नई दिल्ली: भारत में एक बार फिर फॉर्मूला-1 (Formula 1) रेसिंग की वापसी की उम्मीदें तेज होती नजर आ रही हैं। करीब एक दशक पहले तक दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित मोटरस्पोर्ट इवेंट की मेजबानी कर चुका बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट (Buddh International Circuit) फिर चर्चा में है। इसकी वजह सिर्फ F1 की संभावित वापसी नहीं, बल्कि JP Associates के अधिग्रहण में अदाणी समूह की संभावित भूमिका और केंद्र सरकार की नई रणनीति भी है।
सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार वर्ष 2028 तक भारत में फॉर्मूला-1 रेस की वापसी सुनिश्चित करने के लिए टैक्स और नियामकीय बाधाओं को दूर करने की दिशा में गंभीरता से काम कर रही है। यदि सभी योजनाएं तय समय पर आगे बढ़ती हैं तो एक बार फिर उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा स्थित बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट पर F1 कारों की रफ्तार देखने को मिल सकती है।
Highlights
- 2028 तक भारत में F1 रेस की वापसी का लक्ष्य
- टैक्स और नियामकीय बाधाओं को खत्म करने की तैयारी
- बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट को लेकर सरकार सक्रिय
- JP Associates के अधिग्रहण में अदाणी समूह की संभावित भूमिका
- F1 प्रबंधन ने भी भारत लौटने में दिखाई रुचि
2028 तक F1 की वापसी पर सरकार का फोकस
भारत सरकार ने फॉर्मूला-1 को दोबारा देश में लाने के लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं। जानकारी के मुताबिक, केंद्रीय खेल मंत्रालय इस दिशा में विभिन्न विभागों के साथ मिलकर रोडमैप तैयार कर रहा है।
हाल ही में केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मंडाविया ने मोटरस्पोर्ट से जुड़े प्रतिनिधियों, संभावित ट्रैक ऑपरेटरों और अन्य हितधारकों के साथ बैठक की। इस दौरान भारत में F1 की वापसी के रास्ते में आने वाली चुनौतियों और उनके समाधान पर विस्तृत चर्चा हुई।
सरकार का उद्देश्य केवल रेस आयोजित करना नहीं, बल्कि भारत को अंतरराष्ट्रीय मोटरस्पोर्ट कैलेंडर में स्थायी स्थान दिलाना भी है।
क्यों बंद हो गई थी इंडियन ग्रां प्री?
भारत में पहली बार इंडियन ग्रां प्री का आयोजन वर्ष 2011 में बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट पर हुआ था। इसके बाद 2012 और 2013 में भी रेस आयोजित हुई, लेकिन फिर इसका आयोजन बंद हो गया।
मुख्य कारणों में शामिल थे—
- टैक्स विवाद
- नियामकीय जटिलताएं
- प्रशासनिक बाधाएं
- आयोजन से जुड़ी वित्तीय चुनौतियां
इन्हीं समस्याओं के चलते भारत F1 कैलेंडर से बाहर हो गया था।
टैक्स और नियमों की बाधाएं होंगी दूर
सरकार अब पिछली गलतियों को दोहराना नहीं चाहती। इसलिए एक विशेष टास्क फोर्स गठित करने की तैयारी की जा रही है।
यह टास्क फोर्स निम्नलिखित विषयों पर काम करेगी—
- टैक्स नियमों की समीक्षा
- मोटरस्पोर्ट से जुड़े नियामकीय सुधार
- इंफ्रास्ट्रक्चर को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाना
- विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के बीच बेहतर समन्वय
इस पहल का उद्देश्य भविष्य में किसी भी तरह के प्रशासनिक या कर संबंधी विवाद से बचना है।
JP Associates के अधिग्रहण में अदाणी समूह की भूमिका क्यों अहम?
बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट का स्वामित्व रखने वाली JP Associates लंबे समय से वित्तीय चुनौतियों का सामना कर रही है। कंपनी के अधिग्रहण की प्रक्रिया में अदाणी समूह का नाम प्रमुख दावेदारों में शामिल बताया जा रहा है।
यदि यह अधिग्रहण पूरा होता है, तो सर्किट के रखरखाव, आधुनिकीकरण और अंतरराष्ट्रीय स्तर के आयोजन कराने की संभावनाएं काफी बढ़ सकती हैं।
अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन (APSEZ) के प्रबंध निदेशक करण अदाणी पहले भी सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि वे व्यक्तिगत स्तर पर भारत में फॉर्मूला-1 की वापसी के प्रयासों का समर्थन करते हैं। हालांकि, समूह की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
F1 प्रबंधन भी भारत लौटने का इच्छुक
फॉर्मूला-1 के मुख्य कार्यकारी अधिकारी स्टेफानो डोमेनिकाली ने भी हाल के महीनों में भारत को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं।
उन्होंने कहा कि भारत दुनिया के सबसे बड़े बाजारों में से एक है और F1 प्रबंधन यहां दोबारा रेस आयोजित करने में रुचि रखता है। हालांकि, इसके लिए एक मजबूत स्थानीय प्रमोटर, उपयुक्त व्यावसायिक साझेदारी और सभी आवश्यक सरकारी मंजूरियां जरूरी होंगी।
भारत को क्या होगा फायदा?
यदि 2028 तक भारत में फॉर्मूला-1 की वापसी होती है, तो इससे कई क्षेत्रों को बड़ा लाभ मिल सकता है।
- खेल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
- होटल, ट्रैवल और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर को फायदा होगा।
- विदेशी निवेश और वैश्विक ब्रांडिंग मजबूत होगी।
- मोटरस्पोर्ट इंडस्ट्री में रोजगार के नए अवसर बनेंगे।
- भारत की वैश्विक खेल आयोजनों में पहचान और मजबूत होगी।
क्या 2028 में फिर गूंजेगी F1 इंजन की आवाज?
फिलहाल सरकार की तैयारी, संभावित कॉर्पोरेट निवेश और F1 प्रबंधन की सकारात्मक सोच ने उम्मीदें जरूर बढ़ा दी हैं। हालांकि, अंतिम फैसला टैक्स सुधार, नियामकीय मंजूरियों, प्रमोटर की उपलब्धता और ट्रैक संचालन से जुड़े व्यावसायिक समझौतों पर निर्भर करेगा।
यदि सभी पक्ष समय पर सहमत होते हैं, तो करीब 15 साल बाद बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट पर एक बार फिर दुनिया की सबसे तेज रेसिंग कारों की गर्जना सुनाई दे सकती है।


