नई दिल्ली: सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) ने रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (RCom) से जुड़े बहुचर्चित लोन फ्रॉड मामले में जांच को आगे बढ़ाते हुए दूसरी चार्जशीट विशेष अदालत में दाखिल कर दी है। इस चार्जशीट में एक निजी कंपनी और उसके दो निदेशकों को कथित फंड डायवर्जन, आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और आपराधिक गबन के आरोपों में नामजद किया गया है। यह मामला सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और वित्तीय संस्थानों को हजारों करोड़ रुपये के कथित नुकसान से जुड़ा है।
मुंबई की विशेष अदालत में दाखिल हुई दूसरी चार्जशीट
सीबीआई ने मुंबई स्थित विशेष सीबीआई अदालत में नेटिजन इंजीनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड (पूर्व में रिलायंस इन्फोकॉम इंजीनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड) और उसके दो निदेशकों अनिल काल्या तथा टुनू साहू के खिलाफ दूसरी चार्जशीट दायर की है।
जांच एजेंसी का आरोप है कि इस कंपनी का इस्तेमाल रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड द्वारा कथित तौर पर ‘पास-थ्रू एंटिटी’ के रूप में किया गया, जिसके जरिए फंड को दूसरे स्थानों पर डायवर्ट किया गया।
फंड डायवर्जन से बैंकों को हुआ नुकसान
सीबीआई के मुताबिक, जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने योजनाबद्ध तरीके से धन की हेराफेरी (Fund Diversion) की। इससे कर्ज देने वाले सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और वित्तीय संस्थानों को वित्तीय नुकसान हुआ, जबकि संबंधित व्यक्तियों और उनसे जुड़ी संस्थाओं को अनुचित लाभ पहुंचाया गया।
एजेंसी का कहना है कि आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और आपराधिक गबन के आरोप लगाए गए हैं।
SBI की शिकायत पर दर्ज हुआ था मामला
सीबीआई ने बताया कि यह पूरा मामला स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया था।
एफआईआर के अनुसार, इस मामले में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और वित्तीय संस्थानों का कुल 19,694.33 करोड़ रुपये का एक्सपोजर है। जांच एजेंसी का मानना है कि कथित फंड डायवर्जन के कारण बैंकों के हितों को गंभीर नुकसान पहुंचा।
पहली चार्जशीट में 16 आरोपी थे शामिल
इससे पहले 29 मई को सीबीआई ने इस मामले में पहली चार्जशीट दाखिल की थी। उसमें कुल 16 आरोपियों को नामजद किया गया था, जिनमें शामिल थे:
- रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (RCom)
- कंपनी के 5 वरिष्ठ अधिकारी
- 10 बैंक अधिकारी
सीबीआई ने उस समय भी आरोप लगाया था कि ऋण वितरण और उसके उपयोग में गंभीर अनियमितताएं हुई थीं।
जांच अभी भी जारी
सीबीआई ने स्पष्ट किया है कि मामले की जांच अभी समाप्त नहीं हुई है। एजेंसी अन्य संभावित आरोपियों की भूमिका और वित्तीय लेनदेन के विभिन्न पहलुओं की भी जांच कर रही है। जांच के आधार पर आगे और चार्जशीट दाखिल की जा सकती हैं।
अब तक 7 एफआईआर दर्ज
सीबीआई के अनुसार, रिलायंस समूह की विभिन्न कंपनियों के खिलाफ अब तक कुल 7 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। इनमें शामिल हैं:
- रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (RCom)
- रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (RHFL)
- रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (RCFL)
- रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड (RTL)
ये मामले विभिन्न सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) से प्राप्त शिकायतों के आधार पर दर्ज किए गए हैं।
क्या है मामला?
सीबीआई का आरोप है कि कंपनियों द्वारा बैंक ऋण का उपयोग निर्धारित उद्देश्य के बजाय अन्य संस्थाओं तक पहुंचाने के लिए कथित रूप से फंड डायवर्जन किया गया। जांच एजेंसी का कहना है कि इस प्रक्रिया से बैंकों को आर्थिक नुकसान हुआ और संबंधित संस्थाओं को अनुचित वित्तीय लाभ मिला। फिलहाल मामले की जांच जारी है और अदालत में आरोपों की सुनवाई के दौरान तथ्यों की कानूनी जांच होगी।


