डालमिया भारत शुगर ने तंजानिया में 132 मिलियन डॉलर (करीब ₹1100 करोड़) के निवेश से अपना पहला अंतरराष्ट्रीय शुगर प्रोजेक्ट शुरू किया है। जानिए दुबई के अरबपति मोहम्मद अली रशीद अलाब्बार कौन हैं और इस प्रोजेक्ट का पूरा प्लान क्या है।
तंजानिया में डालमिया भारत शुगर का बड़ा दांव
भारत की प्रमुख चीनी कंपनियों में शामिल डालमिया भारत शुगर एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने पहली बार देश के बाहर बड़ा निवेश करने का फैसला किया है। कंपनी ने अफ्रीकी देश तंजानिया में 132 मिलियन डॉलर (करीब 1100 करोड़ रुपये) की लागत से एक इंटीग्रेटेड शुगर प्रोजेक्ट शुरू करने की घोषणा की है। यह कदम कंपनी के वैश्विक विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।
इस परियोजना के जरिए कंपनी केवल चीनी उत्पादन ही नहीं करेगी, बल्कि बड़े पैमाने पर गन्ने की खेती, बिजली उत्पादन और कृषि आधारित औद्योगिक विकास पर भी काम करेगी।
दुबई के अरबपति के साथ साझेदारी
इस प्रोजेक्ट को Eagle Agrotech Tanzania Ltd के माध्यम से विकसित किया जाएगा। यह कंपनी Eagle Agrotech Holdings Ltd की सहायक कंपनी है।
इस संयुक्त उद्यम में—
- 51% हिस्सेदारी डालमिया भारत शुगर की होगी।
- 49% हिस्सेदारी Symphony Global LLC के पास रहेगी।
Symphony Global LLC, दुबई के जाने-माने कारोबारी मोहम्मद अली रशीद अलाब्बार की निवेश कंपनी है।
कौन हैं मोहम्मद अली रशीद अलाब्बार?
मोहम्मद अली रशीद अलाब्बार संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के सबसे चर्चित कारोबारियों में गिने जाते हैं। वे वैश्विक रियल एस्टेट, रिटेल, हॉस्पिटैलिटी और निवेश क्षेत्र में बड़ा नाम हैं।
उनकी प्रमुख पहचान—
- दुबई की कई प्रतिष्ठित रियल एस्टेट परियोजनाओं से जुड़ाव।
- मध्य पूर्व, अफ्रीका और एशिया में बड़े निवेश।
- कृषि, इंफ्रास्ट्रक्चर और औद्योगिक परियोजनाओं में सक्रिय भागीदारी।
- वैश्विक स्तर पर विभिन्न कंपनियों में रणनीतिक निवेश।
अब उन्होंने डालमिया भारत शुगर के साथ मिलकर अफ्रीका के कृषि क्षेत्र में बड़ा निवेश करने का फैसला किया है।
क्या है पूरे प्रोजेक्ट का प्लान?
कंपनी के अनुसार यह केवल चीनी मिल लगाने की परियोजना नहीं होगी, बल्कि एक इंटीग्रेटेड एग्री-बिजनेस मॉडल विकसित किया जाएगा।
1. 10,000 हेक्टेयर में गन्ने की खेती
शुरुआत में करीब 10,000 हेक्टेयर भूमि पर गन्ने की खेती की जाएगी। भविष्य में इसे बढ़ाकर 20,000 हेक्टेयर तक ले जाने की योजना है।
2. आधुनिक चीनी मिल
परियोजना के पहले चरण में सालाना लगभग 70,000 मीट्रिक टन चीनी उत्पादन की क्षमता विकसित की जाएगी।
आने वाले वर्षों में इसे बढ़ाकर 1.5 लाख मीट्रिक टन प्रति वर्ष तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
3. बिजली उत्पादन भी होगा
इस प्रोजेक्ट का एक अहम हिस्सा को-जेनरेशन पावर प्लांट होगा।
- शुरुआती क्षमता: 20 मेगावॉट
- भविष्य का लक्ष्य: 40 मेगावॉट
गन्ने से निकलने वाले बगास (Bagasse) का उपयोग कर बिजली बनाई जाएगी, जिससे परियोजना की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के साथ अतिरिक्त बिजली भी उपलब्ध कराई जा सकेगी।
तंजानिया क्यों चुना गया?
तंजानिया को अफ्रीका के तेजी से विकसित होते कृषि बाजारों में गिना जाता है। यहां—
- कृषि योग्य भूमि की उपलब्धता अधिक है।
- गन्ना उत्पादन की अच्छी संभावनाएं हैं।
- स्थानीय स्तर पर चीनी की मांग लगातार बढ़ रही है।
- सरकार विदेशी निवेश को प्रोत्साहित कर रही है।
इन्हीं कारणों से कंपनी ने इस देश को अपने पहले अंतरराष्ट्रीय शुगर प्रोजेक्ट के लिए चुना है।
डालमिया भारत शुगर को क्या होगा फायदा?
विशेषज्ञों के मुताबिक इस निवेश से कंपनी को कई रणनीतिक लाभ मिल सकते हैं।
- भारत के बाहर पहली मैन्युफैक्चरिंग मौजूदगी।
- अंतरराष्ट्रीय बाजार में मजबूत पहचान।
- कारोबार का भौगोलिक विविधीकरण।
- अफ्रीकी बाजारों तक सीधी पहुंच।
- लंबे समय में निर्यात और राजस्व बढ़ाने की संभावना।
भारत-अफ्रीका व्यापार संबंधों को भी मिलेगा बढ़ावा
भारत और अफ्रीकी देशों के बीच कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में सहयोग लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में डालमिया भारत शुगर का यह निवेश दोनों क्षेत्रों के बीच आर्थिक साझेदारी को और मजबूत करने वाला कदम माना जा रहा है।
निवेशकों के लिए क्यों अहम है यह खबर?
किसी भारतीय चीनी कंपनी का इतने बड़े पैमाने पर विदेश में कृषि और चीनी उत्पादन परियोजना शुरू करना दुर्लभ माना जाता है। यदि यह परियोजना सफल रहती है तो कंपनी के लिए नए बाजार खुल सकते हैं और भविष्य में अफ्रीका के अन्य देशों में भी विस्तार का रास्ता आसान हो सकता है।
निष्कर्ष
डालमिया भारत शुगर का तंजानिया में करीब ₹1100 करोड़ का निवेश केवल एक नई चीनी मिल लगाने तक सीमित नहीं है। यह कंपनी की वैश्विक विस्तार रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसमें गन्ने की खेती, चीनी उत्पादन और बिजली उत्पादन को एकीकृत मॉडल के रूप में विकसित किया जाएगा। दुबई के उद्योगपति मोहम्मद अली रशीद अलाब्बार के साथ साझेदारी इस परियोजना को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक मजबूत बनाती है।


