नई दिल्ली: दुनिया भर में कॉफी सिर्फ एक पेय नहीं बल्कि एक लग्जरी लाइफस्टाइल का हिस्सा भी बन चुकी है। आमतौर पर लोग कॉफी की अलग-अलग वैरायटी का स्वाद लेने के लिए अच्छी-खासी रकम खर्च करते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया की सबसे महंगी कॉफी एक ऐसे जानवर के मल से तैयार होती है जिसे देखकर शायद कई लोग उसे पीने का विचार ही छोड़ दें?
इस अनोखी कॉफी का नाम कोपी लुवाक (Kopi Luwak) है। यह इंडोनेशिया सहित दक्षिण-पूर्व एशिया के कुछ देशों में तैयार की जाती है और अपनी दुर्लभ उत्पादन प्रक्रिया, सीमित उपलब्धता तथा खास स्वाद के कारण दुनिया की सबसे महंगी कॉफी मानी जाती है।
क्या है कोपी लुवाक कॉफी?
कोपी लुवाक का उत्पादन एशियन पाम सिवेट (Asian Palm Civet) नामक छोटे स्तनधारी जीव की मदद से होता है। यह जानवर पकी हुई कॉफी चेरी (Coffee Cherry) खाता है। चेरी का गूदा तो पच जाता है, लेकिन उसके अंदर मौजूद कॉफी बीन्स बिना पूरी तरह पचे मल के साथ बाहर निकल आते हैं।
इन्हीं बीन्स को बाद में विशेष प्रक्रिया से साफ कर, सुखाकर और भूनकर कॉफी तैयार की जाती है।
कैसे बनती है दुनिया की सबसे महंगी कॉफी?
कोपी लुवाक तैयार करने की प्रक्रिया काफी लंबी और मेहनत वाली होती है।
- सबसे पहले एशियन पाम सिवेट पकी हुई कॉफी चेरी खाता है।
- उसके पाचन तंत्र में मौजूद प्राकृतिक एंजाइम कॉफी बीन्स के प्रोटीन पर असर डालते हैं।
- इससे कॉफी का स्वाद अधिक स्मूद और कम कड़वा माना जाता है।
- बाद में जानवर के मल से कॉफी बीन्स अलग किए जाते हैं।
- बीन्स को कई चरणों में अच्छी तरह धोकर साफ किया जाता है।
- इसके बाद उन्हें धूप में सुखाया जाता है।
- आखिर में रोस्टिंग (Roasting) और ग्राइंडिंग के बाद कॉफी तैयार होती है।
विशेषज्ञों के अनुसार सही तरीके से प्रोसेसिंग होने के बाद यह कॉफी स्वास्थ्य की दृष्टि से सुरक्षित मानी जाती है।
कितनी है इसकी कीमत?
कोपी लुवाक दुनिया की सबसे महंगी कॉफी में शामिल है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित कीमत
- ₹20,000 से ₹80,000 प्रति किलोग्राम
- भारत में 100 ग्राम पैक की कीमत लगभग ₹3,500 से ₹12,000 तक
- लग्जरी कैफे और फाइव स्टार होटलों में एक कप की कीमत ₹2,000 से ₹5,000 तक पहुंच सकती है।
कीमत ब्रांड, गुणवत्ता और उत्पादन के तरीके के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।
आखिर इतनी महंगी क्यों होती है?
इस कॉफी की ऊंची कीमत के पीछे कई कारण हैं।
- उत्पादन की मात्रा बेहद सीमित होती है।
- बीन्स को एक-एक करके इकट्ठा करना पड़ता है।
- सफाई और प्रोसेसिंग में काफी समय और मेहनत लगती है।
- दुनिया भर में इसकी मांग काफी ज्यादा है।
- असली और प्रमाणित कोपी लुवाक की उपलब्धता बहुत कम होती है।
इन्हीं वजहों से इसकी कीमत सामान्य कॉफी की तुलना में कई गुना अधिक होती है।
कैसा होता है इसका स्वाद?
कॉफी विशेषज्ञों के मुताबिक कोपी लुवाक का स्वाद पारंपरिक कॉफी से अलग होता है।
इसमें कड़वाहट अपेक्षाकृत कम होती है और इसका फ्लेवर अधिक स्मूद व हल्का माना जाता है। कई लोग इसकी प्राकृतिक मिठास और सुगंध की भी तारीफ करते हैं। यही कारण है कि कई कॉफी प्रेमी इसे बिना चीनी या दूध के पीना पसंद करते हैं।
इस कॉफी को लेकर विवाद भी हैं
हालांकि कोपी लुवाक जितनी प्रसिद्ध है, उतनी ही विवादों में भी रही है।
वन्यजीव संरक्षण से जुड़े कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों का कहना है कि बढ़ती मांग के कारण कई स्थानों पर एशियन पाम सिवेट को छोटे पिंजरों में कैद करके जबरन कॉफी चेरी खिलाई जाती है। इससे जानवरों के स्वास्थ्य और प्राकृतिक व्यवहार पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
इसी वजह से विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि यदि कोई व्यक्ति कोपी लुवाक खरीदना चाहता है, तो वह केवल प्रमाणित वाइल्ड-सोर्स्ड (Wild-Sourced) या एथिकल (Ethically Produced) उत्पाद ही चुने।
क्या वाकई पीने लायक है यह कॉफी?
स्वाद के मामले में कोपी लुवाक को दुनिया की बेहतरीन कॉफी में गिना जाता है, लेकिन इसकी उत्पादन प्रक्रिया जानने के बाद कई लोग इसे पीने से हिचकिचाते हैं। वहीं कॉफी के शौकीन इसे एक अनोखे और प्रीमियम अनुभव के रूप में देखते हैं।
कुल मिलाकर, कोपी लुवाक सिर्फ एक कॉफी नहीं बल्कि स्वाद, दुर्लभता और लग्जरी का अनोखा मिश्रण है, जिसकी कीमत और निर्माण प्रक्रिया इसे दुनिया की सबसे चर्चित कॉफी में शामिल करती है।


