US Iran War Latest Update: अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध अब और भी खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। शुक्रवार को अमेरिकी सेना ने करीब 6 घंटे तक लगातार हवाई और समुद्री हमले कर ईरान के कई रणनीतिक ठिकानों, बंदरगाहों, पुलों और सैन्य लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को निशाना बनाया। जवाब में ईरान ने भी खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका के सहयोगी देशों कतर और कुवैत की ओर मिसाइलें दागीं। लगातार बढ़ते सैन्य संघर्ष से पूरे मध्य-पूर्व में तनाव चरम पर पहुंच गया है और वैश्विक तेल बाजार में भी उथल-पुथल मची हुई है।
6 घंटे तक चला अमेरिकी हमला
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार शुक्रवार दोपहर 3 बजे से रात 9:30 बजे (ET) तक ईरान के खिलाफ बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान चलाया गया। इस दौरान लड़ाकू विमान, ड्रोन और युद्धपोतों ने ईरान के कई महत्वपूर्ण सैन्य और रणनीतिक ठिकानों पर बमबारी की।
हमलों में जिन ठिकानों को निशाना बनाया गया, उनमें शामिल हैं—
- सैन्य सर्विलांस सेंटर
- भूमिगत हथियार डिपो
- सैन्य लॉजिस्टिक्स नेटवर्क
- समुद्री सुरक्षा ढांचा
- रणनीतिक पुल और परिवहन नेटवर्क
रिपोर्ट के मुताबिक यह लगातार सातवीं रात थी जब अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ बड़े स्तर पर ऑपरेशन चलाया।
ट्रंप के निर्देश पर ‘नेवल ब्लॉकेड’
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर अमेरिकी नौसेना ने ईरानी बंदरगाहों की नेवल ब्लॉकेड (Naval Blockade) तेज कर दी है। इसका उद्देश्य ईरान की समुद्री आपूर्ति और सैन्य गतिविधियों को रोकना बताया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह रणनीति ईरान की आर्थिक और सैन्य क्षमता को कमजोर करने की कोशिश का हिस्सा है।
ईरान का जवाब, कतर और कुवैत पर मिसाइलें
अमेरिकी हमलों के तुरंत बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए कतर और कुवैत की दिशा में मिसाइलें दागीं। दोनों देश अमेरिका के करीबी सहयोगी माने जाते हैं।
कुवैती अधिकारियों के अनुसार, मिसाइल हमले में देश के एक बड़े डिसैलिनेशन (Desalination) प्लांट को गंभीर नुकसान पहुंचा है। यह संयंत्र समुद्र के खारे पानी को पीने योग्य बनाने का काम करता है।
हालांकि कतर और कुवैत ने सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखते हुए नुकसान का आकलन शुरू कर दिया है।
चाबहार पोर्ट और रणनीतिक पुल बने निशाना
अमेरिका ने इस बार ईरान के आर्थिक और परिवहन नेटवर्क को बड़ा झटका देने की कोशिश की।
हमले में—
- चाबहार पोर्ट पर स्थित एक प्रमुख टावर तबाह हो गया।
- दक्षिणी होर्मोजगान प्रांत के बंदर खमीर के पास बने कई रणनीतिक पुल ध्वस्त कर दिए गए।
- इन पुलों के टूटने से बंदर अब्बास बंदरगाह का राजधानी तेहरान और देश के अन्य हिस्सों से संपर्क प्रभावित होने की आशंका है।
अमेरिका का दावा है कि चाबहार पोर्ट के जिस टावर को निशाना बनाया गया, उसका इस्तेमाल इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) समुद्री निगरानी और सैन्य गतिविधियों के लिए कर रही थी।
बिजली नेटवर्क को भी भारी नुकसान
युद्ध शुरू होने के बाद पहली बार ईरान ने स्वीकार किया है कि उसके पावर ग्रिड (बिजली नेटवर्क) को गंभीर नुकसान पहुंचा है।
सरकारी अधिकारियों के मुताबिक दक्षिणी प्रांतों में बड़े पैमाने पर बिजली आपूर्ति बाधित हो सकती है और कई इलाकों में ब्लैकआउट का खतरा बढ़ गया है। बिजली ढांचे को हुए नुकसान से उद्योग, बंदरगाह और परिवहन सेवाओं पर भी असर पड़ने की संभावना है।
दोनों पक्षों को भारी नुकसान
ताजा सैन्य कार्रवाई में दोनों देशों को नुकसान उठाना पड़ा है।
ईरान में नुकसान
- कम से कम 46 लोगों की मौत
- 400 से अधिक लोग घायल
- केवल पुलों पर हुए हमले में 8 लोगों की जान गई
अमेरिका को नुकसान
पेंटागन के अनुसार—
- इस सप्ताह सोमवार से अब तक 13 अमेरिकी सैनिक घायल हुए हैं।
- इनमें 10 थल सेना और 3 नौसेना के जवान शामिल हैं।
- युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक 14 अमेरिकी सैनिकों की मौत हो चुकी है।
- कुल 427 सैनिक घायल बताए गए हैं।
वैश्विक बाजार पर बढ़ा असर
होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बढ़ते संघर्ष ने अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार की चिंता बढ़ा दी है। दुनिया के बड़े हिस्से में तेल आपूर्ति इसी मार्ग से होती है। यदि युद्ध और लंबा खिंचता है या समुद्री व्यापार बाधित होता है तो कच्चे तेल की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। इसका असर भारत समेत कई देशों में पेट्रोल-डीजल और अन्य ईंधनों की कीमतों पर भी पड़ सकता है।
निष्कर्ष
अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध अब केवल सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रह गया है। दोनों पक्ष अब एक-दूसरे के आर्थिक, ऊर्जा और परिवहन ढांचे को निशाना बना रहे हैं। इससे पूरे मध्य-पूर्व में अस्थिरता बढ़ने के साथ-साथ वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी गंभीर प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है।


