US-Iran Tension Impact: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने एक बार फिर वैश्विक ऊर्जा बाजार में हलचल मचा दी है। होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बढ़े विवाद, हूती हमलों और अमेरिकी प्रस्तावों के चलते कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है। भारत के लिए राहत की बात यह है कि वह दूसरे देशों से क्रूड ऑयल खरीद सकता है, लेकिन LPG के मामले में उसकी निर्भरता अब भी खाड़ी देशों पर बनी हुई है। ऐसे में यदि हालात और बिगड़ते हैं तो घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों और सप्लाई दोनों पर असर पड़ सकता है।
अमेरिका-ईरान तनाव ने फिर बढ़ाई तेल बाजार की बेचैनी
वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत पिछले सप्ताह करीब 72 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से बढ़कर 86 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई। इस तेजी के पीछे तीन बड़े कारण बताए जा रहे हैं—
- अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य तनाव
- सऊदी अरब पर हूती विद्रोहियों के हमले
- होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले कार्गो पर अमेरिका द्वारा प्रस्तावित अतिरिक्त शुल्क
इन घटनाओं ने अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा आपूर्ति को लेकर नई अनिश्चितता पैदा कर दी है।
भारत के पास कच्चे तेल का विकल्प मौजूद
ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि भारत पूरी तरह संकट में नहीं है। यदि खाड़ी देशों से आपूर्ति प्रभावित होती है तो भारत रूस, अमेरिका, अफ्रीका और अन्य देशों से कच्चा तेल तथा LNG आयात कर सकता है।
हालांकि इसका सबसे बड़ा नुकसान यह होगा कि भारत को वैकल्पिक स्रोतों से तेल खरीदने के लिए अधिक कीमत चुकानी पड़ सकती है, जिससे आयात बिल बढ़ेगा और महंगाई पर दबाव आएगा।
LPG सप्लाई पर क्यों बढ़ी चिंता?
जहां क्रूड ऑयल के लिए विकल्प उपलब्ध हैं, वहीं LPG (रसोई गैस) के मामले में भारत की स्थिति अपेक्षाकृत कमजोर है।
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है। यदि होर्मुज स्ट्रेट या रेड सी मार्ग में लंबे समय तक बाधा आती है तो LPG की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। इससे घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी और सप्लाई में देरी की आशंका बढ़ सकती है।
होर्मुज स्ट्रेट क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है।
- दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल इसी रास्ते से गुजरता है।
- भारत, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे एशियाई देशों की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग पर निर्भर करता है।
- यदि यहां आवाजाही बाधित होती है तो वैश्विक तेल कीमतों में तेजी आना लगभग तय माना जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान इस रणनीतिक समुद्री मार्ग पर अपना प्रभाव बनाए रखना चाहता है, जबकि अमेरिका और उसके सहयोगी देश इसे खुला रखना चाहते हैं।
अमेरिका ने फिर शुरू की नौसैनिक नाकाबंदी
अमेरिका ने घोषणा की है कि वह ईरान के खिलाफ नौसैनिक कार्रवाई फिर से तेज करेगा और होर्मुज स्ट्रेट को खुला रखने के लिए अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाएगा।
इसके अलावा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस समुद्री मार्ग से गुजरने वाले कार्गो पर 20% अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रस्ताव भी रखा है।
ऊर्जा उद्योग के जानकारों का अनुमान है कि यदि यह प्रस्ताव लागू होता है तो इस मार्ग से आने वाले कच्चे तेल की लागत में करीब 15 डॉलर प्रति बैरल तक अतिरिक्त बढ़ोतरी हो सकती है।
खाड़ी देशों से सप्लाई सीमित होने का खतरा
यदि क्षेत्र में तनाव लंबा चलता है तो खाड़ी देशों से तेल निर्यात सीमित हो सकता है। ऐसे में दुनिया के कई देश वैकल्पिक सप्लायरों की ओर रुख करेंगे, जिससे वैश्विक मांग बढ़ेगी और तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रह सकती हैं।
इसका सीधा असर भारत जैसे बड़े आयातक देशों पर पड़ेगा।
हूती हमलों से रेड सी रूट भी खतरे में
यमन के हूती विद्रोहियों ने हाल के दिनों में सऊदी अरब पर मिसाइल हमले किए हैं। इससे रेड सी शिपिंग रूट को लेकर भी चिंताएं बढ़ गई हैं।
यह मार्ग एशिया के लिए तेल आपूर्ति का अहम रास्ता माना जाता है। इससे पहले 2023 में हूती हमलों के कारण कई जहाजों को अफ्रीका के केप ऑफ गुड होप के रास्ते जाना पड़ा था, जिससे यात्रा का समय और परिवहन लागत दोनों बढ़ गए थे।
यदि इस बार भी ऐसी स्थिति बनती है तो तेल और गैस की वैश्विक सप्लाई चेन पर नया दबाव आ सकता है।
भारत ने जहाजों पर हमले की निंदा की
भारत ने होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहे दो व्यापारिक जहाजों पर हुए हमलों की कड़ी निंदा की है। इन हमलों में एक भारतीय नाविक की मौत हो गई जबकि कई अन्य घायल हुए।
विदेश मंत्रालय ने सभी पक्षों से अपील की है कि व्यापारिक जहाजों और नागरिक ढांचे पर हमले रोके जाएं तथा होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही बिना किसी बाधा के जारी रखी जाए।
भारतीय अर्थव्यवस्था पर क्या होगा असर?
यदि पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ता है तो भारत को कई आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
- कच्चे तेल का आयात महंगा होगा।
- LPG की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।
- पेट्रोल और डीजल महंगे होने की संभावना बढ़ेगी।
- महंगाई दर पर असर पड़ सकता है।
- सरकार का आयात बिल बढ़ सकता है।
- उद्योगों और परिवहन क्षेत्र की लागत में इजाफा हो सकता है।
निष्कर्ष
भारत के लिए राहत की बात यह है कि कच्चे तेल के मामले में उसके पास कई वैकल्पिक सप्लायर मौजूद हैं। लेकिन LPG के क्षेत्र में खाड़ी देशों पर निर्भरता अभी भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। यदि अमेरिका-ईरान तनाव और गहराता है तथा होर्मुज स्ट्रेट या रेड सी में बाधाएं बढ़ती हैं, तो इसका असर सिर्फ वैश्विक तेल बाजार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भारतीय उपभोक्ताओं की जेब, महंगाई और देश की ऊर्जा सुरक्षा पर भी साफ दिखाई दे सकता है।


