Delhi Metro News: दिल्लीवासियों के लिए बड़ी राहत की खबर है। दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने द्वारका सेक्टर-25 स्थित यशोभूमि से राजीव चौक (कनॉट प्लेस) तक करीब 20 किलोमीटर लंबे हाई-स्पीड अंडरग्राउंड मेट्रो कॉरिडोर के लिए डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार कर ली है। इस परियोजना का उद्देश्य पश्चिमी दिल्ली और राजधानी के प्रमुख कारोबारी केंद्र कनॉट प्लेस के बीच यात्रा को तेज, आसान और सुविधाजनक बनाना है। यदि इस परियोजना को मंजूरी मिल जाती है तो यात्रियों का सफर लगभग 25 मिनट में पूरा हो सकेगा।
यशोभूमि से राजीव चौक तक मिलेगा सीधा हाई-स्पीड कनेक्शन
प्रस्तावित कॉरिडोर मौजूदा एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन का विस्तार होगा। इसके जरिए यशोभूमि इंडिया इंटरनेशनल कन्वेंशन एंड एक्सपो सेंटर, द्वारका और दिल्ली के केंद्रीय हिस्सों के बीच सीधी और तेज कनेक्टिविटी स्थापित होगी।
इस समय द्वारका और आसपास के क्षेत्रों से कनॉट प्लेस जाने के लिए यात्रियों को ब्लू लाइन या सड़क मार्ग का सहारा लेना पड़ता है, जिसमें काफी समय लगता है। नया हाई-स्पीड कॉरिडोर इस दूरी को काफी कम कर देगा।
परियोजना की प्रमुख जानकारी
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| परियोजना | यशोभूमि – राजीव चौक हाई-स्पीड मेट्रो कॉरिडोर |
| लंबाई | लगभग 20 किलोमीटर |
| मेट्रो प्रकार | हाई-स्पीड अंडरग्राउंड मेट्रो |
| प्रस्तावित स्टेशन | 5 अंडरग्राउंड स्टेशन |
| शुरुआत | यशोभूमि (द्वारका सेक्टर-25) |
| अंतिम स्टेशन | राजीव चौक (कनॉट प्लेस) |
| एजेंसी | दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) |
| अनुमानित यात्रा समय | करीब 25 मिनट |
पांच नए अंडरग्राउंड स्टेशन होंगे
DMRC की DPR के अनुसार इस नए कॉरिडोर पर पांच रणनीतिक अंडरग्राउंड स्टेशन बनाए जाएंगे। इन स्टेशनों का चयन ऐसे स्थानों पर किया जाएगा जहां घनी आबादी, संस्थान और व्यावसायिक गतिविधियां अधिक हैं, ताकि अधिकतम यात्रियों को इसका लाभ मिल सके।
इससे पश्चिमी दिल्ली के लाखों लोगों के अलावा यशोभूमि में आयोजित होने वाले राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों में आने वाले लोगों को भी तेज परिवहन सुविधा मिलेगी।
ट्रैफिक जाम से मिलेगी राहत
दिल्ली में बढ़ती ट्रैफिक समस्या को देखते हुए यह परियोजना बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। वर्तमान में द्वारका से कनॉट प्लेस तक सड़क मार्ग से यात्रा में पीक आवर्स के दौरान काफी समय लगता है।
नई मेट्रो लाइन शुरू होने के बाद—
- सड़कों पर वाहनों का दबाव कम होगा।
- ब्लू लाइन पर यात्रियों की भीड़ घट सकती है।
- पश्चिमी दिल्ली और सेंट्रल दिल्ली के बीच यात्रा तेज होगी।
- यशोभूमि कन्वेंशन सेंटर तक पहुंचना आसान होगा।
इंजीनियरिंग सर्वे और अलाइनमेंट स्टडी पूरी
DMRC ने परियोजना के लिए शुरुआती इंजीनियरिंग कार्य शुरू कर दिए हैं। अधिकारियों के अनुसार—
- शुरुआती मिट्टी की जांच (Soil Investigation) पूरी हो चुकी है।
- अलाइनमेंट स्टडी भी तैयार कर ली गई है।
- अब फंडिंग और अन्य वैधानिक मंजूरियों की प्रक्रिया जारी है।
यह पूरा कॉरिडोर भूमिगत होगा, इसलिए निर्माण कार्य के दौरान आधुनिक टनल बोरिंग मशीन (TBM) का उपयोग किया जाएगा। इससे सड़क यातायात और दैनिक गतिविधियों पर न्यूनतम प्रभाव पड़ेगा।
रियल एस्टेट सेक्टर को भी मिलेगा बड़ा फायदा
विशेषज्ञों का मानना है कि इस परियोजना का सबसे बड़ा लाभ रियल एस्टेट सेक्टर को भी मिल सकता है।
द्वारका, द्वारका एक्सप्रेसवे और गुरुग्राम से जुड़े क्षेत्रों में पहले से ही आवासीय परियोजनाओं की मांग बढ़ रही है। हाई-स्पीड मेट्रो कॉरिडोर बनने की संभावना से—
- द्वारका में प्रॉपर्टी की मांग बढ़ सकती है।
- द्वारका एक्सप्रेसवे के आसपास नए निवेश बढ़ सकते हैं।
- गुरुग्राम के सीमावर्ती सेक्टरों में भी आवासीय परियोजनाओं को फायदा मिल सकता है।
- कमर्शियल प्रॉपर्टी का आकर्षण भी बढ़ने की उम्मीद है।
NCR की कनेक्टिविटी होगी और मजबूत
यदि परियोजना को अंतिम मंजूरी मिल जाती है तो यह दिल्ली मेट्रो नेटवर्क के सबसे महत्वपूर्ण हाई-स्पीड विस्तारों में शामिल होगी। इससे पश्चिमी दिल्ली, सेंट्रल बिजनेस डिस्ट्रिक्ट और अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर के बीच तेज और निर्बाध कनेक्टिविटी स्थापित होगी।
साथ ही भविष्य में NCR के शहरी विकास, सार्वजनिक परिवहन और आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिलने की संभावना है।
अभी DPR चरण में है परियोजना
फिलहाल यह मेट्रो कॉरिडोर डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) के चरण में है। निर्माण कार्य शुरू होने से पहले परियोजना को वित्तीय, तकनीकी और प्रशासनिक मंजूरियां मिलना आवश्यक है। मंजूरी मिलने के बाद ही निर्माण की समयसीमा और लागत का अंतिम खाका सामने आएगा।


