8th Pay Commission Salary Hike: 8वें वेतन आयोग की चेयरपर्सन जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई को पश्चिम बंगाल में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) ड्राफ्ट कमेटी की अध्यक्ष बनाए जाने के बाद केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के बीच नई चिंता पैदा हो गई है। कर्मचारी संगठनों को आशंका है कि उनकी बढ़ती जिम्मेदारियों का असर कहीं 8वें वेतन आयोग की रिपोर्ट की समयसीमा पर न पड़ जाए। इसी को लेकर अखिल भारतीय एनपीएस कर्मचारी महासंघ (AINPSEF) ने केंद्र सरकार से तत्काल स्पष्टीकरण जारी करने की मांग की है।
रंजना प्रकाश देसाई को मिली नई जिम्मेदारी
पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य में प्रस्तावित यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) के मसौदे की समीक्षा और तैयारी के लिए 9 सदस्यीय उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया है। इस समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई करेंगी।
यह पहली बार नहीं है जब उन्हें ऐसी जिम्मेदारी मिली है। इससे पहले वह उत्तराखंड और महाराष्ट्र में भी UCC ड्राफ्ट तैयार करने वाली समितियों की अध्यक्ष रह चुकी हैं। अब एक साथ कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलने से कर्मचारियों के बीच वेतन आयोग के काम को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
कर्मचारियों को किस बात का डर?
जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई फिलहाल 8वें केंद्रीय वेतन आयोग की भी अध्यक्ष हैं। देशभर के लाखों केंद्रीय कर्मचारी और पेंशनर्स इस आयोग की सिफारिशों का इंतजार कर रहे हैं, क्योंकि इन्हीं के आधार पर भविष्य में वेतन, भत्तों और पेंशन में संशोधन होगा।
कर्मचारी संगठनों का मानना है कि यदि आयोग की अध्यक्ष अन्य बड़े सरकारी कार्यों में अधिक व्यस्त रहेंगी तो वेतन आयोग की रिपोर्ट तैयार होने में देरी हो सकती है। हालांकि अभी तक सरकार या आयोग की ओर से ऐसा कोई संकेत नहीं दिया गया है कि आयोग का काम प्रभावित होगा।
AINPSEF ने सरकार से मांगा स्पष्टीकरण
अखिल भारतीय एनपीएस कर्मचारी महासंघ (AINPSEF) के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनजीत सिंह पटेल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए जस्टिस देसाई को नई जिम्मेदारी मिलने पर शुभकामनाएं दीं, लेकिन साथ ही कर्मचारियों की चिंता भी सामने रखी।
उन्होंने कहा कि जस्टिस देसाई की कानूनी विशेषज्ञता और अनुभव सराहनीय है, लेकिन चूंकि वह 8वें वेतन आयोग की भी चेयरपर्सन हैं, इसलिए लाखों कर्मचारियों और पेंशनर्स में रिपोर्ट में देरी की आशंका बढ़ रही है।
महासंघ ने केंद्र सरकार से अनुरोध किया है कि वह जल्द आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी करे और यह भरोसा दिलाए कि 8वें वेतन आयोग का काम तय समय पर पूरा होगा तथा नई जिम्मेदारियों का उसकी कार्यप्रणाली पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
8वें वेतन आयोग का काम कहां तक पहुंचा?
8वें वेतन आयोग का गठन नवंबर 2025 में किया गया था। आयोग ने अपनी सिफारिशें तैयार करने के लिए 17 महीने का समय मांगा था।
हाल ही में आयोग की एक महत्वपूर्ण बैठक कोलकाता में हुई, जिसमें विभिन्न कर्मचारी संगठनों, पेंशनर्स और अन्य हितधारकों के सुझावों और मांगों पर चर्चा की गई। आयोग फिलहाल सभी पक्षों से मिले सुझावों का अध्ययन कर रहा है।
क्या कर्मचारियों की सैलरी में देरी होगी?
फिलहाल ऐसी कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है जिससे यह कहा जा सके कि जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की नई नियुक्ति के कारण 8वें वेतन आयोग की रिपोर्ट या कर्मचारियों की सैलरी संशोधन प्रक्रिया में देरी होगी।
यह केवल कर्मचारी संगठनों द्वारा जताई गई आशंका है। केंद्र सरकार ने अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। इसलिए कर्मचारियों को किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सरकार या वेतन आयोग की आधिकारिक घोषणा का इंतजार करना चाहिए।
कर्मचारियों के लिए आगे क्या महत्वपूर्ण होगा?
आने वाले महीनों में 8वें वेतन आयोग की बैठकों, कर्मचारी संगठनों से होने वाली चर्चा और सरकार की ओर से जारी होने वाले स्पष्टीकरण पर सभी की नजर रहेगी। यदि आयोग तय समय के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपता है तो वेतन और पेंशन संशोधन की प्रक्रिया भी उसी के अनुरूप आगे बढ़ सकेगी।
नोट: फिलहाल 8वें वेतन आयोग की रिपोर्ट में देरी होने की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। कर्मचारी संगठनों ने केवल संभावित देरी की आशंका जताते हुए सरकार से स्पष्ट स्थिति बताने की मांग की है।


