Personal Loan EMI: आज के समय में पर्सनल लोन लेना पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गया है। कई बैंक और NBFC कुछ ही मिनटों में डिजिटल प्रोसेस के जरिए लोन मंजूर करने का दावा करते हैं। लेकिन सिर्फ तेजी से लोन मिल जाना ही सबसे बड़ी बात नहीं है। असली फर्क इस बात से पड़ता है कि आपको लोन किस ब्याज दर पर मिल रहा है। ब्याज दर में महज 2-4 फीसदी का अंतर भी पूरे लोन कार्यकाल में आपको हजारों रुपये अतिरिक्त चुकाने पर मजबूर कर सकता है। इसलिए आवेदन करने से पहले कुछ जरूरी बातों को समझना बेहद जरूरी है।
अगर आपका CIBIL स्कोर 750 या उससे अधिक है और आप सही तरीके से अलग-अलग बैंकों के ऑफर की तुलना करते हैं, तो कम ब्याज दर पर लोन मिलने की संभावना काफी बढ़ जाती है। आइए जानते हैं वे 5 अहम बातें, जिनका ध्यान रखकर आप पर्सनल लोन की लागत कम कर सकते हैं।
1. सबसे पहले अपना CIBIL स्कोर मजबूत करें
पर्सनल लोन की ब्याज दर तय करने में CIBIL स्कोर सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। बैंक और वित्तीय संस्थान इसी स्कोर के आधार पर यह तय करते हैं कि आवेदक कितना भरोसेमंद है।
- 750 या उससे अधिक स्कोर होने पर कम ब्याज मिलने की संभावना बढ़ जाती है।
- 700 से कम स्कोर होने पर ब्याज दर ज्यादा हो सकती है।
- बहुत कम स्कोर होने पर लोन आवेदन खारिज भी हो सकता है।
सिर्फ 4% ब्याज का अंतर कितना महंगा पड़ सकता है?
मान लीजिए दो लोगों ने 5 साल के लिए ₹5 लाख का पर्सनल लोन लिया।
| ब्याज दर | अनुमानित EMI | कुल ब्याज |
|---|---|---|
| 11% | करीब ₹10,870 | करीब ₹1.52 लाख |
| 15% | करीब ₹11,895 | करीब ₹2.14 लाख |
यानी सिर्फ 4 फीसदी अधिक ब्याज की वजह से करीब ₹62,000 अतिरिक्त ब्याज देना पड़ सकता है।
2. एक बैंक के ऑफर पर तुरंत सहमति न दें
अक्सर लोग जिस बैंक से पहला ऑफर मिलता है, उसी से लोन ले लेते हैं। जबकि अलग-अलग बैंक और NBFC अलग-अलग ब्याज दर, प्रोसेसिंग फीस और शर्तें देते हैं।
लोन लेने से पहले कम से कम 3 से 4 बैंकों के ऑफर की तुलना जरूर करें।
तुलना करते समय इन बातों पर विशेष ध्यान दें—
- ब्याज दर
- प्रोसेसिंग फीस
- लोन अवधि
- प्रीपेमेंट और फोरक्लोजर चार्ज
- लेट पेमेंट पेनाल्टी
ऑनलाइन तुलना करने में कुछ मिनट लगते हैं, लेकिन इससे लंबी अवधि में अच्छी-खासी बचत हो सकती है।
3. जरूरत जितना ही लोन लें
कई बार बैंक आपकी पात्रता के आधार पर जरूरत से अधिक लोन ऑफर कर देते हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आपको पूरी राशि लेनी ही चाहिए।
अगर आपकी जरूरत ₹6 लाख की है और बैंक ₹10 लाख का लोन मंजूर कर रहा है, तो केवल जरूरत के अनुसार ही राशि लें।
ज्यादा लोन लेने से—
- EMI बढ़ जाती है।
- कुल ब्याज अधिक देना पड़ता है।
- मासिक बजट पर दबाव बढ़ता है।
- भविष्य में वित्तीय जोखिम भी बढ़ सकता है।
4. सिर्फ ब्याज दर नहीं, सभी चार्ज समझें
कई बार कम ब्याज दर दिखाकर बैंक दूसरी फीस के जरिए कुल लागत बढ़ा देते हैं। इसलिए सिर्फ ब्याज देखकर फैसला करना सही नहीं है।
इन चार्ज की जानकारी जरूर लें—
- प्रोसेसिंग फीस
- GST
- फोरक्लोजर चार्ज
- पार्ट-पेमेंट चार्ज
- लेट पेमेंट पेनाल्टी
- अन्य प्रशासनिक शुल्क
लोन एग्रीमेंट पढ़ने के बाद ही आवेदन करें, ताकि बाद में किसी अतिरिक्त शुल्क का सामना न करना पड़े।
5. अपनी आय के अनुसार EMI तय करें
ऐसी EMI चुनें जिसे आप बिना किसी वित्तीय दबाव के हर महीने समय पर चुका सकें।
विशेषज्ञों की सलाह है कि आपकी कुल मासिक EMI आपकी मासिक आय के 35% से 40% से अधिक नहीं होनी चाहिए।
अगर EMI आपकी क्षमता से ज्यादा होगी तो—
- डिफॉल्ट का खतरा बढ़ जाएगा।
- लेट पेमेंट पेनाल्टी लग सकती है।
- CIBIL स्कोर खराब हो सकता है।
- भविष्य में नया लोन लेना मुश्किल हो सकता है।
पर्सनल लोन लेते समय किन बातों का रखें ध्यान?
- हमेशा अच्छा CIBIL स्कोर बनाए रखें।
- अलग-अलग बैंक और NBFC के ऑफर की तुलना करें।
- जरूरत के अनुसार ही लोन राशि चुनें।
- सभी चार्ज और शर्तों को अच्छी तरह पढ़ें।
- अपनी आय के अनुसार ही EMI तय करें।
निष्कर्ष
पर्सनल लोन एक अनसिक्योर्ड (बिना गारंटी वाला) लोन होता है, इसलिए इसकी ब्याज दर होम लोन या कार लोन की तुलना में अधिक रहती है। ऐसे में थोड़ी-सी समझदारी और सही योजना बनाकर आप लोन की कुल लागत को काफी हद तक कम कर सकते हैं। अच्छा CIBIL स्कोर, सही तुलना और जिम्मेदारी से उधार लेने की आदत न केवल कम ब्याज दिलाने में मदद करती है, बल्कि आपकी वित्तीय स्थिति भी मजबूत बनाए रखती है।
Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य जानकारी और जागरूकता के उद्देश्य से तैयार किया गया है। किसी भी लोन, निवेश, टैक्स, बीमा या अन्य वित्तीय निर्णय लेने से पहले संबंधित वित्तीय सलाहकार या विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें। NewsJagran किसी भी वित्तीय उत्पाद या सेवा की सिफारिश नहीं करता।


