Gold Price Outlook 2026: अगर आप सोना खरीदने की योजना बना रहे हैं या निवेश के लिए सही समय का इंतजार कर रहे हैं, तो आपके लिए राहत भरी खबर है। अंतरराष्ट्रीय रिसर्च एजेंसी Fitch Solutions की रिसर्च यूनिट BMI ने वर्ष 2026 के लिए सोने के औसत कीमत अनुमान को पहले के मुकाबले घटा दिया है। एजेंसी का मानना है कि अगले साल सोने में रिकॉर्ड तेजी की संभावना फिलहाल सीमित दिखाई दे रही है।
रिपोर्ट के अनुसार, 2026 के लिए सोने की औसत कीमत का अनुमान 4,600 डॉलर प्रति औंस से घटाकर 4,400 डॉलर प्रति औंस कर दिया गया है। मौजूदा समय में अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना लगभग 4,026 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा है। यानी मौजूदा स्तर से अधिकतम करीब 9% तक की बढ़त की संभावना जताई गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि मजबूत अमेरिकी डॉलर, ऊंची ब्याज दरें, वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुधार और कम होते भू-राजनीतिक तनाव जैसे कई कारण सोने की कीमतों पर दबाव बनाए रख सकते हैं।
Highlights
- 2026 में सोने की कीमतों में रिकॉर्ड तेजी की संभावना कम
- BMI ने गोल्ड का औसत लक्ष्य 4,600 डॉलर से घटाकर 4,400 डॉलर किया
- मजबूत डॉलर और ऊंची ब्याज दरें बन सकती हैं बड़ी बाधा
- वैश्विक तनाव कम होने से घट सकती है सुरक्षित निवेश की मांग
- केंद्रीय बैंकों की खरीदारी से कीमतों को मिल सकता है सहारा
1. मजबूत डॉलर से सोने की मांग पर पड़ सकता है असर
सोने की कीमतों और अमेरिकी डॉलर का संबंध अक्सर विपरीत दिशा में चलता है। जब डॉलर मजबूत होता है, तब अन्य देशों के निवेशकों के लिए सोना खरीदना महंगा हो जाता है। इसका सीधा असर वैश्विक मांग पर पड़ता है।
BMI का अनुमान है कि आने वाले समय में डॉलर इंडेक्स 98 से 102 के बीच रह सकता है। यदि यह बढ़कर 105-110 के स्तर तक पहुंचता है, तो सोने की कीमतों में तेजी सीमित रह सकती है।
2. ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद कमजोर
सोना ऐसा निवेश है जिस पर ब्याज या डिविडेंड नहीं मिलता। इसलिए जब बैंक और बॉन्ड बेहतर रिटर्न देने लगते हैं, तो निवेशकों का झुकाव सोने से हटकर फिक्स्ड इनकम एसेट्स की ओर बढ़ जाता है।
BMI का मानना है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक Federal Reserve 2026 के शेष समय में ब्याज दरों में कटौती नहीं करेगा और दरें लगभग 3.75% के आसपास बनी रह सकती हैं। इससे सोने में निवेश की मांग पर दबाव रह सकता है।
3. वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुधार भी बड़ी वजह
रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया की अर्थव्यवस्था धीरे-धीरे स्थिर होती दिखाई दे रही है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव में कमी तथा वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति में सुधार से निवेशकों का भरोसा बढ़ा है।
BMI ने 2026 में वैश्विक आर्थिक वृद्धि 2.4% रहने का अनुमान लगाया है। जब आर्थिक गतिविधियां बेहतर होती हैं, तो निवेशक सुरक्षित निवेश के बजाय शेयर बाजार और अन्य जोखिम वाले निवेश विकल्पों की ओर रुख करते हैं। इससे सोने की मांग कम हो सकती है।
4. कम होते भू-राजनीतिक तनाव से घट सकता है ‘सेफ हेवन’ आकर्षण
पिछले कुछ वर्षों में रूस-यूक्रेन युद्ध, मध्य-पूर्व तनाव और अन्य वैश्विक घटनाओं ने सोने को सुरक्षित निवेश (Safe Haven) के रूप में मजबूत समर्थन दिया था।
हालांकि BMI का कहना है कि यदि मध्य-पूर्व में हालात सामान्य बने रहते हैं और हॉर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही बिना किसी बाधा के जारी रहती है, तो निवेशकों की सुरक्षित निवेश वाली मांग कम हो सकती है। इसका असर सोने की कीमतों पर भी पड़ सकता है।
5. महंगाई नियंत्रित रही तो सोने की चमक पड़ सकती है फीकी
महंगाई बढ़ने पर निवेशक अपनी पूंजी की सुरक्षा के लिए अक्सर सोने का सहारा लेते हैं। लेकिन यदि महंगाई नियंत्रित रहती है, तो सोने में निवेश की जरूरत भी कम महसूस होती है।
BMI के मुताबिक ऊर्जा कीमतों में नरमी के कारण महंगाई पर दबाव घट रहा है। यदि यह ट्रेंड जारी रहता है, तो सोने की कीमतों को मिलने वाला एक अहम समर्थन कमजोर हो सकता है।
क्या फिर भी सोना सस्ता हो जाएगा?
रिपोर्ट यह नहीं कहती कि सोने में बड़ी गिरावट निश्चित है। विशेषज्ञों का मानना है कि दुनिया के कई केंद्रीय बैंक लगातार अपने गोल्ड रिजर्व बढ़ा रहे हैं। यह खरीदारी सोने की कीमतों को मजबूत आधार देती रहेगी।
यदि भविष्य में Federal Reserve ब्याज दरों में कटौती करता है या अमेरिकी डॉलर कमजोर पड़ता है, तो सोना फिर 4,500 डॉलर प्रति औंस से ऊपर जा सकता है। दूसरी ओर यदि डॉलर और मजबूत हुआ तथा बॉन्ड यील्ड बढ़ी, तो कीमतें 3,500 डॉलर प्रति औंस तक फिसलने की संभावना भी बनी रह सकती है।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
अगर आप शादी, त्योहार या लंबी अवधि के निवेश के लिए सोना खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो विशेषज्ञों के अनुसार फिलहाल कीमतों में बहुत बड़ी तेजी की संभावना सीमित दिख रही है। हालांकि सोने की चाल पूरी तरह वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों, अमेरिकी मौद्रिक नीति, डॉलर की मजबूती और भू-राजनीतिक घटनाओं पर निर्भर करेगी। इसलिए किसी भी निवेश निर्णय से पहले बाजार की स्थिति और विशेषज्ञों की सलाह जरूर लें।
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