Varanasi Elevated Corridor: वाराणसी (काशी) को ट्रैफिक जाम से बड़ी राहत मिलने वाली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) ने वरुणा नदी के किनारे 43.218 किलोमीटर लंबे 6/4 लेन एलिवेटेड कॉरिडोर के निर्माण को मंजूरी दे दी है। करीब 10,998.32 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह मेगा प्रोजेक्ट राष्ट्रीय राजमार्ग-31 (NH-31), वाराणसी रिंग रोड, शहर के प्रमुख रेलवे स्टेशनों, एयरपोर्ट और घाटों को तेज कनेक्टिविटी देगा। परियोजना पूरी होने के बाद NH-31 से काशी रेलवे स्टेशन तक का सफर 40 मिनट से घटकर सिर्फ 20 मिनट रह जाएगा।
Highlights
- 43.218 किमी लंबा 6/4 लेन एलिवेटेड कॉरिडोर
- कुल परियोजना लागत 10,998.32 करोड़ रुपये
- NH-31 और वाराणसी रिंग रोड को मिलेगा सीधा कनेक्शन
- काशी रेलवे स्टेशन तक यात्रा समय 40 मिनट से घटकर 20 मिनट
- NHAI हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (HAM) के तहत होगा निर्माण
- एयरपोर्ट, घाट, रेलवे स्टेशन और DDU जंक्शन तक बेहतर कनेक्टिविटी
वाराणसी डीकंजेशन प्लान का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 10,998.32 करोड़ रुपये की कुल पूंजीगत लागत से हाइब्रिड एन्युइटी मॉडल पर उत्तर प्रदेश में वरुणा नदी तट और उसके रैंप/लूप के साथ 6/4 लेन के एलिवेटेड कॉरिडोर के विकास को मंजूरी दी
इस परियोजना में 6/4-लेन का अधिकतर एलिवेटेड कॉरिडोर है, जिसमें मेन कैरिजवे,… pic.twitter.com/BtEeXeTgiz
— पीआईबी हिंदी (@PIBHindi) July 15, 2026 वाराणसी लगातार बढ़ते ट्रैफिक दबाव से जूझ रहा है। शहर की संकरी सड़कें और धार्मिक पर्यटन के कारण हर दिन लाखों लोगों की आवाजाही होती है। इसी चुनौती को देखते हुए केंद्र सरकार ने वरुणा नदी के समानांतर आधुनिक एक्सेस-कंट्रोल एलिवेटेड कॉरिडोर को मंजूरी दी है।
यह परियोजना वाराणसी डीकंजेशन प्लान का प्रमुख हिस्सा है, जिसका उद्देश्य शहर के अंदर भारी वाहनों और लंबी दूरी के ट्रैफिक को अलग मार्ग उपलब्ध कराना है।
प्रोजेक्ट का पूरा रूट और डिजाइन
इस कॉरिडोर की कुल लंबाई 43.218 किलोमीटर होगी।
मुख्य विशेषताएं:
- 6/4 लेन एक्सेस-कंट्रोल एलिवेटेड कॉरिडोर
- NH-31 और वाराणसी रिंग रोड के बीच सीधा संपर्क
- कई फ्लाईओवर, रैंप और लूप
- सर्विस रोड का निर्माण
- 80 से 100 किमी प्रति घंटे की डिजाइन स्पीड
- बिना ट्रैफिक सिग्नल के तेज आवागमन
इस कॉरिडोर को इस तरह डिजाइन किया गया है कि शहर के अंदर ट्रैफिक का दबाव कम हो और लंबी दूरी के वाहन सीधे अपने गंतव्य तक पहुंच सकें।
10,998 करोड़ रुपये की परियोजना में कहां होगा कितना खर्च?
कैबिनेट द्वारा मंजूर कुल लागत 10,998.32 करोड़ रुपये है।
इसमें शामिल हैं:
| मद | अनुमानित लागत |
|---|---|
| सिविल निर्माण | ₹4,565.33 करोड़ |
| भूमि अधिग्रहण | ₹934.91 करोड़ |
| अन्य तकनीकी एवं परियोजना खर्च | शेष राशि |
परियोजना का निर्माण भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा Hybrid Annuity Model (HAM) के तहत कराया जाएगा।
NH-31 से काशी रेलवे स्टेशन अब सिर्फ 20 मिनट
फिलहाल NH-31 से काशी रेलवे स्टेशन तक पहुंचने में शहर के ट्रैफिक के कारण लगभग 40 मिनट लग जाते हैं।
एलिवेटेड कॉरिडोर बनने के बाद:
- यात्रा समय घटकर 20 मिनट रह जाएगा।
- लगभग 50% समय की बचत होगी।
- ट्रैफिक जाम में कमी आएगी।
- ईंधन की बचत होगी।
- वाहन संचालन लागत कम होगी।
- सड़क सुरक्षा में सुधार होगा।
किन-किन स्थानों को मिलेगी सीधी कनेक्टिविटी?
यह कॉरिडोर वाराणसी और आसपास के कई महत्वपूर्ण स्थानों को बेहतर तरीके से जोड़ेगा।
इनमें शामिल हैं:
- काशी रेलवे स्टेशन
- वाराणसी सिटी रेलवे स्टेशन
- वाराणसी जंक्शन (कैंट स्टेशन)
- पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन (DDU)
- लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट, बाबतपुर
- रामनगर पोर्ट
- वाराणसी के प्रमुख घाट
- सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय
- चंदौली क्षेत्र
इससे यात्रियों के साथ-साथ पर्यटकों और तीर्थयात्रियों को भी बड़ी सुविधा मिलेगी।
व्यापार और लॉजिस्टिक्स को मिलेगा बड़ा फायदा
यह परियोजना केवल ट्रैफिक कम करने तक सीमित नहीं है, बल्कि पूर्वी उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी नई गति देगी।
पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत यह कॉरिडोर:
- एक इकोनॉमिक नोड से जुड़ेगा।
- एक सोशल नोड तक पहुंच आसान बनाएगा।
- छह प्रमुख लॉजिस्टिक्स नोड्स को बेहतर कनेक्टिविटी देगा।
- कृषि उत्पादों की तेज ढुलाई में मदद करेगा।
- औद्योगिक सामान और निर्माण सामग्री के परिवहन को आसान बनाएगा।
- खनिज और अन्य माल ढुलाई की लागत कम करेगा।
इससे चंदौली, वाराणसी और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों को भी बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है।
पर्यटन को मिलेगा नया बढ़ावा
वाराणसी दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन केंद्रों में से एक है। हर साल करोड़ों श्रद्धालु और विदेशी पर्यटक यहां आते हैं।
एलिवेटेड कॉरिडोर बनने के बाद:
- घाटों तक पहुंच आसान होगी।
- रेलवे स्टेशन से शहर का सफर तेज होगा।
- एयरपोर्ट से आने-जाने में समय बचेगा।
- धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
- होटल, परिवहन और स्थानीय कारोबार को लाभ मिलेगा।
क्या बदलेगा वाराणसी में?
इस परियोजना के पूरा होने के बाद वाराणसी की शहरी परिवहन व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। शहर के भीतरी हिस्सों में ट्रैफिक दबाव कम होगा, लंबी दूरी के वाहनों को वैकल्पिक मार्ग मिलेगा और यात्रियों को तेज, सुरक्षित एवं सुगम सफर का अनुभव होगा। साथ ही, यह कॉरिडोर पर्यटन, व्यापार, लॉजिस्टिक्स और क्षेत्रीय आर्थिक विकास को भी नई गति देगा।


