CBDT ने इनकम टैक्स ई-फाइलिंग पोर्टल के AIS में विदेशी संपत्ति और विदेशी आय की जानकारी देखने की सुविधा शुरू की है। जानिए कैसे देखें Foreign Assets Information और क्या होगा इसका फायदा।
ITR Filing 2026: करदाताओं के लिए बड़ी राहत
अगर आपकी विदेश में बैंक अकाउंट, निवेश, शेयर, डिविडेंड या किसी अन्य प्रकार की वित्तीय संपत्ति है, तो अब उसकी जानकारी देखना पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गया है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने इनकम टैक्स ई-फाइलिंग पोर्टल पर एक नई सुविधा शुरू की है, जिसके तहत पात्र करदाता अपने Annual Information Statement (AIS) में विदेशों में मौजूद संपत्तियों (Foreign Assets) और विदेशी स्रोतों से होने वाली आय (Foreign Income) की जानकारी देख सकेंगे।
इस कदम का उद्देश्य करदाताओं को सही जानकारी उपलब्ध कराना और स्वैच्छिक कर अनुपालन (Voluntary Tax Compliance) को बढ़ावा देना है, ताकि ITR दाखिल करते समय किसी प्रकार की गलती न हो।
क्या है CBDT की नई सुविधा?
CBDT ने बताया कि अब ई-फाइलिंग पोर्टल के AIS सेक्शन में Foreign Assets Information नाम का नया विकल्प उपलब्ध कराया गया है। इसमें भारत को अंतरराष्ट्रीय सूचना आदान-प्रदान व्यवस्था Automatic Exchange of Information (AEOI) के तहत प्राप्त जानकारी दिखाई जाएगी।
इसमें विदेशी देशों से प्राप्त वित्तीय जानकारियां शामिल होंगी, जिससे करदाता अपने ITR में सही विवरण दर्ज कर सकेंगे।
100 से अधिक देशों से मिलती है जानकारी
भारत ने दुनिया के 100 से अधिक देशों के साथ वित्तीय सूचनाओं के आदान-प्रदान संबंधी अंतरराष्ट्रीय समझौते किए हैं।
इन समझौतों के तहत भारत को हर वर्ष विदेशों में मौजूद भारतीय टैक्स रेजिडेंट्स की वित्तीय जानकारी प्राप्त होती है। इसमें शामिल हो सकते हैं—
- विदेशी बैंक खाते
- कस्टोडियल (Custodial) खाते
- वित्तीय निवेश
- ब्याज (Interest)
- डिविडेंड (Dividend)
- अन्य निर्धारित विदेशी आय
यह जानकारी हर साल आमतौर पर सितंबर से उपलब्ध होनी शुरू होती है।
फिलहाल किन वर्षों की जानकारी उपलब्ध होगी?
CBDT के अनुसार फिलहाल AIS में निम्न वर्षों की जानकारी उपलब्ध करा दी गई है—
- कैलेंडर वर्ष 2022
- कैलेंडर वर्ष 2023
- कैलेंडर वर्ष 2024
वहीं कैलेंडर वर्ष 2025 की जानकारी सितंबर या अक्टूबर 2026 में साझेदार देशों से प्राप्त होने के बाद पोर्टल पर जोड़ी जाएगी।
AIS में दिखने वाली जानकारी अंतिम रिकॉर्ड नहीं होगी
CBDT ने स्पष्ट किया है कि AIS में दिखाई गई जानकारी केवल वही होगी जो भारत को विदेशी देशों से प्राप्त हुई है।
इसका अर्थ यह नहीं है कि यह आपकी सभी विदेशी संपत्तियों या विदेशी आय का पूरा रिकॉर्ड है।
यदि आपके पास कोई अन्य विदेशी संपत्ति या विदेशी आय है, तो उसकी जानकारी देना आपकी जिम्मेदारी होगी, भले ही वह AIS में दिखाई न दे।
ITR में किन शेड्यूल में देनी होगी जानकारी?
विदेशी संपत्ति रखने वाले करदाताओं को ITR दाखिल करते समय विशेष रूप से इन शेड्यूल में जानकारी भरनी होगी—
- Schedule FA (Foreign Assets)
- Schedule FSI (Foreign Source Income)
CBDT ने कहा है कि इन दोनों शेड्यूल में पूरी और सही जानकारी देना आवश्यक है।
ऐसे देखें अपनी विदेशी संपत्ति की जानकारी
यदि आप AIS में उपलब्ध विदेशी संपत्ति संबंधी जानकारी देखना चाहते हैं, तो ये आसान स्टेप्स अपनाएं—
- इनकम टैक्स ई-फाइलिंग पोर्टल पर लॉगिन करें।
- Annual Information Statement (AIS) सेक्शन में जाएं।
- Compliance Portal खोलें।
- Reports विकल्प पर क्लिक करें।
- Foreign Assets Information चुनें।
- संबंधित कैलेंडर वर्ष का चयन करें।
- PDF डाउनलोड करके पूरी जानकारी देखें।
करदाताओं को SMS और Email से भी मिलेगी सूचना
CBDT इस नई सुविधा के बारे में पात्र करदाताओं को SMS और ई-मेल के माध्यम से भी जानकारी दे रहा है।
संदेश में यह भी याद दिलाया जा रहा है कि यदि उनके पास विदेश में कोई संपत्ति या विदेशी आय है, तो आकलन वर्ष 2026-27 (AY 2026-27) का ITR भरते समय उसका सही विवरण अवश्य दें।
‘कर साथी’ AI असिस्टेंट भी करेगा मदद
करदाता ई-फाइलिंग पोर्टल पर उपलब्ध AI आधारित वर्चुअल असिस्टेंट ‘कर साथी’ की मदद भी ले सकते हैं।
यह सुविधा निम्न कार्यों में सहायता करेगी—
- सही ITR फॉर्म चुनने में
- विदेशी संपत्ति की रिपोर्टिंग
- विदेशी आय दर्ज करने में
- टैक्स से जुड़े सामान्य सवालों के जवाब देने में
करदाताओं को क्या होगा फायदा?
नई व्यवस्था लागू होने के बाद करदाताओं को कई फायदे मिलेंगे—
- ITR भरते समय विदेशी संपत्ति की जानकारी आसानी से उपलब्ध होगी।
- गलत रिपोर्टिंग की संभावना कम होगी।
- टैक्स नियमों का पालन करना आसान होगा।
- ITR अधिक सटीक तरीके से दाखिल किया जा सकेगा।
- पारदर्शिता और स्वैच्छिक कर अनुपालन को बढ़ावा मिलेगा।
निष्कर्ष
CBDT की यह नई सुविधा उन करदाताओं के लिए बेहद उपयोगी साबित होगी जिनकी विदेशों में बैंक खाते, निवेश या अन्य वित्तीय संपत्तियां हैं। AIS में उपलब्ध जानकारी की मदद से वे अपने ITR में सही विवरण दर्ज कर सकेंगे और रिपोर्टिंग से जुड़ी अनजानी गलतियों से बच पाएंगे। हालांकि, यह याद रखना जरूरी है कि AIS में दिखाई गई जानकारी अंतिम या पूर्ण रिकॉर्ड नहीं है, इसलिए अपनी सभी विदेशी संपत्तियों और विदेशी आय का सही खुलासा करना करदाता की जिम्मेदारी बनी रहेगी।


