महीनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कई ऐसे घटनाक्रम हुए हैं जिनका असर भारतीय मुद्रा पर पड़ा। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और डॉलर इंडेक्स में मजबूती के कारण उभरते बाजारों की मुद्राओं पर दबाव देखने को मिला। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए तेल महंगा होने पर डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपये पर दबाव आता है।
ऐसी स्थिति में आरबीआई समय-समय पर डॉलर बेचकर बाजार में विदेशी मुद्रा की उपलब्धता बढ़ाता है ताकि रुपये में अत्यधिक गिरावट न आए।
मई में RBI ने कितने डॉलर खरीदे और बेचे?
आरबीआई की ताजा रिपोर्ट के अनुसार मई महीने में विदेशी मुद्रा बाजार में उसका हस्तक्षेप इस प्रकार रहा—
- कुल डॉलर खरीदे: 22.2 अरब डॉलर
- कुल डॉलर बेचे: 28.3 अरब डॉलर
- शुद्ध डॉलर बिक्री: 6.104 अरब डॉलर
इससे साफ है कि केंद्रीय बैंक ने बाजार में डॉलर की आपूर्ति बढ़ाकर रुपये को समर्थन देने की रणनीति अपनाई।
अप्रैल में भी किया था बड़ा हस्तक्षेप
मई से पहले अप्रैल 2026 में भी RBI ने विदेशी मुद्रा बाजार में 8.944 अरब डॉलर की शुद्ध बिक्री की थी। लगातार दो महीनों तक डॉलर बेचने से यह संकेत मिलता है कि केंद्रीय बैंक रुपये में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को रोकने के लिए सक्रिय रूप से बाजार में हस्तक्षेप कर रहा है।
वायदा बाजार में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची डॉलर बिक्री
मई के अंत तक आरबीआई की फॉरवर्ड (वायदा) डॉलर बिक्री का बकाया आंकड़ा 106.66 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।
यह दर्शाता है कि केंद्रीय बैंक केवल मौजूदा बाजार ही नहीं बल्कि आने वाले महीनों में भी रुपये की स्थिरता बनाए रखने की तैयारी कर रहा है। फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट के जरिए आरबीआई भविष्य में डॉलर की उपलब्धता सुनिश्चित करता है, जिससे विदेशी मुद्रा बाजार में अनिश्चितता कम होती है।
भारतीय अर्थव्यवस्था पर RBI का भरोसा
आरबीआई ने अपनी रिपोर्ट में भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर सकारात्मक तस्वीर पेश की है। केंद्रीय बैंक के अनुसार:
- भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है।
- देश के पास इतना विदेशी मुद्रा भंडार है कि उससे 10 महीने से अधिक के आयात का भुगतान किया जा सकता है।
- वित्त वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में आयात और निर्यात दोनों में अच्छी वृद्धि दर्ज की गई।
- वैश्विक चुनौतियों के बावजूद घरेलू आर्थिक गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं।
महंगाई पर भी रखी जा रही है नजर
आरबीआई ने कहा कि इस वर्ष मानसून कुछ क्षेत्रों में असमान रहा है, जिससे खाद्य महंगाई बढ़ने का जोखिम बना हुआ है। हालांकि सरकार के पास पर्याप्त खाद्यान्न भंडार उपलब्ध है, जिससे जरूरत पड़ने पर बाजार में आपूर्ति बढ़ाकर कीमतों को नियंत्रित किया जा सकता है।
यानी फिलहाल खाद्य महंगाई को लेकर स्थिति नियंत्रण में रहने की उम्मीद जताई गई है।
विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ा
केंद्रीय बैंक के अनुसार पिछले कुछ महीनों में भारत में विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) का प्रवाह फिर से मजबूत हुआ है। यह इस बात का संकेत है कि वैश्विक निवेशक भारतीय अर्थव्यवस्था की दीर्घकालिक विकास क्षमता पर भरोसा जता रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत आर्थिक वृद्धि, नियंत्रित महंगाई और बेहतर वित्तीय स्थिरता भारत को अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में अधिक आकर्षक निवेश गंतव्य बनाती है।
भारत-यूके व्यापार समझौते से मिलेगी मजबूती
आरबीआई ने यह भी कहा कि भारत और ब्रिटेन के बीच हाल ही में हुए व्यापार समझौते से आने वाले वर्षों में निर्यात, निवेश और व्यापारिक गतिविधियों को नई गति मिलने की उम्मीद है। इससे विदेशी निवेश और डॉलर की आमद बढ़ सकती है, जो रुपये के लिए सकारात्मक साबित होगा।
रुपये पर आगे क्या रहेगा असर?
विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले महीनों में रुपये की चाल कई वैश्विक और घरेलू कारकों पर निर्भर करेगी। इनमें कच्चे तेल की कीमतें, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति, डॉलर इंडेक्स, विदेशी निवेश का प्रवाह और भू-राजनीतिक घटनाक्रम प्रमुख रहेंगे।
यदि वैश्विक परिस्थितियां सामान्य रहती हैं और विदेशी निवेश जारी रहता है, तो रुपये पर दबाव कम हो सकता है। वहीं, जरूरत पड़ने पर आरबीआई के पास बाजार में हस्तक्षेप करने के लिए पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार उपलब्ध है।
निष्कर्ष
मई 2026 में 6.104 अरब डॉलर की शुद्ध बिक्री यह दिखाती है कि भारतीय रिजर्व बैंक रुपये की स्थिरता बनाए रखने के लिए पूरी तरह सक्रिय है। रिकॉर्ड स्तर की फॉरवर्ड डॉलर बिक्री, मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार और विदेशी निवेशकों का बढ़ता भरोसा इस बात का संकेत है कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत स्थिति में बनी हुई है।


