Vande Bharat Sleeper Train: देशभर में वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों का इंतजार कर रहे यात्रियों को अभी और इंतजार करना पड़ सकता है। भारत-रूस की साझेदारी वाली Kinet Railway Solutions द्वारा तैयार की जा रही 120 वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों की डिलीवरी में बड़ी देरी होने की खबर सामने आई है। इसकी सबसे बड़ी वजह ट्रेन का अंतिम डिजाइन (Final Design) समय पर मंजूर न होना बताया जा रहा है। अब भारतीय रेलवे इस देरी को कम करने के लिए अपनी फैक्ट्रियों में आधुनिक स्लीपर कोच तैयार कराने की योजना बना रहा है।
डिजाइन फाइनल नहीं होने से अटका पूरा प्रोजेक्ट
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, Kinet Railway Solutions ने वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों के डिजाइन के लिए एक जर्मन कंसल्टेंसी कंपनी को नियुक्त किया था। हालांकि, अब तक कंपनी को अंतिम स्वीकृत डिजाइन नहीं मिल पाया है। इसी कारण ट्रेन के निर्माण का काम तय समयसीमा के अनुसार आगे नहीं बढ़ सका।
अधिकारियों का कहना है कि जब तक अंतिम डिजाइन मंजूर नहीं होता, तब तक बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू करना संभव नहीं है। यही वजह है कि 120 नई स्लीपर ट्रेनों की डिलीवरी अब पहले से काफी देर से होगी।
पहला प्रोटोटाइप अब 2026 के आखिर तक
जानकारी के अनुसार, वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का पहला प्रोटोटाइप अब 2026 के अंत तक तैयार होने की उम्मीद है। यह परियोजना अपनी मूल समयसीमा से दो वर्ष से अधिक पीछे चल रही है।
इस देरी का असर आने वाले वर्षों में रेलवे की नई स्लीपर सेवाओं के विस्तार पर भी पड़ सकता है, क्योंकि कई रूटों पर इन ट्रेनों को शुरू करने की योजना बनाई गई थी।
कंपनी ने क्या कहा?
इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, देरी को लेकर पूछे गए सवाल पर Kinet Railway Solutions ने कहा कि वह अपने सप्लायर्स के साथ हुए व्यावसायिक समझौतों और वित्तीय शर्तों पर सार्वजनिक रूप से टिप्पणी नहीं कर सकती।
हालांकि कंपनी ने यह जरूर बताया कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना में 100 से अधिक सप्लायर्स शामिल हैं और सभी निर्धारित योजना के अनुसार अपने हिस्से का काम कर रहे हैं। कंपनी का दावा है कि वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का इंजीनियरिंग और इंटीग्रेटेड डिजाइन उसने स्वयं तैयार किया है।
अब रेलवे खुद बनाएगा स्लीपर कोच
परियोजना में लगातार हो रही देरी को देखते हुए भारतीय रेलवे अब अपनी उत्पादन इकाइयों और कोच फैक्ट्रियों की मदद लेने की तैयारी कर रहा है। इससे भविष्य में वंदे भारत स्लीपर कोचों का निर्माण तेज करने में मदद मिल सकती है।
रेलवे का उद्देश्य यात्रियों को जल्द से जल्द आधुनिक, आरामदायक और तेज गति वाली स्लीपर ट्रेनें उपलब्ध कराना है।
2023 में निकला था 200 ट्रेनों का टेंडर
साल 2023 में भारतीय रेलवे ने कुल 200 वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों के निर्माण के लिए टेंडर जारी किए थे।
- 120 ट्रेनें बनाने का जिम्मा Kinet Railway Solutions को दिया गया।
- 80 ट्रेनें तैयार करने की जिम्मेदारी टीटागढ़ रेल सॉल्यूशंस और BHEL के संयुक्त उपक्रम को मिली।
इन ट्रेनों के शुरू होने के बाद देशभर में लंबी दूरी की रेल यात्रा को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की खासियत
वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को लंबी दूरी की यात्रा को अधिक आरामदायक और आधुनिक बनाने के उद्देश्य से विकसित किया जा रहा है। इसमें यात्रियों को कई अत्याधुनिक सुविधाएं मिलने की संभावना है, जैसे—
- पूरी तरह वातानुकूलित (AC) स्लीपर कोच
- बेहतर सुरक्षा के लिए कवच तकनीक का समर्थन
- आधुनिक ब्रेकिंग सिस्टम
- कम शोर और अधिक आरामदायक सफर
- बेहतर सीट और बर्थ डिजाइन
- ऊर्जा दक्ष और हाई-स्पीड संचालन
यात्रियों पर क्या पड़ेगा असर?
120 वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों की डिलीवरी में देरी का मतलब है कि जिन नए रेल मार्गों पर इन ट्रेनों के संचालन की योजना थी, वहां यात्रियों को फिलहाल इंतजार करना पड़ेगा। हालांकि, रेलवे द्वारा अपनी फैक्ट्रियों में कोच निर्माण की तैयारी से उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में परियोजना की रफ्तार बढ़ाई जा सकेगी।
निष्कर्ष
वंदे भारत स्लीपर परियोजना भारतीय रेलवे की सबसे महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक है। लेकिन अंतिम डिजाइन को मंजूरी मिलने में हो रही देरी के कारण 120 नई ट्रेनों का निर्माण तय समय से पीछे चला गया है। अब रेलवे अपनी उत्पादन क्षमता का इस्तेमाल कर इस परियोजना को गति देने की दिशा में काम कर रहा है। यदि यह योजना सफल रहती है, तो भविष्य में देश के यात्रियों को आधुनिक और तेज स्लीपर ट्रेन सेवाओं का लाभ जल्द मिल सकता है।


