Rishabh Khaneja Story: भारत में IIT में दाखिला लाखों छात्रों का सपना होता है। हर साल छात्र कठिन तैयारी करते हैं ताकि देश के प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थानों में जगह बना सकें। लेकिन ऋषभ खनेजा ने ऐसा फैसला लिया जिसने लोगों को चौंका दिया। उन्होंने दावा किया कि IIT प्रवेश परीक्षा के दौरान उन्हें कई सवालों के सही जवाब पता थे, फिर भी उन्होंने जानबूझकर गलत उत्तर लिखे। उनका कहना था कि यह हार मानने का फैसला नहीं था, बल्कि अपनी पसंद की जिंदगी चुनने की शुरुआत थी।
Highlights
- IIT एंट्रेंस परीक्षा में जानबूझकर गलत उत्तर लिखने का दावा।
- इंजीनियरिंग की बजाय Arts में पढ़ाई का रास्ता चुना।
- Teach For India से जुड़कर बच्चों को पढ़ाया।
- कॉर्पोरेट नौकरी छोड़कर रचनात्मक जीवन अपनाया।
- आज लेखक, फोटोग्राफर और कलाकार के रूप में काम कर रहे हैं।
IIT की दौड़ से हटने का फैसला क्यों लिया?
भारत में अक्सर IIT को सफलता का सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता है। ऐसे माहौल में IIT की तैयारी करने वाले छात्र परीक्षा में अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश करते हैं। लेकिन ऋषभ खनेजा ने Humans of Bombay के साथ साझा किए गए अपने अनुभव में बताया कि उन्होंने जानबूझकर परीक्षा में कुछ सवालों के गलत उत्तर लिखे, जबकि उन्हें सही जवाब पता थे।
उनके मुताबिक, यह फैसला किसी डर, दबाव या तैयारी की कमी की वजह से नहीं था। उन्हें महसूस होने लगा था कि वह उस रास्ते पर बढ़ रहे हैं जिसे समाज और परिवार सफल मानता है, लेकिन वह खुद उस जीवन को लेकर आश्वस्त नहीं थे।
परिवार और समाज की उम्मीदें थीं अलग
ऋषभ परिवार के बड़े बेटे थे। उनके लिए भी वही पारंपरिक रास्ता तय माना जा रहा था—विज्ञान की पढ़ाई, इंजीनियरिंग, फिर MBA और उसके बाद किसी बड़ी कंपनी में नौकरी।
परिवार और रिश्तेदारों के बीच IIT और बड़ी कॉर्पोरेट नौकरी को सफलता की पहचान माना जाता था। ऐसे माहौल में अलग निर्णय लेना आसान नहीं था, लेकिन ऋषभ के मन में लगातार यह सवाल उठता रहा कि क्या यही रास्ता उन्हें वास्तव में संतुष्टि देगा।
दूसरों की सफलता देखकर बदली सोच
ऋषभ ने बताया कि उन्होंने ऐसे कई लोगों को देखा जिन्होंने समाज के हिसाब से बड़ी उपलब्धियां हासिल की थीं, लेकिन वे भीतर से खुश नजर नहीं आते थे। इसी अनुभव ने उन्हें अपनी जिंदगी और करियर को लेकर गंभीरता से सोचने पर मजबूर किया।
आखिरकार उन्होंने इंजीनियरिंग की बजाय मुंबई के मिथिबाई कॉलेज से Arts की पढ़ाई करने का निर्णय लिया। उस समय कई लोगों ने उनके फैसले पर सवाल उठाए, लेकिन उन्होंने अपनी पसंद को प्राथमिकता दी।
Teach For India से जुड़ने के बाद आया बड़ा बदलाव
पढ़ाई के बाद ऋषभ Teach For India से जुड़े और मुंबई के मानखुर्द क्षेत्र के बच्चों को पढ़ाने लगे। उनका कहना है कि यही अनुभव उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ।
बच्चों के साथ काम करते हुए उन्हें महसूस हुआ कि असली संतुष्टि केवल ऊंचे पद या बड़ी सैलरी में नहीं, बल्कि किसी के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने में भी मिल सकती है।
कॉर्पोरेट नौकरी भी छोड़ी
इसके बाद ऋषभ ने कुछ समय कॉर्पोरेट सेक्टर में भी काम किया। नौकरी अच्छी थी, वेतन भी संतोषजनक था, लेकिन उन्हें भीतर से खालीपन महसूस होता रहा।
आखिरकार उन्होंने नौकरी छोड़ दी और करीब तीन महीने की बाइक यात्रा पर निकल पड़े। इस यात्रा के दौरान उन्होंने खुद को समझने और अपने जीवन के उद्देश्य को पहचानने की कोशिश की।
आज क्या कर रहे हैं ऋषभ खनेजा?
वर्तमान में ऋषभ हिमाचल प्रदेश के बीड़ में रहते हैं। वह लेखक, फोटोग्राफर और कलाकार के रूप में काम कर रहे हैं। इसके साथ ही वह लोगों को रचनात्मक सोच विकसित करने और अपने वास्तविक जुनून को पहचानने में भी मदद करते हैं।
उनका मानना है कि हर व्यक्ति को ऐसा काम चुनना चाहिए जिसमें उसे अर्थ और संतुष्टि महसूस हो।
सफलता की उनकी परिभाषा
ऋषभ का कहना है कि उनके और उनके माता-पिता के सपने अलग नहीं थे। उनके माता-पिता भी चाहते थे कि वह खुश रहें, लेकिन उस खुशी तक पहुंचने का रास्ता उन्हें खुद तलाशना था।
उनकी कहानी यह बताती है कि सफलता का मतलब केवल प्रतिष्ठित संस्थान, बड़ी डिग्री या ऊंची सैलरी नहीं है। कई बार अपने मन की राह चुनना और उसी में संतुष्टि पाना भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है।
नोट: यह लेख ऋषभ खनेजा द्वारा Humans of Bombay के साथ साझा किए गए व्यक्तिगत अनुभव और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। इसमें व्यक्त विचार उनके व्यक्तिगत अनुभव हैं।


