नई दिल्ली: El Nino का असर इस साल भारत की कृषि पर साफ दिखाई देने लगा है। कम बारिश और मौसम की अनिश्चितता के कारण खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित हुई है। सबसे ज्यादा चिंता कपास (Cotton) की खेती को लेकर जताई जा रही है, क्योंकि बुवाई का रकबा पिछले साल के मुकाबले काफी घटा है। यदि उत्पादन में कमी आती है तो भारत को कपास का आयात बढ़ाना पड़ सकता है। ऐसे में अमेरिका भारत को अपने कपास के लिए बड़े बाजार के रूप में देख रहा है।
Highlights
- El Nino से भारत में कपास की बुवाई प्रभावित।
- 10 जुलाई तक कपास का रकबा पिछले साल से 15.33% कम।
- अमेरिका ने भारत को कपास के बड़े आयातक बाजार के रूप में देखा।
- भारत 2026 तक अमेरिकी कपास का प्रमुख खरीदार बन सकता है।
- टेक्सटाइल उद्योग की मांग पूरी करने के लिए आयात बढ़ने की संभावना।
El Nino का भारत की खेती पर असर
El Nino के कारण इस वर्ष कई राज्यों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है। इसका सीधा असर खरीफ सीजन की बुवाई पर पड़ा है। धान, दालों और तिलहन के साथ-साथ कपास की खेती का रकबा भी घटा है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मानसून की स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो कपास उत्पादन पर दबाव बढ़ सकता है।
कपास भारत की सबसे महत्वपूर्ण औद्योगिक फसलों में से एक है। इसकी उपलब्धता कम होने पर टेक्सटाइल उद्योग के लिए कच्चे माल की लागत बढ़ सकती है।
अमेरिका को दिख रहा बड़ा कारोबार
नेशनल कॉटन काउंसिल ऑफ अमेरिका (National Cotton Council) के अध्यक्ष और CEO गैरी एडम्स ने BusinessLine से बातचीत में कहा कि भारत अमेरिकी कपास के लिए एक महत्वपूर्ण बाजार बनता जा रहा है। उनके अनुसार मौजूदा मार्केटिंग ईयर में भारत अमेरिकी कपास का चौथा सबसे बड़ा खरीदार बन चुका है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि यदि भारत में उत्पादन कमजोर रहता है तो 2026 तक अमेरिकी कपास का आयात और बढ़ सकता है।
क्यों बढ़ सकता है कपास का आयात?
10 जुलाई तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार देश में कपास की बुवाई पिछले वर्ष की तुलना में 15.33% कम रही है। यदि यह स्थिति बनी रहती है तो घरेलू उत्पादन घट सकता है और मांग पूरी करने के लिए आयात बढ़ाना पड़ सकता है।
भारत पहले भी उत्पादन में कमी आने पर अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील और अन्य देशों से कपास खरीद चुका है।
2026 तक ड्यूटी-फ्री आयात की सुविधा
सरकार ने 30 अक्टूबर 2026 तक विदेशों से आयात होने वाले कपास पर ड्यूटी-फ्री एक्सेस की सुविधा दी हुई है। इसका मतलब है कि निर्धारित अवधि तक आयातित कपास पर सीमा शुल्क नहीं लगाया जाएगा।
इससे अमेरिकी निर्यातकों समेत अन्य देशों को भारतीय बाजार में प्रतिस्पर्धी कीमतों पर कपास बेचने का अवसर मिल सकता है।
भारत की टेक्सटाइल इंडस्ट्री पर क्या असर होगा?
भारत दुनिया के सबसे बड़े टेक्सटाइल उत्पादक देशों में शामिल है। कृषि के बाद यह देश में रोजगार देने वाला दूसरा सबसे बड़ा क्षेत्र माना जाता है।
उद्योग से जुड़े आंकड़ों के अनुसार भारत में हर साल लगभग 313 से 315 लाख गांठ (प्रत्येक 170 किलोग्राम) कपास की खपत होती है। यदि घरेलू उत्पादन मांग से कम रहता है तो मिलों को आयातित कपास पर अधिक निर्भर रहना पड़ सकता है।
क्या भारत की स्थिति चिंताजनक है?
भारत अभी भी दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कपास उत्पादक देश है। हालांकि मौसम की अनिश्चितता, कम वर्षा और El Nino जैसी परिस्थितियां उत्पादन पर असर डाल सकती हैं। यदि आने वाले हफ्तों में बारिश सामान्य होती है तो उत्पादन में कुछ सुधार संभव है, लेकिन फिलहाल बाजार की नजर मौसम और बुवाई के अंतिम आंकड़ों पर बनी हुई है।
निष्कर्ष
El Nino का असर केवल किसानों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव भारत के टेक्सटाइल उद्योग और वैश्विक कपास व्यापार पर भी पड़ सकता है। यदि घरेलू उत्पादन अपेक्षा से कम रहता है तो भारत को कपास का आयात बढ़ाना पड़ सकता है, जिसका सबसे बड़ा लाभ अमेरिका जैसे प्रमुख निर्यातक देशों को मिल सकता है। आने वाले महीनों में मानसून, उत्पादन और आयात नीति यह तय करेगी कि भारत को कितनी मात्रा में विदेशी कपास खरीदनी पड़ेगी।


