भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच विदेशी ब्रोकरेज HSBC ने निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत दिए हैं। ब्रोकरेज ने भारतीय शेयर बाजार की रेटिंग ‘Underweight’ से बढ़ाकर ‘Neutral’ कर दी है और 2026 के अंत तक BSE Sensex का लक्ष्य 84,000 अंक तय किया है। इससे संकेत मिलता है कि मौजूदा स्तर से सेंसेक्स में करीब 8.6% की बढ़त की संभावना है।
HSBC का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट, रुपये में स्थिरता और विदेशी निवेशकों की वापसी जैसे कारक भारतीय बाजार के लिए सकारात्मक माहौल बना रहे हैं। ऐसे में यदि आप शेयर बाजार में निवेश करने की योजना बना रहे हैं, तो इस रिपोर्ट के प्रमुख संकेतों को समझना जरूरी है।
HSBC ने क्यों बढ़ाई भारतीय शेयर बाजार की रेटिंग?
HSBC ने अपनी ताजा रिपोर्ट में भारतीय इक्विटी पर रुख बदलते हुए रेटिंग ‘Underweight’ से ‘Neutral’ कर दी है। इससे पहले ब्रोकरेज भारतीय बाजार को लेकर सतर्क था, लेकिन अब उसे आने वाले महीनों में बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है।
रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय कंपनियों की कमाई (Earnings) पर दबाव कम होने लगा है। विशेष रूप से कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और रुपये को स्थिर रखने के लिए किए गए उपायों से बाजार का जोखिम घटा है।
Sensex के लिए 84,000 का नया टारगेट
HSBC ने 2026 के अंत तक BSE Sensex का लक्ष्य 84,000 अंक कर दिया है। इससे पहले ब्रोकरेज ने 80,500 अंक का लक्ष्य दिया था।
यदि यह अनुमान सही साबित होता है तो मौजूदा स्तर से सेंसेक्स में लगभग 8.6 फीसदी की बढ़त देखने को मिल सकती है। यह लक्ष्य इस बात का संकेत है कि विदेशी संस्थागत निवेशकों को भारतीय बाजार की दीर्घकालिक संभावनाओं पर भरोसा बढ़ रहा है।
2026 में अब तक बाजार का प्रदर्शन कमजोर
हालांकि साल 2026 की शुरुआत भारतीय शेयर बाजार के लिए चुनौतीपूर्ण रही है।
- सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में अब तक 7% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है।
- वैश्विक अनिश्चितता और विदेशी निवेशकों की बिकवाली का असर बाजार पर देखने को मिला।
- इसके बावजूद हाल के महीनों में बाजार ने स्थिरता दिखाई है और निफ्टी 24,000 के महत्वपूर्ण स्तर के आसपास बना हुआ है।
HSBC का मानना है कि अगले छह महीनों में बाजार की तस्वीर बेहतर हो सकती है।
India VIX में गिरावट से बढ़ा निवेशकों का भरोसा
बाजार में डर और उतार-चढ़ाव को मापने वाला India VIX घटकर 12.91 पर आ गया है।
16 जुलाई को इसमें करीब 2.71% की गिरावट दर्ज हुई। आम तौर पर 15 से नीचे का VIX बाजार के लिए सकारात्मक संकेत माना जाता है क्योंकि इससे निवेशकों का भरोसा मजबूत होने का संकेत मिलता है।
कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट बनी राहत
भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 90% आयात करता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में गिरावट भारतीय अर्थव्यवस्था और कंपनियों दोनों के लिए राहत लेकर आती है।
अमेरिका-ईरान तनाव के बाद अप्रैल में Brent Crude Futures करीब 126.41 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था। इसके बाद कीमतों में लगभग 33% की गिरावट आ चुकी है।
तेल सस्ता होने से कई सेक्टरों की लागत कम होती है और कंपनियों के मुनाफे में सुधार की संभावना बढ़ जाती है।
कंपनियों की कमाई पर दबाव होगा कम
HSBC का कहना है कि कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से कंपनियों के ऑपरेटिंग मार्जिन पर दबाव कम होगा।
ब्रोकरेज के अनुसार,
“ऑयल की कीमतों में गिरावट से मार्जिन बेहतर होंगे और अर्निंग्स डाउनग्रेड का जोखिम भी कम हो गया है।”
इससे आने वाली तिमाहियों में कॉरपोरेट नतीजों में सुधार देखने को मिल सकता है।
विदेशी निवेशकों की भारतीय बाजार में वापसी
जुलाई 2026 में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) का रुख फिर सकारात्मक होता दिखाई दे रहा है।
मुख्य आंकड़े:
- जुलाई में अब तक करीब 1.6 अरब डॉलर के भारतीय शेयर खरीदे गए।
- लगातार चार महीनों की बिकवाली के बाद विदेशी निवेशक फिर से Net Buyers बने हैं।
- इससे बाजार में निवेशकों का विश्वास मजबूत हुआ है।
हालांकि पूरे वर्ष 2026 में अब तक विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से लगभग 27.7 अरब डॉलर निकाल चुके हैं, जो पिछले वर्ष की तुलना में अधिक है।
आखिर विदेशी निवेशक पहले क्यों बेच रहे थे?
HSBC के मुताबिक विदेशी निवेशकों की बिकवाली की सबसे बड़ी वजह वैश्विक निवेश का बदलता रुझान रही।
हाल के महीनों में निवेशकों ने अमेरिका, दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे बाजारों में अधिक निवेश किया क्योंकि वहां Artificial Intelligence (AI) से जुड़ी कंपनियों की संख्या ज्यादा है और इन कंपनियों के शेयरों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली।
भारत में फिलहाल AI आधारित बड़ी लिस्टेड कंपनियों की संख्या सीमित है, जिसके कारण कुछ विदेशी फंड ने अपना निवेश अन्य बाजारों की ओर स्थानांतरित किया।
निवेशकों के लिए क्या हैं संकेत?
HSBC की रिपोर्ट यह संकेत देती है कि भारतीय बाजार में जोखिम पहले की तुलना में कम हुआ है। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट, विदेशी निवेशकों की वापसी और बाजार की बेहतर स्थिरता जैसे कारक आगे बाजार को समर्थन दे सकते हैं।
हालांकि निवेशकों को केवल किसी एक ब्रोकरेज की रिपोर्ट के आधार पर निवेश का निर्णय नहीं लेना चाहिए। निवेश से पहले कंपनी के फंडामेंटल, वैल्यूएशन, सेक्टर की स्थिति और अपने जोखिम प्रोफाइल का आकलन करना जरूरी है।
डिस्क्लेमर
यह लेख केवल जानकारी देने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह अवश्य लें।


