नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने क्षेत्रीय हवाई संपर्क को नई गति देने के लिए संशोधित उड़ान (UDAN) योजना का नया चरण शुरू करने की तैयारी की है। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत 28,840 करोड़ रुपये के बजट से अगले आठ वर्षों में 100 नए एयरपोर्ट, 200 आधुनिक हेलीपैड और छोटे शहरों के लिए मजबूत एविएशन नेटवर्क विकसित किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य देश के दूर-दराज और कम सेवा वाले क्षेत्रों को हवाई संपर्क से जोड़ना है ताकि आम लोगों के लिए हवाई यात्रा पहले से अधिक सुलभ और किफायती बन सके।
शुक्रवार को जारी सरकारी फैक्टशीट के अनुसार, संशोधित उड़ान योजना भारत के विमानन क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव साबित हो सकती है। इसका फोकस केवल नए एयरपोर्ट बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि छोटे शहरों में एयरलाइन संचालन को आर्थिक रूप से व्यवहार्य बनाना, हेलीकॉप्टर सेवाओं का विस्तार करना और घरेलू विमान निर्माण को बढ़ावा देना भी इसमें शामिल है।
उड़ान योजना ने बदली भारत की विमानन तस्वीर
अक्टूबर 2016 में शुरू की गई क्षेत्रीय संपर्क योजना (RCS-UDAN) का मुख्य उद्देश्य उन शहरों और क्षेत्रों को हवाई नेटवर्क से जोड़ना था, जहां पहले विमान सेवाएं उपलब्ध नहीं थीं या बेहद सीमित थीं।
पिछले एक दशक में इस योजना का असर साफ दिखाई दिया है।
- वर्ष 2014 में देश में केवल 74 परिचालन हवाई अड्डे थे।
- 15 जुलाई 2026 तक यह संख्या बढ़कर 165 हो चुकी है।
- भारत आज घरेलू विमानन बाजार के लिहाज से दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा देश बन चुका है।
सरकार का मानना है कि संशोधित उड़ान योजना इस उपलब्धि को अगले स्तर तक पहुंचाएगी।
100 नए एयरपोर्ट बनाने पर 12,159 करोड़ रुपये खर्च होंगे
नई योजना के तहत सबसे बड़ा निवेश एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर पर किया जाएगा।
सरकार मौजूदा बिना उपयोग वाले एयरस्ट्रिप और कम विकसित हवाई अड्डों को आधुनिक सुविधाओं से लैस कर उन्हें परिचालन योग्य बनाएगी। इसके लिए 12,159 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित किया गया है।
इस पहल से छोटे शहरों, पर्यटन स्थलों और औद्योगिक क्षेत्रों को सीधी हवाई कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है।
200 आधुनिक हेलीपैड भी होंगे तैयार
देश के कई पर्वतीय, सीमावर्ती और दूरस्थ इलाकों में पारंपरिक एयरपोर्ट बनाना आसान नहीं होता। ऐसे क्षेत्रों को ध्यान में रखते हुए सरकार 200 आधुनिक हेलीपैड विकसित करेगी।
इन हेलीपैडों के जरिए कई महत्वपूर्ण सेवाओं को मजबूती मिलेगी, जैसे—
- आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं
- आपदा राहत एवं बचाव अभियान
- सीमावर्ती क्षेत्रों तक तेज पहुंच
- प्रशासनिक एवं आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा
प्रत्येक हेलीपैड पर लगभग 15 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इस परियोजना के लिए कुल 3,661 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं।
छोटे एयरपोर्ट के संचालन के लिए भी मिलेगी आर्थिक मदद
सरकार ने माना है कि छोटे शहरों के एयरपोर्ट केवल निर्माण से सफल नहीं होंगे, बल्कि उनके नियमित संचालन के लिए वित्तीय सहायता भी जरूरी होगी।
इसी कारण संशोधित उड़ान योजना के तहत तीन वर्षों तक ऑपरेशन और मेंटेनेंस (O&M) सहायता दी जाएगी।
इसके तहत—
- प्रत्येक एयरपोर्ट को प्रति वर्ष 3.06 करोड़ रुपये तक सहायता मिलेगी।
- प्रत्येक हेलीपोर्ट या वॉटर एयरड्रोम को 90 लाख रुपये प्रति वर्ष तक सहायता दी जाएगी।
इस मद में कुल 2,577 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे, जिससे लगभग 441 हवाई अड्डों और संबंधित सुविधाओं को लाभ मिलने की संभावना है।
एयरलाइंस को मिलेगा Viability Gap Funding का लाभ
छोटे शहरों में उड़ानें शुरू करना एयरलाइंस के लिए अक्सर आर्थिक रूप से चुनौतीपूर्ण होता है। इसे देखते हुए सरकार Viability Gap Funding (VGF) व्यवस्था जारी रखेगी।
नई योजना के तहत—
- अगले 10 वर्षों में VGF के लिए 10,043 करोड़ रुपये प्रस्तावित किए गए हैं।
- एयरलाइंस को 5 वर्षों तक वित्तीय सहायता मिलेगी।
- तीसरे वर्ष से सहायता धीरे-धीरे कम होती जाएगी।
- किसी रूट पर एक्सक्लूसिव ऑपरेशन का अधिकार केवल 3 वर्ष तक रहेगा।
इस मॉडल का उद्देश्य शुरुआती वर्षों में एयरलाइंस को सहयोग देना और बाद में मार्गों को व्यावसायिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है।
‘आत्मनिर्भर भारत’ को भी मिलेगा बढ़ावा
संशोधित उड़ान योजना केवल कनेक्टिविटी बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका एक महत्वपूर्ण लक्ष्य घरेलू विमानन उद्योग को मजबूत करना भी है।
योजना के तहत प्रस्ताव है कि—
- पवन हंस को HAL ध्रुव हेलीकॉप्टर के दो नए यूनिट दिए जाएं।
- अलायंस एयर को HAL डॉर्नियर विमान के दो नए विमान उपलब्ध कराए जाएं।
ये स्वदेशी विमान कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में संचालन के लिए उपयुक्त माने जाते हैं और भारतीय एयरोस्पेस निर्माण क्षेत्र को भी प्रोत्साहन देंगे।
क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा बड़ा लाभ
विशेषज्ञों का मानना है कि नए एयरपोर्ट और हेलीपैड बनने से केवल यात्रा सुविधाएं ही नहीं बढ़ेंगी, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बड़ा फायदा होगा। पर्यटन, व्यापार, कृषि उत्पादों की तेज ढुलाई, निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। इसके अलावा स्वास्थ्य सेवाओं और आपदा प्रबंधन में भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिल सकता है।
निष्कर्ष
संशोधित उड़ान योजना भारत के क्षेत्रीय विमानन क्षेत्र के लिए एक बड़ा कदम मानी जा रही है। 100 नए एयरपोर्ट, 200 आधुनिक हेलीपैड, 28,840 करोड़ रुपये का निवेश और घरेलू विमानन उद्योग को बढ़ावा जैसे प्रावधान आने वाले वर्षों में देश के एयर कनेक्टिविटी नेटवर्क को नई ऊंचाई दे सकते हैं। यदि योजना तय समय पर लागू होती है, तो देश के कई छोटे शहर पहली बार राष्ट्रीय हवाई नेटवर्क का हिस्सा बन जाएंगे।


