Income Tax Bill 2026: केंद्र सरकार विदेशी निवेशकों (Foreign Portfolio Investors) को आकर्षित करने के लिए बड़ा कदम उठाने जा रही है। मानसून सत्र में पेश होने वाला Income-tax (Amendment) Bill, 2026 सरकारी बॉन्ड (Government Securities) में निवेश करने वाले विदेशी निवेशकों को ब्याज आय और कैपिटल गेन पर इनकम टैक्स से छूट देने का रास्ता साफ कर सकता है। सरकार का मानना है कि इससे भारत के बॉन्ड बाजार में विदेशी पूंजी का प्रवाह बढ़ेगा और आर्थिक स्थिरता को मजबूती मिलेगी।
Highlights
- विदेशी निवेशकों को सरकारी बॉन्ड पर ब्याज और कैपिटल गेन पर टैक्स छूट मिल सकती है।
- Income-tax (Amendment) Bill, 2026 मानसून सत्र में पेश होगा।
- टैक्स छूट 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी मानी जाएगी।
- सरकार का लक्ष्य विदेशी निवेश बढ़ाकर बॉन्ड बाजार को मजबूत करना है।
- संसद में MSME Development (Amendment) Bill भी पेश किया जाएगा।
क्या है Income-tax (Amendment) Bill, 2026?
केंद्र सरकार मानसून सत्र में Income-tax (Amendment) Bill, 2026 पेश करने की तैयारी कर रही है। यह बिल उस अध्यादेश (Ordinance) की जगह लेगा, जिसे पिछले महीने लागू किया गया था। चूंकि उस समय संसद का सत्र नहीं चल रहा था, इसलिए सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 123 के तहत अध्यादेश जारी किया था।
अब सरकार इस व्यवस्था को स्थायी कानूनी रूप देने के लिए संसद से मंजूरी लेना चाहती है।
विदेशी निवेशकों को क्या मिलेगी राहत?
प्रस्तावित कानून के तहत सरकारी बॉन्ड में निवेश करने वाले विदेशी निवेशकों को दो बड़ी टैक्स राहत मिल सकती है।
- सरकारी बॉन्ड से मिलने वाले ब्याज (Interest Income) पर इनकम टैक्स नहीं देना होगा।
- बॉन्ड बेचने पर होने वाले कैपिटल गेन (Capital Gain) पर भी टैक्स से छूट मिलेगी।
यह छूट 1 अप्रैल 2026 से लागू मानी जाएगी।
पहले कितना टैक्स देना पड़ता था?
अब तक विदेशी निवेशकों पर सरकारी बॉन्ड निवेश से जुड़े टैक्स नियम अपेक्षाकृत सख्त थे।
- 12 महीने से अधिक अवधि तक रखे गए बॉन्ड या अन्य प्रतिभूतियों पर 12.5% लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स देना पड़ता था।
- सरकारी बॉन्ड से मिलने वाले ब्याज पर 20% विदहोल्डिंग टैक्स (Withholding Tax) लागू था।
नई व्यवस्था लागू होने पर इन दोनों टैक्स से राहत मिलने की संभावना है, जिससे भारतीय बॉन्ड विदेशी निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक बनेंगे।
सरकार यह कदम क्यों उठा रही है?
हाल के महीनों में पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक सप्लाई चेन की चुनौतियों ने भारतीय अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ाया है। इसके साथ ही रुपये पर भी दबाव देखने को मिला।
सरकार का मानना है कि यदि विदेशी निवेशकों को बेहतर टैक्स व्यवस्था मिलेगी तो वे भारतीय सरकारी बॉन्ड में अधिक निवेश करेंगे। इससे कई फायदे होंगे।
- सरकारी बॉन्ड बाजार में तरलता (Liquidity) बढ़ेगी।
- सरकार के लिए उधार लेने की लागत कम हो सकती है।
- विदेशी पूंजी प्रवाह बढ़ने से रुपये को मजबूती मिल सकती है।
- भारतीय डेट मार्केट की वैश्विक निवेशकों के बीच प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति बेहतर होगी।
अध्यादेश की जरूरत क्यों पड़ी?
जब सरकार ने टैक्स राहत का फैसला लिया, उस समय संसद का सत्र नहीं चल रहा था। ऐसे में तत्काल प्रभाव से निर्णय लागू करने के लिए संविधान के अनुच्छेद 123 के तहत अध्यादेश जारी किया गया।
अब उसी अध्यादेश को संसद की मंजूरी दिलाने के लिए Income-tax (Amendment) Bill, 2026 पेश किया जाएगा। संसद से पारित होने के बाद यह स्थायी कानून बन जाएगा।
मानसून सत्र में कौन-कौन से अहम बिल आएंगे?
Income-tax (Amendment) Bill के अलावा सरकार मानसून सत्र में कई अन्य महत्वपूर्ण विधेयक भी पेश कर सकती है।
MSME Development (Amendment) Bill, 2026
इस बिल का उद्देश्य सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) के लिए कारोबार करना आसान बनाना है। साथ ही छोटे कारोबारियों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने और भुगतान विवादों के समाधान की व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा।
Demands for Excess Grants
सरकार वित्त वर्ष 2022-23 के लिए Demands for Excess Grants भी संसद में पेश करेगी। इसके जरिए उन अतिरिक्त खर्चों को संसद की मंजूरी दी जाएगी, जो पहले स्वीकृत बजट से अधिक हुए थे।
भारत की अर्थव्यवस्था पर क्या होगा असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि टैक्स छूट से विदेशी निवेशकों की भारतीय सरकारी बॉन्ड में दिलचस्पी बढ़ सकती है। इससे भारत के डेट मार्केट को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में मदद मिलेगी।
हालांकि, टैक्स छूट से सरकार को अल्पकाल में कुछ राजस्व का नुकसान हो सकता है, लेकिन यदि इससे बड़े पैमाने पर विदेशी निवेश आता है तो लंबे समय में अर्थव्यवस्था, बॉन्ड बाजार और वित्तीय स्थिरता को लाभ मिल सकता है।
निष्कर्ष
Income-tax (Amendment) Bill, 2026 भारत के पूंजी बाजार के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यदि संसद से यह बिल पारित हो जाता है, तो सरकारी बॉन्ड में निवेश करने वाले विदेशी निवेशकों को ब्याज और कैपिटल गेन पर टैक्स छूट मिलेगी। सरकार को उम्मीद है कि इससे विदेशी निवेश बढ़ेगा, सरकारी बॉन्ड बाजार मजबूत होगा और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था को अतिरिक्त सहारा मिलेगा।


